'सिर्फ पैसों के लिए फिल्म नहीं करनी चाहिए' दिलजीत दोसांझ पर FWICE प्रेजिडेंट का तंज, सतलुज पर नहीं थमा विवाद

दिलजीत दोसांझ की सतलुज 3 जुलाई को ओटीटी प्लैटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हुई थी. इसके तीसरे दिन ही इसे वहां से हटा लिया गया. फिल्म पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब FWICE प्रेजिडेंट ने इस पर बात की.

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सतलुज पर क्या बोले FWICE के प्रेजिडेंट
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नई दिल्ली:

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) के प्रेजिडेंट बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पर सवाल उठाए हैं. समाचार एजेंसी आईएएनएस से ​​खास बातचीत में उन्होंने कहा कि एक्टर्स को सिर्फ पैसे कमाने के लिए फिल्में नहीं करनी चाहिए और रोल चुनते समय अपनी बड़ी जिम्मेदारी और पब्लिक इमेज का भी ध्यान रखना चाहिए. जब ​​उनसे भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से 'सतलुज' को हटाए जाने के बारे में पूछा गया, तो बीएन तिवारी ने कहा कि असल में अगर कोई चीज समाज में समस्या पैदा करती है तो ऐसे कंटेंट की सावधानी से समीक्षा की जानी चाहिए. सिनेमा का मकसद मनोरंजन करना और जानकारी देना होता है, लेकिन अगर सरकार बार-बार दखल देती है या सेंसर बोर्ड को कोई दिक्कत लगती है, तो इसका मतलब है कि उसमें कुछ ऐसी चीजें थीं जो आम जनता के देखने के लिए सही नहीं थीं.

उन्होंने कहा कि भले ही फिल्म सेंसरशिप से पास हो गई हो, लेकिन अगर बाद में भारत सरकार को लगता है कि इससे गलत जानकारी फैल सकती है, सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है या नुकसान पहुंचाने वाले लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं तो ऐसी फिल्मों को पहले ही रोक दिया जाना चाहिए. मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे कट और सेंसरशिप की प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी फिल्म पर दोबारा विचार क्यों किया जा रहा है.

सेंसर बोर्ड को सभी चिंताओं पर शुरुआत में ही ध्यान देना चाहिए था. एक बार मंजूरी मिलने के बाद फिल्म रिलीज हो जानी चाहिए, क्योंकि इसमें प्रोड्यूसर का बहुत सारा पैसा लगा होता है. अगर सभी जरूरी कट पहले ही किए जा चुके हैं तो बाद में फिल्म को रोकने का कोई औचित्य नहीं है या तो इसे मंजूरी देकर रिलीज किया जाना चाहिए या फिर सेंसरशिप के चरण में ही इसे रिजेक्ट कर देना चाहिए.

एफडब्ल्यूआईसीई प्रेसिडेंट ने आगे कहा कि मुझे बहुत हैरानी है कि दिलजीत दोसांझ विवादित फिल्में क्यों चुनते हैं. उन्हें ऐसे फैसलों के असर को समझना चाहिए. वह पंजाब के सुपरस्टार हैं और उन्हें सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए ताकि उनकी इमेज पर कोई बुरा असर न पड़े. आज दुनियाभर में उनके बहुत सारे फैंस हैं.

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उन्होंने कहा कि मेरी समझ से एक कलाकार का यह भी फर्ज है कि वह सिर्फ पैसे या किसी और वजह से फिल्में न करे. उसे 'राष्ट्र सर्वोपरि' वाली बात ध्यान में रखनी चाहिए. मैं यह नहीं कह रहा कि देश के प्रति उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है, उसकी बहुत जिम्मेदारियां हैं और वह बहुत प्रतिभाशाली भी है. ऐसे प्रोजेक्ट्स को हाथ में लेने से पहले उसे इस बारे में जरूर सोचना चाहिए.

हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. इसे शुक्रवार को भारत में जी5 पर 'सतलुज' नाम से रिलीज किया गया. हालांकि, सभी को हैरान करते हुए रविवार को भारत में इस फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. जी5 ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बयान में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए 'सतलुज' फिल्म भारत में अगली सूचना तक उपलब्ध नहीं रहेगी. हम सही प्रक्रिया अपनाकर और हर उचित तरीका आजमाकर जल्द से जल्द इस फिल्म को अपने दर्शकों तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने दर्शकों से मिले जबरदस्त रेस्पॉन्स के लिए उनका शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि वह फिल्म और उसके क्रिएटिव विजन के साथ मजबूती से खड़े हैं.

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