अशोक कुमार और किशोर कुमार के भाई को देखा है आपने, 50s में की फिल्मों एंट्री, भाईयों की तरह नहीं मिला मुकाम

दिग्गज सुपरस्टार अशोक कुमार और किशोर कुमार के भाई अनूप कुमार योडलिंग के 'बादशाह' थे, जिनके अभिनय में भी संगीत का जादू झलकता था.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
अशोक कुमार-किशोर कुमार के भाई हैं अनूप कुमार
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार आए हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई. उनमें से एक थे अनूप कुमार. अनूप कुमार केवल एक अच्छे अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि संगीत के प्रति उनका लगाव भी कमाल का था. बचपन से ही उन्होंने संगीत की शिक्षा ली थी और खासकर योडलिंग में उनकी पकड़ बहुत अच्छी थी. हालांकि उन्होंने फिल्मों में गायक के तौर पर ज्यादा काम नहीं किया, लेकिन उनकी समझ और लगाव संगीत के प्रति उनके अभिनय में साफ झलकता था. यही चीज उन्हें अपने भाइयों अशोक कुमार और किशोर कुमार से अलग बनाती थी.

एक्टिंग और संगीत में थी रूचि

अनूप कुमार का जन्म 9 जनवरी 1926 को मध्य प्रदेश में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था. उनके पिता कुंजालाल गांगुली एक वकील थे और माता गौरी देवी गृहिणी थीं. बचपन से ही अनूप को अभिनय और संगीत दोनों में रुचि थी. उन्होंने संगीत की पढ़ाई की और गायिकी की तकनीक सीखी, लेकिन बाद में उन्होंने फिल्मों में अपना करियर बनाने का फैसला किया.

50 के दशक में शुरू की फिल्मी करियर की शुरूआत

अनूप कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1950 में आई फिल्म 'गौना' से की. शुरुआती समय में उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल निभाए, लेकिन धीरे-धीरे उनकी अदाकारी ने उन्हें पहचान दिलाई, लेकिन लोकप्रियता फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' के जरिए हासिल हुई. इस फिल्म में अनूप ने अपने दोनों भाइयों, अशोक और किशोर के साथ काम किया. इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग, मासूम नटखटपन और एक्टिंग में संगीत की समझ दर्शकों को काफी पसंद आई. यह फिल्म आज भी दर्शकों के बीच क्लासिक मानी जाती है.

करियर में अनूप कुमार ने की 75 फिल्में

अनूप कुमार ने अपने करियर में लगभग 75 फिल्मों में काम किया. 'खिलाड़ी,' 'देख कबीरा रोया,' 'जीवन साथी,' 'जंगली,' 'कश्मीर की कली,' 'प्रेम पुजारी,' और 'अमर प्रेम' समेत कई फिल्में लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं. फिल्मों में अनूप की खासियत थी कि चाहे वह कॉमिक रोल निभाएं या गंभीर, उनकी हर भूमिका में संगीत की समझ कहीं न कहीं झलकती थी. कई बार उनकी फिल्मों में गानों का चुनाव और उनका अभिनय एक साथ मिलकर दर्शकों को और भी ज्यादा पसंद आता था.

80 से 90 के दशक में छोड़ी छाप

टीवी में भी अनूप कुमार ने अपनी छाप छोड़ी. 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने 'भीम भवानी', 'दादा दादी की कहानियां', और 'एक राजा एक रानी' जैसे शो में काम किया. वह हमेशा अभिनय और संगीत के प्रति गंभीर रहे. उनका 20 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | UGC Act 2026: UGC नियम से Hindu एकता खतरे में? नियमों पर भ्रम या आरोपों में दम?
Topics mentioned in this article