हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जिन्हें सुनने के लिए ना तो रोमांटिक एंगल की जरूरत होती है और ना ही किसी दर्दभरी कहानी की. ये गाने अपनी शरारत, मजेदार बोल और अनोखे अंदाज से सीधे दिल में जगह बना लेते हैं. ऐसा ही एक दिलचस्प गाना है जिसके जरिये हसरत जयपुरी ने भैंस और डंडा शब्द से इतिहास रच दिया. हम बात कर रहे हैं 'मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' गाने की. साल 1970 में आई फिल्म 'पगला कहीं का' का यह गीत अपनी ग्रामीण रंगत और कॉमेडी अंदाज की वजह से आज भी हिंदी फिल्मी गीतों में अपनी जगह बनाए हुए है. इस गाने को मशहूर सिंगर मन्ना डे ने गाया था.
हिंदी फिल्मों में जहां एक तरफ प्यार, जुदाई और जिंदगी के फलसफे पर आधारित गीत खूब लोकप्रिय हुए, वहीं कुछ गानों ने आम जिंदगी की छोटी-छोटी बातों को मनोरंजन का हिस्सा बनाया. 'मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' इसी परंपरा की दिलचस्प मिसाल है
हसरत जयपुरी और शंकर-जयकिशन की जोड़ी का कमाल, मन्ना डे की आवाज
मन्ना डे हिंदी फिल्म संगीत के उन दिग्गज गायकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की समझ के साथ हर तरह के गीतों को अपनी आवाज दी. उनकी गायकी में जहां 'लागा चुनरी में दाग' जैसे गीतों में शास्त्रीय संगीत का शानदार रंग मिलता है, वहीं हास्य और मस्ती से भरे गीतों में भी उनकी आवाज का अलग अंदाज सुनाई देता है. 'मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' से तो उन्होंने सारी परिपाटियों को ही तोड़ डाला.
'मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' फिल्म 'पगला कहीं का' का गाना है, जो 1970 में रिलीज हुई थी. ये वह दौर था जब हिंदी फिल्मों के संगीत में रोमांटिक गीतों के साथ कॉमेडी और हल्के-फुल्के गीतों की भी खास जगह थी. ऐसे गाने कहानी के बीच मनोरंजन का माहौल बनाते थे और दर्शकों को हंसने का मौका देते थे. इस गीत के बोल लिखे थे हसरत जयपुरी ने और इसका संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की मशहूर जोड़ी ने. अब जरा इसके बोल पर एक नजर दौड़ाएं...
मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा
वो लड्डू पेड़े खाती है
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है
ये मच्छर बीन बजाते हैं
वो अपना राग सुनाती है
वो ठुमक ठुमक नाचे
जब मैं दिल का बजाऊं
मैं दिल का बजाऊं….इकतारा
फिल्म में शम्मी कपूर, आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा और हेलेन जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म का सबसे चर्चित गीत 'तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे' रहा, लेकिन 'मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' अपने जैसे गीत भी इसके संगीत की विविधता को दिखाते हैं. ‘मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा' गीत की खूबी यही है कि यह किसी भारी संदेश का बोझ नहीं उठाता. इसका मकसद मनोरंजन करना है और श्रोताओं को कुछ पल के लिए रोजमर्रा की चिंताओं से दूर ले जाना है.