बुजुर्ग ने गाया मोहम्मद रफी का 57 साल पुराना 'साथिया नहीं जाना' गाना, 80 की उम्र में लिया ऐसा आलाप सोचना भी मुश्किल, लोग बोले- ये है असली टैलेंट

80 साल के बुजुर्ग का ‘साथिया नहीं जाना’ गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के इस 57 साल पुराने गीत को बुजुर्ग ने जिस अंदाज और सुर के साथ गाया, उसकी लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
80 साल के बुजुर्ग ने गाया मोहम्मद रफी का गाना

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बुजुर्ग का वीडियो लोगों का दिल जीत रहा है. वीडियो में करीब 80 साल के बुजुर्ग बेहद आत्मविश्वास के साथ मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के मशहूर गीत ‘साथिया नहीं जाना' को गाते नजर आ रहे हैं. उनकी आवाज में उम्र का असर जरूर है, लेकिन सुर और अंदाज में गजब का आत्मविश्वास सुनाई देता है. खासकर गाने के दौरान उनका आलाप सुनकर लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. वीडियो में बुजुर्ग कुर्सी पर बैठे हुए यह पुराना गीत गाते दिखाई देते हैं. वह जिस सहजता से गाने की पंक्तियां और आलाप लेते हैं, उसे देखकर लगता है कि संगीत से उनका रिश्ता काफी पुराना है.

उम्र भले ही 80 के पार हो, लेकिन गाने के प्रति उनका उत्साह कम नहीं हुआ है. इस वीडियो की सबसे खास बात बुजुर्ग का आलाप है. गाने के मुश्किल हिस्से को उन्होंने जिस अंदाज में गाया, वह सुनने वालों को काफी पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स उनके इस हुनर की तारीफ करते हुए वीडियो पर प्यार बरसा रहे हैं.

ये Video भी देखें: Haiwaan Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी का कमाल या निराशा?

लोग बोले- ‘ये है असली टैलेंट'

वीडियो के कमेंट सेक्शन में लोग बुजुर्ग की आवाज और उनके हुनर की तारीफ कर रहे हैं. किसी ने उन्हें ‘चाचा' कहकर प्यार जताया, तो किसी ने उनके लिए तालियां और हाथ जोड़ने वाली इमोजी शेयर की. एक यूजर ने लिखा, ‘Help him Please', वहीं कई लोगों ने उनकी गायकी को शानदार बताया.

Advertisement

57 साल पुराना है ये खूबसूरत गीत

जिस गाने ने बुजुर्ग की आवाज में फिर लोगों का ध्यान खींचा है, वह फिल्म ‘आया सावन झूम के' का गीत है. फिल्म 1969 में रिलीज हुई थी और ‘साथिया नहीं जाना' को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी. इस गाने का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे. रफी और लता की आवाज में यह गीत आज भी पुराने हिंदी फिल्म संगीत के चाहने वालों के बीच लोकप्रिय है. 

Advertisement

धर्मेंद्र और आशा पारेख थे फिल्म के सितारे

‘आया सावन झूम के' में धर्मेंद्र और आशा पारेख मुख्य भूमिका में थे. फिल्म में रविंद्र कपूर, राजेंद्र नाथ, निरूपा रॉय, बिंदु, अरुणा ईरानी और जलाल आगा जैसे कलाकार भी नजर आए थे. फिल्म का निर्देशन रघुनाथ झालानी ने किया था. फिल्म के संगीत में ‘साथिया नहीं जाना' के अलावा ‘आया सावन झूम के', ‘ये शमा तो जली रोशनी के लिए', ‘मांझी चल ओ मांझी चल' और ‘बुरा मत सुनो बुरा मत देखो' जैसे गाने शामिल थे. इन गीतों में रफी, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे दिग्गज गायकों की आवाज सुनाई दी. 

पुराने गानों का जादू आज भी कायम

इस बुजुर्ग का वीडियो एक बार फिर दिखाता है कि अच्छे गाने कभी पुराने नहीं होते. 57 साल पहले रिलीज हुआ ‘साथिया नहीं जाना' आज भी किसी की आवाज में सुनाई दे तो लोगों का ध्यान खींच लेता है. सोशल मीडिया पर इस बुजुर्ग की गायकी को मिल रही तारीफ बताती है कि असली हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता.

यह भी पढ़ें: अमिताभ और जया का 53 साल पुराना वो गाना, हर कपल की लिस्ट में जरूर होता है शामिल, लता-रफी की आवाज ने बना दिया पति-पत्नी के रिश्ते की पहचान
 

Advertisement
Topics mentioned in this article
Mohammed Rafi
Dharmendra
Entertainment
Singing Video