अर्चना पूरन सिंह के बेटे ने पाकिस्तान को फुटबॉल में अकेले चटाई थी धूल, लेकिन दो फ्रैक्चर ने मिटा दिया खिलाड़ी बनने का ख्वाब

टीवी और फिल्म अभिनेत्री अर्चना पुरन सिंह के बेटे आर्यमन सेठी ने हाल ही में अपने पुराने फुटबॉल करियर के बारे में खुलकर बात की है.

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अर्चना पुरान सिंह के बेटे ने पाकिस्तान को फुटबॉल में अकेले चटाई थी धूल

टीवी और फिल्म अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमन सेठी ने हाल ही में अपने पूराने फुटबॉल करियर के बारे में खुलकर बात की है. एक व्लॉग में उन्होंने बताया कि उन्होंने भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच में चार गोल किए थे. लेकिन दो गंभीर चोटों ने उनके प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. आर्यमन ने बताया कि बचपन में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्हें सेलिब्रिटी परिवार का बच्चा होने के कारण 'रिच किड' समझा जाता था. बड़े बच्चों के साथ खेलते समय उन्हें बुलिंग का शिकार होना पड़ता था. वे छोटे कद के थे, इसलिए दूसरे उन्हें परेशान करते थे. लेकिन उम्र के बच्चों के साथ खेलते समय खुद भी आक्रामक हो जाते थे. अब उन्हें उस व्यवहार पर पछतावा है.

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फुटबॉल के लिए कड़ी मेहनत की

आर्यमन ने कहा कि घर में माता-पिता के बीच तनाव के समय वे बहुत संवेदनशील थे. उन्होंने महसूस किया कि वे हमेशा दुनिया से लड़ रहे हैं. बाद में इंग्लैंड जाने पर भी उन्हें रेसिज्म और बुलिंग का सामना करना पड़ा. लेकिन उनके पिता परमीत सेठी ने उन्हें फुटबॉल के लिए कड़ी मेहनत कराई. आर्यमन ने बताया, "पापा ने मुझे मशीन बना दिया. सिर्फ चार महीने में मैं महाराष्ट्र के अंडर-13 में दूसरा सबसे तेज खिलाड़ी बन गया." उन्होंने महाराष्ट्र के लिए खेला और फिर भारतीय टीम में जगह बनाई.

टूटा आर्यमन का सपना

एक यादगार मैच में ईरान में भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले में आर्यमन ने चार गोल दागे. अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि कोच ने उन्हें फोन करके इस उपलब्धि पर बधाई दी थी. यह उनके लिए गर्व का पल था. सपने को पूरा करने के लिए अर्चना ने आर्यमन को क्वींस पार्क रेंजर्स क्लब का ट्रायल दिलवाया. इसके लिए उन्हें लंदन में स्कूल बदलना पड़ा. लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया. इंग्लैंड में आर्यमन का पैर टूट गया. भारत लौटकर रिहैबिलिटेशन के बाद जब वे महाराष्ट्र बनाम गुजरात के प्रैक्टिस मैच में उतरे, तो मैच शुरू होते ही पहले 20 सेकंड में फिर से पैर टूट गया. डॉक्टरों को रॉड लगानी पड़ी. एक साल की मेहनत बर्बाद हो गई. चोट के बाद डॉक्टरों ने कहा कि वे पहले जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे.

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डिप्रेशन और एंग्जायटी का सामना

इससे आर्यमन को बहुत झटका लगा. उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी का सामना किया. लेकिन थेरेपी और परिवार के सपोर्ट से उन्होंने इस हार को स्वीकार किया और आगे बढ़े. अब वे व्लॉगिंग और क्रिएटिव कामों में व्यस्त हैं. अर्चना पूरान सिंह ने कहा कि आर्यमन खुद को माफ नहीं कर पाते और पूरानी बातों पर बहुत सोचते रहते हैं. उनकी संवेदनशीलता हर जगह दिखती है. परिवार अब इस अनुभव को सकारात्मक तरीके से देखता है.

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