बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे रहे हैं, जो किसी एक ही किरदार से दर्शकों की यादों में बस गए. हमारी आज की कहानी भी ऐसे ही किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है. इस एक्टर की सख्त आवाज, गंभीर चेहरे और स्क्रीन पर दमदार मौजूदगी ने हर बार एक ही भूमिका को नया जीवन दिया. फिल्मी कहानियों में कानून का चेहरा बनकर वह इतने लोकप्रिय हुए कि असली वर्दीधारी भी उन्हें सैल्यूट ठोकने लगे. उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम करके हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक खास जगह बनाई है. अगर आप अभी तक इस एक्टर को नहीं पहचान पाए हैं, तो बता दें हम बात कर रहें हैं बिग बी की सुपरहिट फिल्म जंजीर में भी काम कर चुके इफ्तिखार की.
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ऐसे मिला पहला ब्रेक
इफ्तिखार को फिल्म इंडस्ट्री में पहला बड़ा ब्रेक दिग्गज एक्टर अशोक कुमार ने दिलाया था. उन्हें फिल्म ‘इत्तेफाक' में पहली बार इंस्पेक्टर की भूमिका मिली. इस किरदार को उन्होंने इतनी गंभीरता और सच्चाई से निभाया कि इसके बाद वे इस खास रोल के लिए फिल्म मेकर्स की पहली पसंद बन गए. उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारों के साथ कई हिट फिल्मों में काम किया था. इनमें ‘जंजीर', ‘डॉन', ‘द ट्रेन', ‘खामोशी', ‘राजपूत', ‘आवाम' और ‘महबूब की मेहंदी' जैसी फिल्में शामिल हैं.
असली पुलिसकर्मी भी करते थे सम्मान
इफ्तिखार की एक्टिंग इतनी रियल थी कि असली पुलिसकर्मी भी उन्हें सलाम करते थे. इफ्तिखार ने अपने करियर में जिस तरह पुलिस अफसर के किरदार को निभाया है, वह आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में याद किया जाता है. उनकी एक्टिंग ने उन्हें उस दौर के सबसे भरोसेमंद और सम्मानित सहायक कलाकारों में शामिल कर दिया था.
पर्सनल लाइफ और दुखद अंत
22 फरवरी 1924 को पंजाब के जालंधर में जन्मे इफ्तिखार ने 1944 में फिल्म ‘तकरार' से अपने करियर की शुरुआत की थी. विभाजन के समय उनका परिवार पाकिस्तान चला गया, लेकिन इफ्तिखार अपनी पत्नी और बेटियों के साथ भारत में ही रहे और मुंबई में बस गए. उनकी दो बेटियां थीं, सलमा और सईदा. सईदा को कैंसर हो गया था और फरवरी 1995 में उनका निधन हो गया. बेटी की मौत का सदमा इफ्तिखार सह नहीं पाए. बताया जाता है कि उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और बेटी के निधन के सिर्फ एक महीने बाद, 4 मार्च 1995 को उनका भी निधन हो गया.