निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने गजलों को दिया नया रूप, म्यूजिक वीडियोज के साथ रिलीज हुईं डॉ. चंद्रभाल सुकुमार की रचनाएं

प्रख्यात गजलकार डॉ. चंद्रभाल सुकुमार की गजलें अब सिर्फ साहित्य जगत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सीधे बॉलीवुड के चमकते पर्दे तक पहुंच गई हैं.

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निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने दिया गजलों को फिल्मी तड़का
नई दिल्ली:

प्रख्यात गजलकार और सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. चंद्रभाल सुकुमार की गजलें अब सिर्फ साहित्य जगत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सीधे बॉलीवुड के चमकते पर्दे तक पहुंच गई हैं. दुष्यंत कारपोरेशन के बैनर तले उनकी तीन लोकप्रिय गजलों को भव्य फिल्मी अंदाज में म्यूजिकल वीडियो के रूप में पेश किया गया है. इन वीडियोज का निर्देशन, संगीत और विजन बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने संभाला, जिन्होंने गजलों की गहराई को सिनेमाई भव्यता के साथ जोड़ते हुए इन्हें बिल्कुल नए रूप में दर्शकों के सामने पेश किया है. इस प्रोजेक्ट का निर्माण प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर रितु सिंह ने किया है, जबकि कोरियोग्राफी की जिम्मेदारी बॉलीवुड कोरियोग्राफर एंडी भकुनी ने निभाई. कैमरे पर हर फ्रेम को खूबसूरती से कैद करने का श्रेय कैमरामैन योगेश सिंह को जाता है.

रिलीज हुई तीनों गजलें- “अब कहानी की तरह हो जिंदगी”, “आदमी को छल रही सच्चाइयां” और “चल रही उल्टी हवाएं क्या करें”, अपनी गहराई और भावुकता के साथ पहले ही पाठकों के दिलों में जगह बना चुकी हैं, लेकिन अब ये गजलें फिल्मी ट्रीटमेंट के कारण और भी प्रभावशाली हो उठी हैं. इन म्यूजिकल वीडियोज में अभिनेत्री खुशबू पोद्दार और राखी दाधीच ने अपनी संवेदनशील अदाकारी से गजलों में नया जीवन भर दिया है.

डॉ. सुकुमार हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित स्तंभ हैं. उन्हें ‘साहित्य रत्न', ‘विद्या-वाचस्पति', ‘भारत गौरव' और ‘साहित्य शिरोमणि' जैसी कई शीर्ष उपाधियों से नवाजा जा चुका है. उनकी लेखनी गजल की परंपरा को न सिर्फ आगे बढ़ाती है, बल्कि उसे आधुनिक समय से भी जोड़ती है. दूसरी ओर, निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह बॉलीवुड में ‘द हंड्रेड बक्स', ‘त्राहिमाम' और ‘ज़िंदगी शतरंज है' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. साथ ही वे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड फंक्शन्स और अपनी चर्चित पुस्तक ‘सात्यकि: द्वापर का अजेय योद्धा' के लिए भी सुर्खियों में रहे हैं. 

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