हरिवंश राय बच्चन की वो कविता, जिसने अमिताभ बच्चन की फिल्म को बनाया कल्ट क्लासिक, आज भी गूंजते हैं डायलॉग

अमिताभ बच्चन की एक आइकॉनिक फिल्म के पीछे उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की एक मशहूर कविता का बड़ा हाथ था. फिल्म का नाम, उसकी शुरुआत और पूरी कहानी उसी कविता से प्रेरित थी. यही वजह है कि आज भी दोनों का जिक्र साथ-साथ होता है.

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जब पिता की कविता बनी बेटे की फिल्म की पहचान
नई दिल्ली:

अमिताभ बच्चन के करियर में कई शानदार फिल्में आईं, लेकिन उनमें से एक ऐसी भी है, जो आज कल्ट क्लासिक मानी जाती है. इस फिल्म के डायलॉग, किरदार और कहानी ने इसे हमेशा के लिए खास बना दिया. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके पीछे छिपी एक कविता थी. खास बात ये है कि ये कविता किसी और ने नहीं, बल्कि अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन ने लिखी थी. फिल्म बनाने वालों ने सिर्फ उसका नाम नहीं लिया, बल्कि उसकी सोच को भी पूरी कहानी का हिस्सा बना दिया. यही वजह है कि आज भी जब इस फिल्म की बात होती है, तो उस कविता का जिक्र अपने आप होने लगता है.

पहले आई कविता, फिर उसी नाम पर बनी फिल्म

जिस कविता की बात हो रही है, उसका नाम 'अग्निपथ' है. हरिवंश राय बच्चन ने ये कविता इंसान को हर मुश्किल में आगे बढ़ने का हौसला देने के लिए लिखी थी. इसकी सबसे मशहूर पंक्तियां आज भी लोगों को याद हैं.

'वृक्ष हों भले खड़े,

हों घने, हों बड़े,

एक पत्र छाँह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत.

अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.'

IMDb के मुताबिक, फिल्म के डायरेक्टर मुकुल एस. आनंद ने इसी कविता से इंस्पायर्ड होकर फिल्म का नाम 'अग्निपथ' रखा. फिल्म की शुरुआत भी हरिवंश राय बच्चन की आवाज में सुनाई देने वाली इसी कविता से होती है. यहीं से दर्शकों को साफ समझ आ जाता है कि आगे की कहानी एक ऐसे इंसान की है, जो मुश्किल रास्ता चुनने वाला है.

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कविता की सोच पर बनी पूरी कहानी

फिल्म में अमिताभ बच्चन ने विजय दीनानाथ चौहान का किरदार निभाया था. बचपन में पिता को खोने के बाद विजय की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है. वो हर कदम पर दर्द, धोखा और मुश्किलों का सामना करता है. लेकिन वो कभी हार नहीं मानता. यही बात हरिवंश राय बच्चन की कविता भी कहती है. इसलिए फिल्म देखते समय कई जगह ऐसा लगता है, जैसे कविता ही पर्दे पर जिंदा हो गई हो.

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रिलीज के वक्त नहीं मिली थी बड़ी कामयाबी

साल 1990 में रिलीज हुई 'अग्निपथ' को शुरुआत में वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिला, जैसी उम्मीद थी. अमिताभ बच्चन की बदली हुई आवाज को लेकर भी काफी बातें हुईं. लेकिन समय के साथ लोगों ने फिल्म को दोबारा देखा और इसकी कहानी, दमदार डायलॉग और अभिनय की खूब तारीफ की. बाद में अमिताभ बच्चन को इसी फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और 'अग्निपथ' हिंदी सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शामिल हो गई.

आज भी लोगों के दिल में जिंदा है 'अग्निपथ'

हरिवंश राय बच्चन की 'अग्निपथ' आज भी सबसे ज्यादा पढ़ी और सुनाई जाने वाली कविताओं में गिनी जाती है. वहीं अमिताभ बच्चन की इसी नाम की फिल्म नई पीढ़ी भी उतने ही शौक से देखती है. एक कविता से शुरू हुआ ये सफर आज हिंदी साहित्य और हिंदी सिनेमा, दोनों की सबसे यादगार कहानियों में शामिल हो चुका है.

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