दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को लेकर विवाद थम नहीं रहा है. पहले तो एक साल तक फिल्म सेंसर बोर्ड के साथ कानूनी लड़ाई में उलझी रही. फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं मिला लंबे इंतजार के बाद फिल्म ओटीटी प्लैटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हुई. 3 जुलाई को ओटीटी पर आते ही ये फिल्म चर्चा में छा गई और फिर कुछ ऐसा हुआ कि रिलीज कि तीन बाद ही इसे ओटीटी प्लैटफॉर्म से हटा लिया गया. ZEE5 ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर जानकारी दी कि फिल्म को अगले नोटिस तक ओटीटी प्लैटफॉर्म से हटाया जा जा रहा है. फिल्म से ओटीटी से तो हट गई लेकिन जैसा कि दिलजीत दोसांझ ने खुद कहा इसे डाउनलोड किया जा चुका है लोग इसकी स्क्रीनिंग भी कर रहे हैं.
दिलजीत ने शेयर किया सतलुज की सक्रीनिंग का वीडियो
दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक गुरुद्वारे में फिल्म की स्क्रीनिंग हो रही है. प्रोजेक्टर पर फिल्म चल रही है और आसपास अच्छी खासी भीड़ जमा है. लोग साथ मिलकर फिल्म देख रहे हैं. ये वीडियो शेयर करते हुए दिलजीत ने लिखा, हुण नी रुकणी फिल्म (अब ये फिल्म नहीं रुकेगी), खालरा साब दी आवाज नू कोई नी दबा सकदा (खालरा साहब की आवाज को कोई नहीं दबा सकता).
कहां का है वायरल वीडियो ?
यह वीडियो देखकर आप लोकेशन के बारे में सोच रहे हैं तो बता दें कि यह स्क्रीनिंग राजस्थान के अनूपगढ़ जिले के गांव 6 एच पतरोड़ा में हो रही थी. स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और फिल्म देखने के बाद उन्होंने फिल्म पर बैन हटाने की मांग की.
गांववालों ने की फिल्म की तारीफ
फिल्म देखने के बाद गांववालों ने बताया कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1990 के दशक में कथित रूप से लापता लोगों के मामलों को उजागर करने के उनके संघर्ष को दिखाती है. फिल्म दिखाने का मकसद युवाओं को न्याय, सच और मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करना था. सभी ने फिल्मी की तारीफ की.
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फिल्म देखने के बाद सभी ने कहा कि ऐसी फिल्में नई पीढ़ी को इतिहास, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवाधिकारों के महत्व को समझने का मौका देती हैं. उनका कहना था कि किसी भी फिल्म पर बैन लगाने के बजाय लोगों को उसे देखने और अपनी राय बनाने की आजादी मिलनी चाहिए.