आ गई नए दौर की 'गांधारी', आंखों पर पट्टी भी बांधेगी और जमाने से लड़ेगी भी, दांव पर इस बार भी होगी तो ममता

तापसी पन्नू की गांधारी से जुड़े एक सूत्र ने बताया है कि तापसी पन्नू पहले कभी ना देखे गए अंदाज में अपनी सीमाओं को लांघने के लिए तैयार हैं. फिल्म में आंखों पर पट्टी बांधकर एक्शन करना उनके किरदार के लिए एक नई चुनौती होगी.

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फिर आ रही है गांधारी, खतरनाक एक्शन कर देगा लाजवाब
नई दिल्ली:

तापसी पन्नू ने फीमेल-लेड सिनेमा में खास जगह बनाई है. 'पिंक', 'थप्पड़', 'नाम शबाना' से 'हसीन दिलरुबा' तक, उन्होंने लगातार ऐसी कहानियों को बखूबी निभाया है जहां महिलाएं फिल्म की कमान संभालती हैं. अब खबर है कि आने वाली थ्रिलर फिल्म 'गांधारी' में वो अब तक का सबसे बड़ा जोखिम उठाने जा रही हैं, जिसमें वो आंखों पर पट्टी बांधकर जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस करती नजर आएंगी. वैसे भी तापसी पन्नू को उनके हटकर किए जाने वाले किरदारों के लिए पहचाना जाता है.

आंख पर पट्टी बांधकर एक्शन

तापसी पन्नू की गांधारी से जुड़े एक सूत्र ने बताया है कि तापसी पन्नू पहले कभी ना देखे गए अंदाज में अपनी सीमाओं को लांघने के लिए तैयार हैं. फिल्म में आंखों पर पट्टी बांधकर एक्शन करना उनके किरदार के लिए एक नई चुनौती होगी. यह सिर्फ स्टंट की बात नहीं है, बल्कि एक्शन को लेकर एक नई सोच है. इन फाइट सीन्स में वो अपनी आंखों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी और उन्हें पूरी तरह से अपनी कॉमनसेंस, मसल मेमोरी और अंदरूनी ताकत पर निर्भर रहना होगा, जो उनकी इस कमजोरी को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना देगा.

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तापसी पन्नू की फिल्म है गांधारी

बच्चे की खातिर मां की जंग

'गांधारी' में तापसी के एक्शन का एक नया हुनर देखने को मिल सकता है, जो सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं बल्कि उनकी इमोशनल और मेंटल गहराई को भी दिखाएगा. यह फिल्म तापसी की अब तक की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में से एक बन सकती है. कनिका ढिल्लों लिखी गई और देवाशीष मखीजा निर्देशित यह फिल्म इसी साल रिलीज होने वाली है, जो एक ऐसी मां की कहानी है जो हार नहीं मानती और अपने किडनैप हुए बच्चे को बचाने की हर मुमकिन कोशिश करती है.

लुधियाना की लड़की साउथ में छाई

तापसी पन्नू का जन्म 1 अगस्त 1987 को लुधियाना में हुआ. तापसी ने मॉडलिंग से करियर की शुरुआत की और 2010 में तेलुगु फिल्म ‘झुम्मंडी नादम' से डेब्यू किया. 2011 में तमिल फिल्म ‘आदुकलम' से उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई. बॉलीवुड में 2013 की ‘चश्मे बद्दूर' से एंट्री के बाद ‘बेबी' (2015) और ‘पिंक' (2016) ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. ‘मुल्क', ‘बदला', ‘सांड की आंख', ‘थप्पड़' और ‘रश्मि रॉकेट' जैसी फिल्मों में उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर मजबूत अभिनय किया. 

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हर रोल होता है हटकर

‘थप्पड़' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला, जबकि ‘सांड की आंख' के लिए क्रिटिक्स अवॉर्ड से नवाजा गया. ‘डंकी' (2023) और ‘फिर आई हसीन दिलरुबा' (2024) जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी रेंज दिखाई. 2026 में अनुभव सिन्हा के साथ उनकी तीसरी फिल्म ‘अस्सी' रिलीज हुई, जिसमें वे एक बलात्कार मामले की वकील रावी के रोल में नजर आईं. तापसी अब ‘वो लड़की है कहां?' और ‘गांधारी' जैसी फिल्मों में काम कर रही हैं.

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