मेरे पास मां है’ से ‘कभी खुशी कभी गम’ तक, बॉलीवुड की इन ऑनस्क्रीन मांओं ने कभी हंसाया तो कभी रुलाया

Happy Mothers Day : कई अभिनेत्रियों ने बड़े पर्दे पर मां के रोल को बेहद खूबसूरती से निभाया.  आइए, उन 7 अभिनेत्रियों पर एक नजर डालते हैं जो हिंदी सिनेमा की बेहतरीन ऑन-स्क्रीन मांएं हैं.

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Happy Mothers Day : बॉलीवुड की इन ऑनस्क्रीन मांओं ने कभी हंसाया तो कभी रुलाया
नई दिल्ली:

Happy Mothers Day  : मदर्स डे मई के दूसरे रविवार को पूरी दुनिया में मनाया जाता है. मदर्स डे मांओं का दिन है. इस दिन उन्हें बेहद खास महसूस कराने के लिए है.  हिंदी सिनेमा ने भी मातृत्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया है. कई अभिनेत्रियों ने बड़े पर्दे पर मां के रोल को बेहद खूबसूरती से निभाया.  आइए, उन 7 अभिनेत्रियों पर एक नजर डालते हैं जो हिंदी सिनेमा की बेहतरीन ऑन-स्क्रीन मांएं हैं.

मदर इंडिया में नरगिस
मदर इंडिया में राधा के रोल में नरगिस ने यादगार रोल किया. उन्होंने एक गांव की मजबूत महिला का किरदार निभाया, जिनके दो बेटे हैं.  वह गरीबी, सामाजिक दबाव और निजी नुकसान से जूझ रही है. नरगिस ने इस किरदार को पूरी तरह से जिया और अपने रोल से सबको प्रभावित किया. राधा साहस और गरिमा की प्रतीक हैं.

कभी खुशी कभी गम (K3G) में जया बच्चन 
2001 की ब्लॉकबस्टर फिल्म में जया ने नंदिनी रायचंद का लीड रोल किया है जो अमिताभ बच्चन (यशोवर्धन रायचंद) की पत्नी और शाहरुख खान (राहुल) व ऋतिक रोशन (रोहन) की मां हैं. उनका रोल एक पारंपरिक, स्नेही और शांत पत्नी व मां का है, जो अपने परिवार को टूटने से बचाने के लिए भावनाओं को दबाकर रखती है, लेकिन राहुल के जाने के बाद वह भीतर से टूट जाती है. जया बच्चन के इस रोल को बेहद खूबसूरती से निभाया है. 

'बागबान' में हेमा मालिनी 
फिल्म में उन्होंने पूजा मल्होत्रा ​​का किरदार निभाया, जो राज मल्होत्रा ​​(अमिताभ बच्चन) की पत्नी थीं. यह फिल्म एक 'कल्ट क्लासिक' मानी जाती है, जो माता-पिता को उनके बच्चों द्वारा छोड़ दिए जाने की भावनात्मक कहानी बयां करती है. इस फिल्म में उन्होंने एक परिपक्व और दमदार भूमिका निभाई है. 
 सलाम वेंकी में काजोल
सलाम वेंकी में सुजाता के रूप में काजोल की जमकर तारीफ हुई. उन्होंने दिल को छू लेने वाला अभिनय किया. उन्होंने पर्दे पर सुजाता के किरदार को पूरी तरह से जीवंत कर दिया. एक ऐसी मां जो अपने बेटे के लिए समय और परिस्थितियों से लड़ रही है, जबकि उनका बेटा इच्छा-मृत्यु चाहता है.

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 मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में  रानी मुखर्जी
रानी मुखर्जी ने मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में देबिका के रोल के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता. देबिका के रोल में उन्हें बेहद पसंद किया गया. वह अपने बच्चों की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है. इस फिल्म में रानी का अभिनय जबरदस्त है.

मॉम में श्रीदेवी
मॉम में देवकी के रोल में श्रीदेवी का अभिनय देखने लायक था. उन्होंने एक ऐसी मां को रोल किया  जो अपनी बेटी के लिए न्याय पाने के लिए उन लोगों से बदला लेती है जिन्होंने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. उनकी असमय मृत्यु से पहले यह उनकी आखिरी फिल्म थी.

'बधाई हो' में नीना गुप्ता
'बधाई हो' में नीना गुप्ता का रोल प्रियंवदा फिल्म में मजबूत और हाजिरजवाब है. उन्होंने अपने किरदार में अपनापन, सच्चाई और मजबूती लाई है. वह एक अधेड़ उम्र की मां का किरदार निभाती हैं जो गर्भवती हो जाती है और अपनी इस अचानक हुई प्रेग्नेंसी के लिए समाज के ताने झेलती है.

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'मासूम' में शबाना आज़मी
'मासूम' में इंदु के रोल में शबाना आजमी की परफॉर्मेंस हमेशा यादगार रहेगी. फिल्म में वह अपने बच्चों को बचाने की कोशिश करते हुए धोखे का सामना कर रही है. शबाना ने दर्द और भावनाओं को बहुत ही खूबसूरती और संयम के साथ निभाया.

'वास्तव' में रीमा लागू
रीमा लागू ने कई फिल्मों में मां का रोल निभाया है, लेकिन, 'वास्तव' में शांता के रूप में उनका किरदार हमेशा खास रहेगा.  शांता अपने बेटे रघु से बहुत प्यार करती है, लेकिन वह उसके जुर्म और हिंसा की दुनिया में काम करने से बिल्कुल भी खुश नहीं है. क्लाइमेक्स में उसका आखिरी कदम सबको चौंका देता है.
 

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