63 साल पुराने देशभक्ति गीत के बोल लिखे गए थे सिगरेट के पैकेट पर, लता मंगेशकर ने PM के सामने गया था पहली बार, जानें क्या है पूरी कहानी ?

हम सभी  गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को सुनकर बड़े हुए हैं.  आज भी अगर इस गाने की शुरुआती बोल भी सुन लें, तो पलके भीग जाती है. ऐसे में जो लोग नहीं जानते हैं, उन्हें बता दें, ये गाना 63 साल पुराना है. इस गाने को जब स्टेज पर पहली बार प्रतिष्ठित गायिका लता मंगेशकर ने गया था.

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ऐसे लिखा गया था भारत का सबसे पसंदीदा देशभक्ति गीत

हम सभी  गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को सुनकर बड़े हुए हैं.  आज भी अगर इस गाने की शुरुआती बोल भी सुन लें, तो पलके भीग जाती है. ऐसे में जो लोग नहीं जानते हैं, उन्हें बता दें, ये गाना 63 साल पुराना है. इस गाने को जब स्टेज पर पहली बार प्रतिष्ठित गायिका लता मंगेशकर ने गया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की भी आंखें भर आई थी.  ऐसे में आइए जानते हैं, इस गाने  को लिखने के पीछे क्या कहानी है?

कहां पहली बार लता जी ने गाया था गाना?

गाना 'ऐ मेरे वतन के लोगों' को पहली बार दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में हुए गणतंत्र दिवस के एक कार्यक्रम में अपनी मधुर आवाज में लता मंगेशकर ने गाया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब ये गाना समाप्त हुआ, तो उस दौरान चारों और सन्नाटा छा गया और सभी की आंखें नम थी.

बता दें, जब लता मंगेशकर ने दिल्ली में इस गाने को गाया था, उस समय भारत और चीन के बीच युद्ध को खत्म हुए सिर्फ दो महीने की हुए थे. स्टेडियम में प्रधानमंत्री  पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ- साथ  तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन भी मौजूद थे. बताया जाता है, जब लता जी स्टेज पर चढ़ी तो गाना गाने के दौरान उनका गला भर आया था और उनकी आवाज स्टेडियम में चारों ओर गूंज रही थी. जिसके बाद हर किसी की आंखे नम थी.


किसने लिखा था गाना

ये तो हम सभी जानते हैं कि इस गाने को लगा मंगेशकर ने गाया था, लेकिन कम लोग जानते हैं कि गाने के बोल किसने लिखे. आपको बता दें, इस गाने को  कवि प्रदीप ने लिखा था. जिसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. दरअसल उस समय भारत भारत-चीन युद्ध चल रहा था और लगातार मारे गए भारतीय सैनिकों की खबरें आ रही थी. इस खबर को सुनने के बाद पूरे देश के साथ- साथ कवि प्रदीप भी काफी दुखी थे.  साल 1962 में जब देश युद्ध से गुजर रहा था, उस दौरान वह मुंबई के माहिम में समुद्र किनारे टहल रहे थे और मन ही मन वो भारतीय सैनिकों के बारे में सोच रहे थे. जिसके बाद उनके मन में कुछ शब्द आए. इन्हीं शब्दों को लिखने के लिए उन्होंने किसी से पेन मांगा और सिगरेट के डिब्बे पर गाने की शुरुआत पंक्तियां लिख डाली.

बता दें, कुछ समय बाद कवि प्रदीप को दिल्ली के एक चैरिटी प्रोग्राम के लिए गीत लिखने के लिए कहा गया था जिसके लिए उन्होंने सिगरेट के डिब्बे पर लिखे गए गाने का संगीत तैयार करने करने के लिए  रामचंद्र से संपर्क किया था. फिर इस गाने को संगीत मिला और लता जी ने अपनी आवाज दी. आज भारतवर्ष में ये गाना लोगों की जुबान पर है और सबसे प्रसिद्ध देशभक्ति गाने के रूप में जाना जाता है.

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