69 साल पहले जिस कहानी को सबने किया रिजेक्ट, वो फिल्म रही सुपर-डुपर हिट, 14 लाख में बनी और कमाए 3.75 करोड़

फिल्म मेकर को चेतावनी देने वालों ने यहां तक कह दिया था कि ये फिल्म मत बनाना लुट जाओगे लेकिन उन्हें अपने फैसले पर पूरा यकीन था. वे आगे बढ़े और इतिहास रचकर दिखा दिया.

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BR Chopra के भरोसे पर बनी थी नया दौर, रही सुपर-डुपर हिट
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा के यादगार फिल्म निर्माताओं की बात करें तो वह लिस्ट बीआर चोपड़ा के बिना अधूरी होगी. चोपड़ा साहब ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं, लेकिन उनकी 1957 में रिलीज फिल्म 'नया दौर' से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी चर्चा में रहता है. यह वही फिल्म है, जिसकी कहानी शुरुआत में कई बड़े फिल्मकारों को पसंद नहीं आई थी, जिनमें मशहूर निर्देशक महबूब खान भी शामिल थे.

बीआर चोपड़ा का इंडस्ट्री में योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने नई दिशा देने के साथ ही गंभीर विषयों पर आधारित कहानियों से दर्शकों तक पहुंचाया. साल 1998 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के अवार्ड, से सम्मानित किया गया. कहा जाता है कि वह एक ऐसे फिल्मकार थे जो अपने आप में एक संस्था, एक स्कूल और सिनेमा थे. फिल्म निर्माता बलदेव राज चोपड़ा, यानी बीआर चोपड़ा, की 22 अप्रैल को जयंती है.

Photo Credit: BR chopra

बीआर चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 'नया दौर' की कहानी उन्हें उनके दोस्त और लेखक एफ.ए. मिर्जा ने सुनाई थी. यह कहानी इंसान और मशीनों के बीच संघर्ष पर आधारित थी, जिसमें एक तांगा चलाने वाले की जिंदगी को केंद्र में रखा गया था. उस दौर में यह विषय काफी अलग और जोखिम भरा माना जाता था.

किसी को पसंद नहीं आई थी नया दौर की कहानी

दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी को पहले कई नामी फिल्ममेकर्स को सुनाया गया, लेकिन सभी ने इसे खारिज कर दिया. किसी ने इसे ‘डॉक्यूमेंट्री' जैसा बताया, तो किसी ने ‘बकवास' कहकर नकार दिया. यहां तक कि महबूब खान ने भी इस कहानी को पसंद नहीं किया और इसे ‘तांगे वाले की कहानी' कहकर नजरअंदाज कर दिया.

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इसके बावजूद बीआर चोपड़ा को इस कहानी में दम नजर आया. उन्होंने तय किया कि वह इस पर फिल्म जरूर बनाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म को असली रूप देने के लिए इसे गांवों और खुली जगहों पर शूट किया जाना चाहिए, ताकि कहानी की सच्चाई और प्रभाव दर्शकों तक पहुंचे.

फिल्म को लेकर एक दिन महबूब खान खुद बीआर चोपड़ा के घर पहुंचे. उन्होंने चोपड़ा से कहा कि वह इस फिल्म को न बनाएं, क्योंकि इससे उनका नुकसान हो सकता है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि “तुम इस फिल्म से खत्म हो जाओगे.” लेकिन चोपड़ा अपने फैसले पर अडिग रहे और उन्होंने फिल्म रिलीज करने का निर्णय लिया.

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लाखों खर्च और करोड़ों में कमाई

फिल्म रिलीज होने के बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया. 'नया दौर' बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट साबित हुई और सिनेमाघरों में लंबे समय तक चली. फिल्म ने दर्शकों का दिल जीत लिया और अपनी कहानी व संदेश के कारण खास पहचान बनाई. विकिपीडिया पर मौजूद जानकारी के मुताबिक उस वक्त 14 लाख रुपये में बनी इस फिल्म ने 3.75 करोड़ की कलेक्शन की थी. फिल्म की सफलता के बाद जब इसकी सिल्वर जुबली मनाई जा रही थी, तब महबूब खान ने बीआर चोपड़ा को फोन कर कहा, 'मुख्य अतिथि के तौर पर किसे बुला रहे हो?' फिर कहा, 'मैं ही मुख्य अतिथि के रूप में आ जाता हूं.' इस मौके पर उन्होंने खुले मंच से स्वीकार किया कि उन्हें यह कहानी पसंद नहीं थी, लेकिन बीआर चोपड़ा की हिम्मत और विश्वास की जीत हुई.

महबूब खान ने कहा कि यह फिल्म उनकी उम्मीदों के विपरीत बेहद सफल रही और इसका श्रेय चोपड़ा के साहस और दृढ़ निश्चय को जाता है. उन्होंने माना कि एक फिल्मकार के लिए अपने फैसले पर भरोसा रखना कितना जरूरी होता है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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