हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गाने हैं, जिनकी धुन जितनी यादगार है, उनसे जुड़े किस्से भी उतने ही दिलचस्प हैं. 'चल री सजनी अब क्या सोचे' ऐसा ही एक सदाबहार गीत है, जिसने छह दशक से ज्यादा समय से संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बना रखी है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गाना पहले किसी और आवाज में रिकॉर्ड होने वाला था. आखिर ऐसा क्या हुआ कि यह गीत मुकेश के हिस्से आया और उनकी पहचान बन गया? आइए जानते हैं कौन थे वो सिंगर, जो पहले इस गाने को गाने वाले थे और जब ये गाना रिलीज होकर हिट हुआ तो वो पछताए भी.
पहली पसंद थे किशोर कुमार
1960 में रिलीज हुई फिल्म 'मुंबई का बाबू' के लिए एस.डी. बर्मन ने इस गीत की धुन तैयार की थी और वह इसे किशोर कुमार से गवाना चाहते थे. लेकिन उस समय किशोर कुमार लगातार रिकॉर्डिंग में व्यस्त थे और एस.डी. बर्मन को उनकी तारीख नहीं मिल पा रही थी. काफी इंतजार के बाद उन्हें सलाह दी गई कि इस गीत को किसी दूसरे गायक से रिकॉर्ड कराया जाए. आखिरकार उन्होंने मुकेश को चुना और यही फैसला आगे चलकर हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास का हिस्सा बन गया.
मुकेश की आवाज ने गीत को अमर बना दिया
मुकेश ने जब 'चल री सजनी अब क्या सोचे' रिकॉर्ड किया, तो गीत सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच गया. दर्द, बिछड़ने और भावनाओं से भरे इस गीत में उनकी आवाज ने ऐसी गहराई जोड़ दी कि यह उनके करियर के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गया. आज भी यह गीत पुराने हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय दर्दभरे गीतों में गिना जाता है.
'मुंबई का बाबू' में देव आनंद और सुचित्रा सेन मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म को इसकी कहानी, अभिनय और संगीत के लिए खूब सराहा गया. वहीं, 'चल री सजनी अब क्या सोचे' फिल्म की कहानी के मुताबिक इतना सटीक बैठा था कि उसकी सबसे बड़ी पहचान बन गया. गीत के बोल मजरूह सुलतानपुरी ने लिखे थे.
आज भी नहीं हुआ इस गीत का जादू कम
रिलीज के करीब छह दशक बाद भी 'चल री सजनी अब क्या सोचे' रेडियो, स्टेज शो और डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर बराबर सुना जाता है. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की उन अमर धुनों में शामिल हो चुका है, जिन्हें हर पीढ़ी अपने अंदाज में सुनती और महसूस करती है.
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