हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन जॉनी वॉकर का नाम सुनते से ही चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जॉनी वॉकर कभी फिल्मी दुनिया का हिस्सा नहीं थे. वो एक बस कंडक्टर थे और उनकी किस्मत बदलने में एक्टर बलराज साहनी और गुरु दत्त ने बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन क्या आप जानते हैं जॉनी वॉकर उनका असली नाम नहीं है, बल्कि एक व्हिस्की के नाम पर उनका नाम पड़ा, आइए आपको बताते हैं इस किस्से के बारे में
कौन है बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी
बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी मुंबई के रेलवे में दादर डिपो में कंडक्टर थे, वो यात्रियों को टिकट देते समय तरह-तरह के किरदार निभाते थे. कभी वो हकलाते हुए टिकट देते, तो कभी बेसुरे गायक बन जाते, कभी वो शराबी बनते तो कभी कोई और एक्टिंग करते. उनका ये अंदाज यात्रियों को खूब पसंद आता था. उस समय बलराज साहनी बाजी की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे, फिल्म के सभी एक्टर लगभग तय हो चुके थे. लेकिन एक कॉमेडी एक्टर की तलाश थी, जब बलराज साहनी ने बदरू की एक्टिंग देखी, तो वो तुरंत समझ गए कि ये व्यक्ति इस फिल्म के लिए एकदम परफेक्ट है.
कैसे पड़ा बदरू का जॉनी वॉकर नाम
बलराज साहनी ने बदरू की मुलाकात फिल्म के निर्देशक गुरु दत्त से करवाई. गुरुदत्त के सामने उन्होंने एक शराबी की एक्टिंग की और उनकी एक्टिंग से वो इतना प्रभावित हो गए कि उन्हें फिल्में लेने का फैसला कर लिया. अब सवाल था कि स्क्रीन पर उनका नाम क्या होगा? बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी नाम उन्हें पसंद नहीं आया, तब गुरु दत्त ने मशहूर स्कॉच व्हिस्की के नाम पर उनका नाम जॉनी वॉकर रख दिया. इसके बाद जॉनी वॉकर ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार शराबी और कॉमेडी किरदार निभाए. उनकी एक्टिंग इतनी दमदार थी कि लोगों को लगने लगा कि व्हिस्की का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है. इस तरह से एक बस कंडक्टर हिंदी फिल्मों के सबसे फेमस कॉमेडियन बन गए.