चित्रांगदा सिंह: सादगी और ग्लैमर की मिसाल, बॉलीवुड में भीड़ से अलग बनाई पहचान

हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो अपनी अदाकारी से ज्यादा अपनी शख्सियत और सफर से लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ते हैं. चित्रांगदा सिंह उन्हीं में से एक नाम है.

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चित्रांगदा सिंह: सादगी और ग्लैमर की मिसाल
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो अपनी अदाकारी से ज्यादा अपनी शख्सियत और सफर से लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ते हैं. चित्रांगदा सिंह उन्हीं में से एक नाम है. उनकी अदाएं, संवाद अदायगी और सादगी उन्हें बॉलीवुड की भीड़ में अलग पहचान दिलाती है. 30 अगस्त 1976 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मीं चित्रांगदा सिंह का बचपन एक अनुशासित माहौल में बीता. उनके पिता निरंजन सिंह भारतीय सेना में अधिकारी थे और भाई दिग्विजय सिंह एक जाने-माने गोल्फ खिलाड़ी बने. बचपन से ही पढ़ाई और कला में रुचि रखने वाली चित्रांगदा ने मेरठ से पढ़ाई करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से होम साइंस में स्नातक किया. कम ही लोग जानते हैं कि वह एक प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना भी हैं.

चित्रांगदा का फिल्मी सफर अचानक शुरू नहीं हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और गुलजार के म्यूजिक वीडियो ‘सनसेट पॉइंट' ने पहली बार दर्शकों को उनकी ओर आकर्षित किया. इसके बाद वह आईसीआईसीआई बैंक, अलुक्कास ज्वेलरी और गार्नियर जैसे बड़े ब्रांड्स का चेहरा बनीं, लेकिन उन्हें असली पहचान 2003 में निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' से मिली. फिल्म में गीता राव के किरदार को चित्रांगदा ने इस कदर जिया कि आलोचकों ने उन्हें स्मिता पाटिल और शबाना आजमी की श्रेणी की अभिनेत्री करार दिया.

चित्रागंदा की शादी मशहूर गोल्फर ज्योति रंधावा से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका और 2014 में दोनों का तलाक हो गया. उनके बेटे जोरावर रंधावा की परवरिश की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली. 2008 में उन्होंने फिल्म 'सॉरी भाई' से वापसी की. इसके बाद वह लगातार बेहतरीन भूमिकाओं और चुनिंदा फिल्मों में दिखती रहीं. 'ये साली जिंदगी' (2011) और 'इंकार' (2013) जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नया मुकाम दिया. वहीं, 'देशी बॉयज' और 'आई मी और मैं' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने ग्लैमरस और रोमांटिक अंदाज से दर्शकों को आकर्षित किया.

चित्रांगदा ने अपने करियर में अभिनय करने के साथ-साथ आइटम सॉन्ग के जरिए भी पहचान बनाई. फिल्म जोकर का 'काफी जोशिला गाना' और 'गब्बर इज बैक' का 'आओ राजा' उनके करियर के हिट डांस नंबर साबित हुए. 2018 में उन्होंने एक नया मोड़ लिया और निर्माता के तौर पर फिल्म 'सूरमा' बनाई. यह फिल्म भारतीय हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की जिंदगी पर आधारित थी और आलोचकों से खूब सराहना बटोरी.

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आज चित्रांगदा सिंह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि स्टाइल आइकन और स्वतंत्र कलाकार के रूप में जानी जाती हैं. उन्होंने यह साबित किया है कि ग्लैमर और गहराई, दोनों को एक साथ जिया जा सकता है. चित्रांगदा की कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी पहचान कायम करना चाहती हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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