आशा भोसले की इकलौती फिल्म, रियल भतीजी की मां का निभाया किरदार, बिना ग्लिसरीन बहाए थे खूब आंसू

आशा भोसले की सगी भतीजी ने बुआ की इकलौती फिल्म का वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने उनकी मां का किरदार निभाया था. 

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आशा भोसले की भतीजी हैं पद्मिनी कोल्हापुरे

बॉलीवुड सिंगर आशा भोसले के निधन से उनके चाहने वाले दुखी हैं. उन्होंने 12000 से ज्यादा गाने अलग-अलग भाषाओं में गाए हैं, और उनकी तूती विदेशों में भी बोलती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आशा ताई ने एक्टिंग की दुनिया में भी हाथ आजमाया था.  उन्होंने पर्दे पर इतना भावुक रोल प्ले किया था कि दर्शक रोने के लिए मजबूर हो गए थे. इसकी जिक्र आशा भोसले की भतीजी पद्मिनी कोल्हापुरे में अपनी आत्या (बुआ) के लिए इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए किया और बताया कि यह उनकी एकमात्र फिल्म है. 

पद्मिनी कोल्हापुरे हैं आशा भोसले की भतीजी

पद्मिनी कोल्हापुरे ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक वीडियो शेयर किया, जिसके साथ कैप्शन में लिखा- फिल्म "माई" में माई यानी मेरी मां का सेंसिटिव किरदार निभाना, जो कि सिल्वर स्क्रीन पर आपकी एकमात्र फिल्म थी. मेरे लिए एक ऐसा आशीर्वाद है, जिसे मैं हमेशा सहेजकर रखूंगी. मैं और कितने आशीर्वाद मांग सकती थी. आपसे इतना गहरा और खूबसूरत रिश्ता शेयर करने के लिए. आशा आत्या. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि पद्मिनी कोल्हापुरे, आशा भोसले की सगी चचेरी बहन की बेटी हैं. 

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आशा भोसले की माई की कहानी

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गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा संगीत इतिहास में सबसे अधिक बार रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता पाने वाली आशा भोसले ने मराठी फिल्म माई में एक मां का किरदार निभाया था. इस फिल्म में सिंगर ऐसी मां बनी थी जो अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित है और चीजों को याद नहीं रख पाती. फिल्म में उनका बेटा (राम कपूर) उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ने का फैसला लेते हैं, जबकि बेटी (पद्मिनी कोल्हापुरे) उनका ध्यान रखती है. फिल्म जिदंगी के ताने-बाने और बुजुर्गों के प्रति बच्चों के बदलते रवैये को पर्दे पर बखूबी दिखाती है. 

आशा ताई ने बिना ग्लिसरीन के बहाए आंसू

माई फिल्म आशा ताई के लिए बहुत खास थी, क्योंकि उनकी यह डेब्यू फिल्म थी और उन्हें फिल्म की कहानी इतनी मार्मिक लगी कि उन्होंने सिंगिंग के साथ-साथ एक्टिंग करने का भी फैसला कर लिया. उन्होंने साल 2013 में दिए इंटरव्यू में बताया था कि माई के किरदार ने उन्हें भावुक कर दिया था और यह किरदार उनके जीवन की वास्तविकता के भी काफी करीब है. खास बात यह थी आशा जी ने फिल्म के किसी भी इमोशनल सीन के लिए रोने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल नहीं किया था. उनकी आंखों में खुद-ब-खुद आंसू आ जाते थे. उन्होंने कहा था, मैं किरदार में खुद को इतना झोंक देती थी कि भावनाएं खुद-ब-खुद आ जाती थीं. फिल्म माई से पहले सिंगर की बेटी ने साल 2012 में आत्महत्या की थी, इस दर्द से वह निकल भी नहीं पाई थीं कि 2015 में उनके बेटे का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया था. 

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