दीपिका पादुकोण की इस फिल्म को देखने के बाद अरुणा ईरानी ने बंद कर दिया मूवी देखना, बोलीं- वो दिमाग में बैठती नहीं हैं

अरुणा ईरानी ने बताया कि दीपिका पादुकोण की कॉकटेल देखने के बाद उन्होंने फिल्में देखना बंद कर दिया है. 

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
अरुणा ईरानी ने दीपिका पादुकोण की कॉकटेल के बाद नहीं देखी कोई फिल्म
नई दिल्ली:

फ़िल्मों के री-रिलीज़ का दौर इन दिनों जोरों पर है. हाल ही में ‘लैला मजनू', ‘तुम्बाड' और ‘सनम तेरी क़सम' जैसी फिल्मों ने दोबारा सिनेमाघरों में दस्तक देकर कामयाबी हासिल की. अब इसी कड़ी में 24 साल बाद 13 फरवरी को ‘ये दिल आशिकाना' भी बड़े पर्दे पर लौटी है. करण नाथ, जीविधा शर्मा, अरुणा ईरानी और जॉनी लीवर अभिनीत इस फिल्म का निर्देशन ‘फूल और कांटे' जैसी सुपरहिट फिल्म देने वाले कुक्कू कोहली ने किया था. री-रिलीज के मौके पर एनडीटीवी से खास बातचीत में कुक्कू कोहली और अरुणा ईरानी ने बदलते बॉलीवुड समीकरण, स्थापित सितारों के साथ काम करने की चुनौतियों और आज की फ़िल्मों से गायब होते तत्वों पर खुलकर बात की. 

सवाल - लव स्टोरीज स्थापित एक्टर्स के साथ कम क्यों बनती हैं ?

अरुणा ईरानी ने कुक्कू कोहली की तरफ इशारा करते हुए कहा, आप कभी भी नए लड़का-लड़की के साथ मूवी बनाते हैं, क्योंकि रोमांटिक फ़िल्म अगर आपको बनानी है तो नए लड़का-लड़की के साथ बनाइए. इट्स नॉट बिकॉज कि हमको स्टार के साथ नहीं करना है, बट पिक्चर चलनी है. क्योंकि नए लड़के-लड़की की कोई इमेज नहीं होती. उनसे कुछ एक्सपेक्ट नहीं करते कि भाई ये ऐसा करेगा, ऐसा करेगा. वो बेचारा थोड़ा-सा भी अच्छा करेगा तो आपको अच्छा लगेगा, दिल को छू जाएगा. हालांकि वही जमाना वापस आ गया है. बीच में वो जमाना चला गया था. हम लोग वही देख रहे हैं. अभी आ रहा है, आहिस्ता-आहिस्ता आएगा. म्यूजिक भी आएगा वापस और कॉन्सेप्ट भी आएंगे वापस, वही डेप्थ वाले.  अरुणा ईरानी: अब देखो ना, अभी यहां पर यशराज से बनी थी ना एक रोमांटिक फ़िल्म, तो सुपरहिट हुई ना, सर. 

सवाल: आख़िरी चीज आपसे पूछना चाहता हूं कि इतने सालों से आपने सिनेमा में काम किया है, बचपन से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट से लेकर अब तक, तो आपको फिल्मों में ऐसी कौन-सी चीज़ लगती है जो अच्छे के लिए बदली है? 

अरुणा ईरानी कहती हैं, अच्छे के लिए बदली है? अच्छे के लिए — लाइक अभी वैनिटी वैन आ गई. क्योंकि हम लोग जब आउटडोर करते थे, पहले एक ड्रेसमैन चादर पकड़कर खड़ा होता था, उस तरफ हेयरड्रेसर खड़ी होती थी और हम लोग रास्ते पर ड्रेस चेंज कर रहे होते थे. तो हमें बहुत तकलीफ होती थी, ऐज एन एक्टर कहां जाएं? किसके घर में घुसें? ज़रा प्लीज़ ड्रेस चेंज करने देंगे? कभी कोई देता था, कभी नहीं देता था. तो वो फैसिलिटी बहुत अच्छी हो गई है, भैया. पर वो चीज़ों से हमारी फ़िल्म हिट नहीं होती ना. हमारे सब्जेक्ट्स अच्छे नहीं बनते. वो बनना चाहिए. कहानी होनी चाहिए. थोड़ा म्यूज़िक होना चाहिए. थोड़ा रोमांस, थोड़ा इमोशंस, थोड़ा फाइट फॉर पीपल. 

सवाल: आप लोगों ने देखी थी ‘सैयारा'?

अरुणा ईरानी: नहीं देखी, पर सुना अच्छी थी. 

सवाल: कौन-सी लास्ट फिल्म देखी जो बहुत अच्छी लगी?

अरुणा ईरानी: बहुत टाइम हुआ, फिल्म नहीं देखी. 

सवाल: सिनेमा हॉल में नहीं?

नहीं. 

सवाल: ओटीटी पर देखते हैं आप?

नहीं. कुक्कू कोहली कहते हैं, मैं देखता हूं. इस पर अरुणा ईरानी कहती हैं, ये ओटीटी पर कुछ-कुछ देखते हैं. ये तो थिएटर में भी जाकर देखते हैं. मैं कहीं नहीं जाती. 

सवाल: आप क्यों नहीं जाते?

अरुणा ईरानी कहती हैं, मन नहीं. जैसे एक बार मैंने एक फिल्म ‘कॉकटेल' देखी थी, तो कुछ समझ में नहीं आई. तो मुझे लगता है कि अब जो फिल्में बनती हैं, वो दिमाग में बैठती नहीं हैं, तो कौन जाए? जाने दो. 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Syed Suhail | क्या Rahul Gandhi की फिर जाएगी Lok Sabha सदस्यता? | Parliament | Substantive Motion
Topics mentioned in this article