नदिया के पार का एक्टर, 41 की उम्र में जिसका आतंकियों ने उड़ा दिया था विमान, बीवी-बच्चे समेत 329 जिंदगियां हुई थीं महासागर में दफन

यह कहानी एक ऐसे कलाकार की है, जिसने कम समय में ही भारतीय सिनेमा और फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी, लेकिन किस्मत ने उसे बहुत जल्दी छीन लिया. हम बात कर रहे हैं इंदर ठाकुर की, जिनका पूरा नाम इंदर हीरालाल ठाकुर था.

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नदिया के पार फिल्म से मिली थी इंदर ठाकुर को पहचान

यह कहानी एक ऐसे कलाकार की है, जिसने कम समय में ही भारतीय सिनेमा और फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी, लेकिन किस्मत ने उसे बहुत जल्दी छीन लिया. हम बात कर रहे हैं इंदर ठाकुर की, जिनका पूरा नाम इंदर हीरालाल ठाकुर था. वह न सिर्फ एक अभिनेता थे, बल्कि इंटरनेशनल मॉडल और फैशन डिजाइनर के तौर पर भी मशहूर थे. इसके अलावा वह एयर इंडिया में फ्लाइट पर्सर के पद पर भी काम कर चुके थे. इंदर, हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के मशहूर विलेन हीरालाल ठाकुर के सबसे छोटे बेटे थे.

इंदर ठाकुर ने भले ही बहुत कम फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्होंने अपनी छाप जरूर छोड़ी. साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘नदिया के पार' से उन्हें खास पहचान मिली. इस फिल्म में उन्होंने सचिन पिलगांवकर के बड़े भाई का रोल निभाया था, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया. यही फिल्म आगे चलकर ‘हम आपके हैं कौन!' के रूप में दोबारा बनाई गई, जिसमें उनके निभाए किरदार को मोहनीश बहल ने दोहराया, जबकि सचिन के रोल में सलमान खान नजर आए.

फिल्मों के साथ-साथ इंदर ठाकुर फैशन इंडस्ट्री में भी तेजी से आगे बढ़ रहे थे. कम उम्र में ही उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर नाम कमा लिया था. साल 1985 में उन्हें इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर का अवॉर्ड भी मिला था. फैशन के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था, जिसके चलते उन्होंने इस क्षेत्र में पढ़ाई की और कॉलेज के समय से ही मॉडलिंग शुरू कर दी. जल्द ही वह एक जाने-माने मॉडल बन गए और इसी दौरान उन्हें राजश्री प्रोडक्शन्स की फिल्म ‘नदिया के पार' का ऑफर मिला.

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इंदर ठाकुर का करियर ऊंचाइयों की ओर बढ़ ही रहा था कि साल 1985 में एक भयानक हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया. एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुए बम धमाके में उनकी जान चली गई. यह हादसा उस समय के सबसे खौफनाक आतंकी हमलों में गिना जाता है. इस त्रासदी में सिर्फ इंदर ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और चार साल का बेटा भी मारे गए. बताया जाता है कि विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया था, जिसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना की सबसे दुखद बात यह रही कि पीड़ितों के परिजनों को उनके शव तक नसीब नहीं हो सके. इंदर ठाकुर की जिंदगी भले ही छोटी रही, लेकिन उन्होंने अपने काम से जो पहचान बनाई, वह आज भी याद की जाती है.

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