प्रेमानंद महाराज की वजह से इस एक्ट्रेस ने छोड़ी एक्टिंग, कभी एकता कपूर के सीरियल की थी टॉप हीरोइन, अब कृष्ण भक्ति में हुईं लीन

एक मशहूर टीवी एक्ट्रेस ने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कहकर कृष्ण भक्ति का रास्ता अपना लिया है. अब वो वृंदावन में सादगी भरी जिंदगी जी रही हैं और भक्ति में सच्ची शांति तलाश रही हैं.

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टीवी की दुनिया छोड़ भक्ति में डूबी एकता कपूर की हीरोइन

टीवी की चमक-दमक, नाम और पहचान पाने के बाद अचानक सब कुछ छोड़ देना आसान नहीं होता, लेकिन कभी-कभी जिंदगी ऐसा मोड़ लेती है जहां इंसान ग्लैमर से दूर सुकून तलाशने लगता है. एकता कपूर के शो से पहचान बनाने वाली एक एक्ट्रेस की कहानी इन दिनों चर्चा में है, जिन्होंने एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहकर भक्ति का रास्ता चुन लिया. उन्होंने सिर्फ करियर ही नहीं छोड़ा, बल्कि अपनी पूरी लाइफस्टाइल बदल दी और अब सादगी भरी जिंदगी जी रही हैं, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है.

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ग्लैमर छोड़ चुनी भक्ति की राह

ये कहानी है टीवी एक्ट्रेस अन्ना जयसिंघानी की, जिन्होंने अचानक एक्टिंग करियर छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपना लिया. अन्ना अब वृंदावन में रहती हैं और अपना पूरा समय कृष्ण भक्ति में बिताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें असली सुकून और शांति भक्ति में मिली, जो उन्हें शोबिज की दुनिया में कभी नहीं मिल पाई. उन्होंने चकाचौंध की बजाय सादगी और आस्था को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया.

कैसे शुरू हुआ सफर

अन्ना का बचपन से ही डांस और क्रिएटिव चीजों में मन लगता था. वो अपने सपनों को पूरा करने मुंबई आईं और साल 2011 में फ्रीलांस कोरियोग्राफर के रूप में काम शुरू किया. बाद में उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और कई टीवी शोज में नजर आईं. एकता कपूर के प्रोडक्शन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में काम करके उन्हें पहचान मिली और उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा.

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दोस्तों के साथ मंदिर जाने से बदली सोच

मुंबई में रहते हुए अन्ना कुछ दोस्तों के साथ इस्कॉन मंदिर जाने लगीं. धीरे-धीरे उनका झुकाव भक्ति की ओर बढ़ता गया. उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में भी बदलाव किया, जैसे लहसुन-प्याज, शराब और मांसाहार से दूरी बना ली. ये बदलाव धीरे-धीरे उनकी सोच और जीवन को पूरी तरह बदलने लगा और वो कृष्ण भक्ति में और गहराई से जुड़ गईं.

सपने में आए प्रेमानंद जी महाराज

अन्ना ने बताया कि एक दिन उन्हें सपना आया जिसमें प्रेमानंद जी महाराज ने उन्हें नाम जप करने की सलाह दी. इस अनुभव ने उन पर गहरा असर डाला. इसके बाद उन्होंने वृंदावन जाने का फैसला किया और वहीं रहकर आध्यात्मिक जीवन अपनाया. अब वो मानती हैं कि सांसारिक जीवन अस्थायी है और असली खुशी भक्ति में ही है.

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परिवार का मिला पूरा साथ

अन्ना के इस फैसले में उनके परिवार ने भी उनका साथ दिया. उन्होंने शोबिज छोड़कर जो रास्ता चुना, उसमें परिवार ने उन्हें समझा और सपोर्ट किया. अब वो पूरी तरह भक्ति में लीन होकर सादगी से भरा जीवन जी रही हैं और दूसरों को भी आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित कर रही हैं.

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