आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने उनके आखिरी पलों को किया याद, बोले,- 'यह दुनिया छोड़ने का बेहद शांतिपूर्ण तरीका था'

Asha Bhosle Grandson Chintu Bhosle : आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने ने कहा कि उनके अंग काम करना बंद कर रहे थे और उनकी मृत्यु का कारण बढ़ती उम्र से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुआ. "यह दुनिया छोड़ने का एक बहुत ही शांतिपूर्ण तरीका था."

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Asha Bhosle Grandson Chintu Bhosle : आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने उनके आखिरी पलों को किया याद
नई दिल्ली:

Asha Bhosle Grandson Chintu Bhosle :  मशहूर प्लेबैक सिंगर आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने अपने पीछे एक ऐसी बेमिसाल संगीत विरासत छोड़ी है, जिसने भारतीय सिनेमा और संगीत की कई पीढ़ियों को आकार दिया है. उनके परिवार ने बताया कि अपनी बहुमुखी प्रतिभा और सदाबहार आवाज के लिए मशहूर आशा भोसले अपने आखिरी दिनों तक एक्टिव थीं और जोश से भरी रहीं. NDTV के साथ बातचीत में, उनके पोते चिंटू भोसले, जो खुद एक सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर हैं. उन्होंने अपनी दादी के आखिरी पलों के बारे में कुछ निजी बातें साझा कीं. उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनके निधन से कुछ दिन पहले तक उनकी सेहत बिल्कुल ठीक थी और वह काफी खुशमिजाज थीं, जिसकी वजह से उनका अचानक यूं चले जाना और भी ज्यादा चौंकाने वाला था.

चिंटू ने कहा, "आई (Aai) बिल्कुल ठीक थीं. उनकी सेहत बहुत अच्छी थी." उन्होंने 'आई' शब्द का इस्तेमाल किया, जो मराठी में मां के लिए इस्तेमाल होता है और जिसे आशा भोसले भी पसंद करती थीं. उन्होंने आगे बताया कि उनके निधन से ठीक एक सुबह पहले ही उन्होंने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की थी. परिवार ने फौरन चिंता जताते हुए उनसे तुरंत मेडिकल मदद लेने का आग्रह किया. "हमने उनसे कहा, 'चलिए, अभी फौरन अस्पताल चलते हैं,' लेकिन उन्होंने कहा, 'नहीं, मुझे थोड़ा आराम करने दो. मैं ठीक हो जाऊंगी.'" उसी दोपहर, आशा भोसले सोने चली गईं, लेकिन फिर कभी नहीं उठीं.

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चिंटू के मुताबिक, जब परिवार ने उन्हें देखा, तो उनकी सांसें तो चल रही थीं, लेकिन वह कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं. इसके बाद परिवार उन्हें फौरन अस्पताल ले गया. वहां उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. बाद में डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि उनके अंग काम करना बंद कर रहे थे और उनकी मृत्यु का कारण बढ़ती उम्र से जुड़ी जटिलताओं को बताया. "यह दुनिया छोड़ने का एक बहुत ही शांतिपूर्ण तरीका था." चिंटू ने बताया, "वह सोते-सोते ही चली गईं."

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एक दिल को छू लेने वाली बात बताते हुए उन्होंने बताया कि उनकी मृत्यु से ठीक दो दिन पहले, एक मराठी नाटक देखने के लिए वह  बाहर गई थीं. यह कला के प्रति उनके अटूट प्रेम और नब्बे की उम्र में भी उनकी एक्टिव जीवनशैली को दर्शाता है. आशा भोसले के निधन के साथ ही भारतीय संगीत के एक युग का अंत हो गया. सात दशकों से भी ज्यादा लंबे अपने करियर में उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, गजल से लेकर पॉप तक, अलग-अलग भाषाओं और शैलियों के हजारों गानों को अपनी आवाज दी. इंडस्ट्री के कुछ सबसे बड़े संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ उनका काम आज भी यादगार बना हुआ है. 

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जैसे-जैसे दुनिया भर से उन्हें श्रद्धांजलि मिल रही है, उनके फैंस उनकी असाधारण प्रतिभा को याद कर रहे हैं. बल्कि ज़िंदगी के प्रति उनके उत्साह को भी याद कर रहे हैं.  एक ऐसा जज्बा जो आखिरी सांस तक कम नहीं हुआ. 
 

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