बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के करियर में कई यादगार फिल्में शामिल हैं, लेकिन 6 जून, साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘आखिरी रास्ता' की बात ही कुछ अलग है. यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी, बल्कि इसकी कहानी, कलाकारों के अभिनय और मेकिंग से जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी आज तक चर्चा में रहते हैं. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डबल रोल निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया था, जबकि श्रीदेवी और जया प्रदा भी अहम भूमिकाओं में नजर आई थीं. हालांकि इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा राज भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. पर्दे पर दिखीं श्रीदेवी की आवाज वास्तव में उनकी अपनी नहीं थी.
श्रीदेवी के किरदार की डबिंग किसी और ने की थी
7.1 आईएमडीबी रेटिंग वाली ‘आखिरी रास्ता' से जुड़ा सबसे दिलचस्प फैक्ट यही है कि फिल्म में श्रीदेवी के किरदार के लिए डबिंग उन्होंने खुद नहीं की थी. उस दौर में हिंदी भाषा पर उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं थी, इसलिए फिल्म निर्माताओं ने उनके संवादों के लिए एक दूसरी अभिनेत्री की आवाज का सहारा लिया.
फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों को इस बात का अंदाजा भी नहीं हुआ कि पर्दे पर सुनाई देने वाली आवाज श्रीदेवी की नहीं है. यही वजह है कि यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित डबिंग रहस्यों में गिना जाता है. फिल्म में श्रीदेवी की स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय इतना प्रभावशाली था कि दर्शकों का पूरा ध्यान उनके किरदार पर ही बना रहा.
दमदार कहानी ने जीता था दर्शकों का दिल
फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति डेविड के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक ऐसे अपराध के लिए 24 साल जेल में बिताने पड़ते हैं जो उसने किया ही नहीं था. जेल से बाहर आने के बाद उसे पता चलता है कि जिन लोगों ने उसे फंसाया था, वे अब समाज के सम्मानित नागरिक बन चुके हैं. डेविड बदला लेने की ठान लेता है और उन लोगों को सजा देना चाहता है.
लेकिन कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब उसे पता चलता है कि उसका बेटा, जिसे वह अपराधी बनते देखना चाहता था, अब एक ईमानदार पुलिस अधिकारी बन चुका है. इसके बाद पिता और बेटे के बीच कर्तव्य और बदले की लड़ाई शुरू होती है.
अमिताभ बच्चन भी करते थे खास तैयारी
फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी के. भाग्यराज के पास थी. दिलचस्प बात यह थी कि मूल कहानी दक्षिण भारतीय सिनेमा से आई थी और निर्देशक हिंदी भाषा में पूरी तरह सहज नहीं थे. IMDb के मुताबिक, शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन रोज सुबह स्क्रिप्ट पर चर्चा करते थे. वह निर्देशक से डायलॉग्स और सीन के इमोशंस समझाने के लिए कहते थे ताकि हिंदी डायलॉग में वही असर बना रहे जो असली कहानी में था.
निर्देशक कई बार कलाकारों के सामने खुद अभिनय करके सीन समझाते थे. इससे कलाकारों को किरदार की भावनाओं और सीन की गंभीरता को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती थी. अमिताभ की यह मेहनत फिल्म में उनके शानदार अभिनय में साफ दिखाई देती है.
बजट से कई गुना ज्यादा हुई कमाई
‘आखिरी रास्ता' लगभग 2.5 करोड़ रुपये के बजट में बनाई गई थी, जो उस समय बड़ी रकम मानी जाती थी. लेकिन फिल्म ने रिलीज के बाद शानदार प्रदर्शन किया. भारत में फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 4.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि दुनियाभर में इसने लगभग 8.5 करोड़ रुपये की कमाई की. इस तरह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई.
अनुपम खेर को किया था विलेन रोल ऑफर
फिल्म से जुड़ा एक और इंटरेस्टिंग फैक्ट यह है कि मुख्य विलेन के रोल के लिए पहले अनुपम खेर से संपर्क किया गया था. हालांकि उन्होंने यह भूमिका करने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में दूसरे किरदार की अहमियत ज्यादा है. बाद में यह रोल सदाशिव अमरापुरकर को मिला और उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी.
रिलीज के चार दशक बाद भी ‘आखिरी रास्ता' को अमिताभ बच्चन की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. शानदार कहानी, दमदार अभिनय और पर्दे के पीछे के दिलचस्प किस्से इस फिल्म को आज भी खास बनाते हैं.