62 साल पुराना वो सॉन्ग जिसके एक्टर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, लिरिक्स राइटर, म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर थे आभास कुमार गांगुली

आभास कुमार गांगुली बॉलीवुड के मशहूर सिंगर रहे. 1962 में उनकी एक फिल्म आई जिसका एक गाना बड़ा मशहूर हुआ. वो फिल्म के राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर थे. लेकिन इस गाने में वो इसके लिरिक्स राइटर, म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर भी थे. जानते हैं कौन सा है ये सॉन्ग.

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मल्टीटैलेंटेड थे आभास कुमार गांगुली
IMDb
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने हैं, जो सिर्फ अपनी धुन या बोलों के साथ साथ उनसे जुड़ी दिलचस्प कहानियों के कारण भी याद किए जाते हैं. ऐसा ही एक सदाबहार गीत है, ‘आ चल के तुझे मैं लेके चलूं…'. ये गाना सुनते ही एक सुकून भरी दुनिया आंखों के सामने उतर आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गाने से जुड़ा एक ऐसा अनोखा रिकॉर्ड भी है. जिसे आज तक बहुत कम कलाकार छू पाए हैं? खास बात ये है कि इस गीत से जुड़े लगभग हर बड़े काम को सिर्फ एक ही शख्स ने संभाला था. और वो थे हिंदी सिनेमा के सुप्रीमली टैलेंटेड आर्टिस्ट किशोर कुमार. यही वजह है कि ये गाना आज भी फिल्म इंडस्ट्री में एक मिसाल माना जाता है.

62 साल पुरानी फिल्म

दूर गगन की छांव में साल 1964 में रिलीज हुई थीा. फिल्म के राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर किशोर कुमार ही थे. उनके साथ सुप्रिया देवी और अमित कुमार भी लीड रोल में नजर आए. ये 1958 की अमेरिकी फिल्म द प्राउड रेबल पर आधारित थी. फिल्म को वैसे तो बहुत तारीफ मिली, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म असफल रही. हालांकि इसके तमिल, तेलुगू और मलयालम रीमेक भी बने.

एक गाने में किशोर कुमार का पूरा जादू

‘आ चल के तुझे मैं लेके चलूं…' फिल्म दूर गगन की छांव में का बेहद पॉपुलर गीत है. इस फिल्म की सबसे खास बात ये रही कि इसके प्रोड्यूसर भी किशोर कुमार थे, डायरेक्टर भी वही थे और फिल्म के लीड एक्टर के तौर पर भी उन्होंने ही स्क्रीन संभाली. इतना ही नहीं इस मशहूर गीत के लिरिक्स भी उन्होंने खुद लिखे. संगीत भी खुद तैयार किया और अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज में इसे गाया भी. गाने को पर्दे पर भी उन्हीं पर फिल्माया गया. यानी एक ही आर्टिस्ट ने इस गीत के हर पहलू को अपने हुनर से सजाया. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यूनिक क्रिएटिव रिकॉर्ड्स में गिना जाता है.

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साथ में दिखे बेटे अमित कुमार

इस गाने की एक खासियत और है. गाने में किशोर कुमार के साथ जो बच्चा नजर आ रहा है. वो खुद उनके बेटे अमित कुमार हैं. अमित कुमार ने इस गाने में अपना टैलेंट भरपूर दिखाया है. दोनों के इस गीत की खासियत ये है कि ये आज भी हर पीढ़ी का फेवरेट सॉन्ग है. जो आशाओं से भरपूर है. शायद इसलिए जैन जी भी इस गाने को उतना ही पसंद करती है. जितना कि किशोर दा के जमाने की पीढ़ी करती रही है.

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