55 साल पुराना विरह का गाना, राजस्थान की मिट्टी से निकला, कैफी आजमी के शब्दों में आशा भोसले ने भरा था दर्द

55 साल पहले सिमी ग्रेवाल के लीड रोल वाली फिल्म 'दो बूंद पानी' में एक ऐसा गाना आया था जिसका आज तक कोई तोड़ नहीं है. कैफी आजमी के लिखे बोलों पर आशा भोसले ने अपनी आवाज से ऐसे भाव भरे कि ये गाना सुनने वालों के दिल में उतर गया.

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आशा भोसले की आवाज में विरह का ऐसा गीत जो आंख नम कर दे
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नई दिल्ली:

प्यार का एक पक्ष जुदाई भी है और इस पर हिंदी सिनेमा में कई कालजयी गाने बने हैं. एक गाना तो ऐसा है जो कि जुदाई शब्द सुनते ही दिमाग में आ जाता है. ये गाना जैकी श्रॉफ और मीनाक्षी शेषाद्री की फिल्म हीरो का 'चार दिनों दा प्यार ओ रब्बा' है. लेकिन आज हम इस गाने की बात नहीं बल्कि विरह यानी जुदाई के अलग गाने की बात कर रहे हैं. राजस्थानी रंग में रंगे इस गीत में प्रेमिका के ऐसे भाव हैं जो कलेजा चीर देते हैं. इस बेहद मार्मिक विरह गीत में नायिका हवा (पवनिया) से विनती करती है कि वह उसके पिया के देश चली जाए और उसका संदेश पहुंचा दे.

नायिका कहती उसके तन-मन, नजरें और गागरिया सब प्यासे हैं. आसमान प्यासा है, धरती प्यासी है और पूरी नगरिया प्यासी है. यह प्यास तभी बुझेगी जब उसका सांवरिया घर लौटेगा. गीत में साथी के विरह और राजस्थान के सूखे की पीड़ा को बहुत खूबसूरती से मिलाया गया है जो कि भावनात्मक तड़प का प्रतीक बन जाता है. यह आशा भोसले की आवाज में एक गहरी, शांत और दिल छू लेने वाली वेदना है. 'जा रे पवनिया पिया के देस जा' जैसे गहरे शब्दों के साथ आया ये गाना 1971 में आई फिल्म 'दो बूंद पानी' में आया था. ये एक सोशल ड्रामा फिल्म है जिसे ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा, डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था. 

दो बूंद पानी की कहानी

फिल्म की कहानी कहानी राजस्थान के एक सूखाग्रस्त गांव की है जहां कई सालों से बारिश नहीं हुई है. गंगा सिंह (जलाल आगा) अपनी पत्नी गौरी (सिमी गरेवाल), पिता हरी सिंह (सज्जन) और बहन सोनकी (मधु चंदा) के साथ रहता है. पानी की कमी से तंग आकर गंगा सिंह बांध बनाने के काम पर चला जाता है, ताकि गांव में पानी आ सके. उसके जाने के बाद परिवार पर कई मुसीबतें आती हैं. आखिर में गंगा सिंह बाँध पर एक हादसे को रोकते हुए अपनी जान गंवा देता है. बाद में बांध बन जाता है और सूखी जमीन हरी-भरी हो जाती है. गौरी अपने बेटे को लेकर उसी गाँव में रहती है. यह फिल्म राष्ट्रीय एकता, बलिदान और पानी के महत्व पर आधारित थी. इसे राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला था.

'जा रे पवनिया पिया के देस जा' को किसने बनाया यादगार

इस खूबसूरत गीत के बारे में बात करें तो इसके बोल कैफी आजमी ने लिखे थे. म्यूजिक से सजाया था जयदेव ने और इसे आशा भोसले ने अपनी आवाज से सदा के अमर कर दिया. यह फिल्म में भी इस भावुक मोड़ पर आता है कि आंख नम कर जाता है. ऊपर से विरह का भाव इसे और दर्दभरा बनाता है.

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