बॉलीवुड के पुराने दौर में एक ऐसा नाम था, जो जैसे ही स्क्रीन पर आता था तो दर्शक सीट से नजर नहीं हटा पाते थे. उनका डांस, उनका स्टाइल और उनका कॉन्फिडेंस हर किसी को दीवाना बना देता था. उस समय फिल्मों में कैबरे नया था और इसे देखने के लिए दर्शकों में अलग ही उत्साह होता था. इसी दौर में एक चेहरा ऐसा भी था, जिसने इस ट्रेंड को पहचान दिलाई और अपने टैलेंट से इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई. ये नाम था कुक्कू मोरे, जिन्होंने शोहरत की ऊंचाइयों को छुआ लेकिन जिंदगी के आखिरी दिनों में तंगी और दर्द झेला.
कैबरे से स्टारडम तक
1928 में एंग्लो-इंडियन परिवार में जन्मीं कुक्कू मोरे ने 1946 में फिल्म ‘अरब का सितारा' से अपने करियर की शुरुआत की. उस दौर में जब कैबरे को बोल्ड माना जाता था, तब कुक्कू ने इसे अपनी पहचान बना लिया. उनकी परफॉर्मेंस इतनी अलग और एनर्जेटिक होती थी कि फिल्ममेकर्स उन्हें खास तौर पर डांस नंबर के लिए कास्ट करते थे और वो जल्दी ही इंडस्ट्री की सबसे डिमांडिंग डांसर बन गईं.
शाही जिंदगी और चमक-दमक
अपने करियर के पीक पर कुक्कू मोरे ने बेहद लग्जरी लाइफ जी. कहा जाता है कि वो तीन-तीन लग्जरी कारों में चलती थीं और इनमें से एक खास कार उनके पालतू कुत्तों के लिए भी होती थी. उनके पास करीब 8 हजार डिजाइनर कपड़े और 5 हजार से ज्यादा फुटवियर थे, जिन्हें वो कभी रिपीट नहीं करती थीं. उनका स्टाइल उस दौर में किसी बड़े स्टार से कम नहीं था और वो जहां भी जाती थीं, लोगों की नजरें उन्हीं पर टिक जाती थीं.
गरीबी और दर्दनाक अंत
लेकिन वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाद के सालों में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें खाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा. हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ा और वो सड़कों पर निकलने को मजबूर हो गईं. आखिरकार 30 सितंबर 1981 को कैंसर से जंग हारकर उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, और उनकी कहानी एक कड़वी सच्चाई बनकर रह गई.
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