पत्नी को घर में जिंदा गाड़ा, तीन साल तक बोलता रहा झूठ, असल घटना पर है 4 एपिसोड की ये सीरीज, देख कांप जाएगी रूह

ये एक हाईप्रोफाइल केस रहा और जब सच सामने आया तो सुनने वालों की रूह कांप गई. पति ने अपनी पत्नी को घर में जिंदा गाड़ा और तीन साल तक सभी से झूठ बोलता रहा कि वह जिंदा है.

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एक ऐसी कहानी जिसे देख कांप जाएगी रूह
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नई दिल्ली:

शकेरेह खलीली एक खूबसूरत और अमीर महिला थीं. कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक में पैदा हुई थीं. बेंगलुरु की यह जानी-मानी हस्ती और रियल एस्टेट डेवलपर एक बड़े आलीशान घर में रहती थीं, दुनिया भर में घूमती थीं और शहर के रईस लोगों के बीच उठती-बैठती थीं. फिर अप्रैल 1991 में अचानक वह गायब हो गईं. तीन साल तक उनका दूसरा पति, मुरली मनोहर मिश्रा - जिसे स्वामी श्रद्धानंद के नाम से भी जाना जाता है - ने एक के बाद एक कई बहाने बनाए. लेकिन किसी को नहीं पता चल पा रहा था कि शकेरेह कहां है. वह कहता कि शकेरेह ट्रिप पर गई हैं. वह कहीं चली गई हैं. वह लौट आएंगी. लेकिन किसी को भनक तक नहीं थी कि असल बात क्या है.

इस पूरे समय सच उसी घर के नीचे दबा हुआ था जिसमें वह खुद रह रहे थे. मई 1994 में, पुलिस ने घर के आंगन में खुदाई शुरू की. जमीन में कई फीट नीचे तक खुदाई की. ताबूत जैसे लकड़ी के बक्से के अंदर उन्हें जो मिला उसने इस गुमशुदगी के मामले को भारत के सबसे भयानक मर्डर केस में बदल दिया.

शकेरेह का कंकाल एक गद्दे पर पड़ा था. उनका एक हाथ अभी भी उसे कसकर पकड़े हुए था. जांचकर्ताओं का मानना ​​था कि जिंदा दफनाए जाने के बाद बाहर निकलने की कोशिश में उन्होंने अपनी जिंदगी की ये आखिरी कोशिश की होगी. यह मर्डर - जिस पर बाद में अमेजन प्राइम वीडियो की 2023 की डॉक्युसीरीज 'डांसिंग ऑन द ग्रेव' बनी - दौलत, धोखे और लगभग तीन साल तक जमीन के नीचे छिपे एक राज की कहानी थी.

दौलत और रसूख वाले परिवार में जन्म

1947 में एक अमीर भारतीय-फारसी परिवार में जन्मीं शकेरेह, मैसूर, जयपुर और हैदराबाद जैसी रियासतों के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थीं. उनका परिवार अपने रसूख, रियल एस्टेट के काम, बिजनेस कनेक्शन और समाज सेवा के लिए जाना जाता था. शकेरेह सुख-सुविधाओं वाली दुनिया में पली-बढ़ीं और उन्हें काफी दौलत विरासत में मिली.

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18 साल की उम्र में उन्होंने भारतीय राजनयिक अकबर मिर्जा खलीली से शादी की. इंडियन फॉरेन सर्विस में अपने करियर के दौरान खलीली की कई अंतरराष्ट्रीय पोस्टिंग के समय वह उनके साथ रहीं और आखिर में बेंगलुरु में बस गईं. इस जोड़े की चार बेटियां थीं. बाद में शकेरेह रियल एस्टेट डेवलपमेंट के काम में आ गईं, लेकिन खलीली के साथ उनकी शादी टूटने लगी. 1980 के दशक के बीच में उनका तलाक हो गया.

उस वक्त तक उनकी जिंदगी में एक और आदमी आ चुका था. वह बाबा जिसने उसका भरोसा जीता. शकेरेह की मुलाकात 1982 में मुरली मनोहर मिश्रा से हुई. साधारण बैकग्राउंड से आने वाले मिश्रा ने खुद को 'स्वामी श्रद्धानंद' के तौर पर पेश किया. उसने खुद को एक आध्यात्मिक व्यक्ति बताया और दावा किया कि उनके पास असाधारण शक्तियां हैं.

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इस मामले से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, शुरू में वह प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में मदद करके शकेरेह के करीब आया. धीरे-धीरे उसने शकेरेह का भरोसा जीत लिया और उनकी जिंदगी में गहराई से शामिल हो गया. खलीली से तलाक के कुछ समय बाद, 1986 में शकीरा ने श्रद्धानंद से शादी कर ली. उनके परिवार ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया, लेकिन वह अपनी बात पर अड़ी रहीं.

इस शादी से श्रद्धानंद को ऐसी जिंदगी मिली जो उसने कभी सोची भी नहीं थी. अब वह एक अमीर और मशहूर महिला के साथ रह रहा था और उनकी प्रॉपर्टी, पैसे और सामाजिक रुतबे का इस्तेमाल कर रहा था. लेकिन कहा जाता है कि उनके रिश्ते में खटास आ गई. दोनों के बीच अक्सर पैसों और शकेरेह के अपनी बेटियों के साथ रिश्ते को लेकर झगड़े होते थे.

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बाद में सरकारी वकीलों ने दलील दी कि श्रद्धानंद की दिलचस्पी शकेरेह में कभी भी आध्यात्मिक या रोमांटिक नहीं थी. यह सब लालच की वजह से था. फिर शकेरेह गायब हो गईं. अप्रैल 1991 में शकेरेह का कोई अता पता नहीं था. जब भी परिवार वाले सवाल पूछते, तो श्रद्धानंद अपनी बात बदल देता. उसने दावा किया कि वह कहीं और चली गई हैं और लगातार यही कहता रहा कि वह जिंदा है. दिन बीतते गए और फिर महीने और फिर साल बन गए.

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शकेरेह की बेटी सबा ने इन बातों को मानने से इनकार कर दिया. वह पुलिस के पास गईं और बाद में 'हेबियस कॉर्पस' याचिका दायर की, ताकि अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके और पता लगाया जा सके कि उनकी मां के साथ क्या हुआ था.

इस बीच, खबर है कि श्रद्धानंद बेंगलुरु में ऐशो-आराम की जिंदगी जीता रहा. जिस महिला की दौलत ने उनकी जिंदगी बदल दी थी, वह कहीं नहीं मिल रही थी, लेकिन वह लगभग तीन साल तक शक के दायरे से बाहर रहने में कामयाब रहा. आखिरकार 1994 में यह मामला खुला. घर के आंगन से एक खौफनाक सच सामने आया.

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कर्नाटक पुलिस के एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद, श्रद्धानंद जांच करने वालों को उस घर के आंगन के एक हिस्से में ले गए जहां वे दोनों रहते थे. पुलिस ने खुदाई शुरू की. जमीन की सतह से कई फीट नीचे, उन्हें लकड़ी का एक बक्सा मिला. यह ताबूत जैसा एक बक्सा था, जिसे आंगन के नीचे सील करके रखा गया था. उसके अंदर एक गद्दे पर शकेरेह का कंकाल पड़ा था. इस घटना पर बनी फिल्म डांसिंग ऑन द ग्रेव को आप अमेजन प्राइम पर देख सकते हैं.

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