66 साल पुराना गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है. फिल्म ‘मुगल-ए-आजम' के इस गाने में दो आवाजें आमने-सामने आती हैं. एक तरफ लता मंगेशकर की मीठी आवाज है, तो दूसरी तरफ शमशाद बेगम का दमदार अंदाज. दोनों के बीच सुरों की यह टक्कर किसी लड़ाई जैसी नहीं, बल्कि दो किरदारों के आत्मविश्वास की कहानी है. गाने में इश्क को शाही ताकत के सामने खड़ा किया गया है. यही वजह है कि यह गीत आज भी सुनने वालों को अपनी ओर खींचता है.
मधुबाला और निगार सुल्ताना की यादगार अदाकारी
‘तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे' साल 1960 में आई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम' का गाना है. फिल्म में मधुबाला ने अनारकली और दिलीप कुमार ने सलीम का किरदार निभाया था. पृथ्वीराज कपूर ने अकबर की भूमिका निभाई थी. गाने में निगार सुल्ताना ने बहार का किरदार निभाया, जो अनारकली के सामने अपनी बात रखती है. गाने की खासियत यह है कि इसमें दोनों किरदार अपने-अपने प्यार और आत्मसम्मान को लेकर खड़े नजर आते हैं. एक तरफ शाही दरबार का दबाव है, तो दूसरी तरफ अपने प्यार पर भरोसा. मधुबाला की अदाकारी और निगार सुल्ताना का आत्मविश्वास इस गीत को और प्रभावशाली बना देते हैं.
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लता और शमशाद की आवाजों का अनोखा मुकाबला
इस गाने का संगीत नौशाद ने दिया था और बोल शकील बदायूंनी ने लिखे थे. लता मंगेशकर और शमशाद बेगम की आवाजों का मेल इसे खास बनाता है. दोनों गायिकाओं की आवाज का अंदाज अलग था, लेकिन इसी अंतर ने गाने को एक अलग पहचान दी.
गाने में सवाल-जवाब जैसा अंदाज है. एक आवाज दूसरी को चुनौती देती है और दूसरी आवाज उसी आत्मविश्वास से जवाब देती है. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ एक प्रेम गीत नहीं रह जाता, बल्कि दो किरदारों के बीच की बातचीत बन जाता है. संगीत और बोल मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जिसमें इश्क और शाही ताकत के बीच का फर्क साफ दिखाई देता है.
फिल्म की बड़ी सफलता और गाने की अमर पहचान
‘मुगल-ए-आजम' का निर्देशन के. आसिफ ने किया था. यह फिल्म अपने भव्य सेट, शानदार कपड़ों और बड़े पैमाने पर फिल्माए गए दृश्यों के लिए भी याद की जाती है. फिल्म की कहानी सलीम और अनारकली के प्रेम पर आधारित थी, जिसमें अकबर की शाही सत्ता उनके रिश्ते के सामने बड़ी चुनौती बनकर आती है. फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया और यह अपने समय की बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हुई.
आज भी ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे' सुनते ही मधुबाला और निगार सुल्ताना का आमना-सामना याद आ जाता है. लता और शमशाद की आवाजों ने इस गीत को ऐसा जीवन दिया, जो 66 साल बाद भी कम नहीं हुआ.