ट्विशा शर्मा के केस पर छलका कंगना रनौत का दर्द, बोलीं- 'अभी उसकी चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई और परिवार..'

सेलीना जेटली ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिख ट्विशा शर्मा केस पर अपनी बात रखी. उनका कहना था कि हर शादी खुशनुमा नहीं होती और दुर्व्यवहार कई तरह का होता है.

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ट्विशा शर्मा केस पर बोलीं सेलीना जेटली- इस केस ने मुझे झकझोर दिया
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलीना जेटली इन दिनों पर्सनल लाइफ में काफी उतार-चढ़ाव से गुजर रही हैं. अपने पति से तलाक और बच्चों की कस्टडी को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने ट्विशा शर्मा के दर्दनाक मामले पर चुप्पी तोड़ी है. सेलीना ने इंस्टाग्राम पर लंबा नोट लिखते हुए कहा कि ट्विशा का केस पूरे देश को झकझोर गया. एक पढ़ी-लिखी, खूबसूरत और करियर ओरिएंटेड महिला की जिंदगी बंद कमरों के पीछे दुर्व्यवहार, अकेलेपन और हिंसा में कैसे खत्म हो गया, यह देखकर उनका दिल टूट गया.

सेलीना ने लिखा, “अभी उसकी राख भी ठंडी नहीं हुई है, परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है.” उन्होंने बताया कि कई महिलाएं चोट के निशान न दिखने वाले दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं - भावनात्मक अलगाव, अकेलापन और धीरे-धीरे दुनिया से कट जाना. ये कम नहीं होता. अपनी बात रखते हुए सेलीना ने खुलकर अपनी स्थिति भी बताई. उन्होंने कहा, “मेरे केस में मेरे माता-पिता नहीं थे, मैं आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं थी और सबसे बड़ी बात - मेरे तीन छोटे बच्चे थे.” कई महिलाओं की तरह वे भी लंबे समय तक रिलेशनशिप में बनी रहीं क्योंकि बच्चों को अलग-अलग नहीं चाहती थीं.

सेलीना ने सभी माता-पिता और परिवारों से अपील की कि अगर उनकी बेटी मदद मांगे तो उसे तुरंत सहारा दें. किसी को भी अकेले दुर्व्यवहार की आग में जलने न दें. ट्विशा शर्मा का मामला हाल ही में सुर्खियों में रहा, जिसमें घरेलू हिंसा के आरोप लगे थे. उनका अंतिम संस्कार 12 दिन बाद हुआ और दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया गया. सेलीना का यह बयान उन हजारों महिलाओं की आवाज बन रहा है जो चुपचाप पीड़ा सहती हैं.

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सेलीना ने कहा, 'यही दुर्व्यवहार की भयानक सच्चाई है. कभी-कभी महिलाओं की पीड़ा और तकलीफ इतनी सामान्य हो जाती है कि उनके दर्द का उनके आसपास के लोगों के लिए कोई महत्व नहीं रह जाता. शादी हमेशा खुशनुमा नहीं होती. कभी-कभी हिंसा का ऐसा रूप होता है जिसे कोई देख नहीं पाता. चोट के निशान के अलावा भी गलत व्यवहार होता है. कभी-कभी यह अलगाव होता है. कभी-कभी यह धीरे-धीरे अपनी दुनिया से अलग हो जाना होता है. कभी-कभी यह किसी अनजान जगह पर बिना परिवार, बिना किसी सहारे के, बिना किसी ठिकाने के रहना होता है.'

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