आज से 37 साल पहले, 10 मार्च 1989 को रिलीज हुई फिल्म 'हथियार' ने बॉलीवुड में अपराध और अंडरवर्ल्ड की कहानी को नया आयाम दिया था. बॉर्डर फेम डायरेक्टर जे.पी. दत्ता फिल्म के राइटर और डायरेक्टर थे. इस क्राइम ड्रामा को इसके अनोखे ट्रीटमेंट और असल जिंदगी के काफी करीब पाए जाने की वजह से जमकर तारीफें मिली थीं. हालांकि बॉक्स ऑफिस पर ये कोई बहुत बड़ा रिकॉर्ड कायम नहीं कर सकी लेकिन मेकर्स के लिए फायदे का सौदा साबित हुई. इस फिल्म में धर्मेंद्र, संजय दत्त, ऋषि कपूर, संगीता बिजलानी, परेश रावल और अमृता सिंह लीड रोल में नजर आए थे. आइए जानते हैं हथियार से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.
10 मार्च को रिलीज हुई हथियार की कहानी
फिल्म की स्टोरी संजय दत्त के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गरीबी और सामाजिक अन्याय के कारण अपराध की दुनिया में कदम रख देता है. फिल्म गरीबी और अपराध के चक्र को यथार्थवादी ढंग से दिखाती है. जे.पी. दत्ता की खासियत यथार्थवाद रही है, और 'हथियार' में उन्होंने मुंबई के अंडरवर्ल्ड को बिना किसी लाग-लपेट के दिखाया था. फिल्म के डायलॉग भी कापी पसंद किए गए थे.
हथियार का बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
'हथियार' का बजट लगभग 3.10 करोड़ रुपये था. वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर इसने 7.40 करोड़ से 8.45 करोड़ रुपये तक की कमाई की. भारत में नेट कलेक्शन करीब 5.35 करोड़ (ग्रॉस 7.43 करोड़) रहा, जबकि ओवरसीज से 1 करोड़ से अधिक की कमाई हुई. फिल्म सेमी-हिट रही. 1989 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में यह 15वें स्थान पर रही, लेकिन आलोचनात्मक सफलता के कारण इसे जे.पी. दत्ता की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है.
यहां देखें हथियार फुल मूवी
हथियार की शूटिंग पर इस्तेमाल हुई AK-47
'हथियार' की कुछ अनोखी बातें आज भी चर्चा का विषय हैं. आईएमडीबी के मुताबिक यह बॉलीवुड की पहली फिल्म थी, जिसमें असली एके-47 (AK-47) राइफलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, हालांकि गोली रबड़ की थी. इससे एक्शन सीक्वेंस बेहद यथार्थवादी लगे. शुरुआत में अनिल कपूर को लीड रोल ऑफर हुआ था, लेकिन बाद में संजय दत्त ने यह भूमिका निभाई. इसी तरह, डिंपल कपाड़िया को साइन किया गया था, लेकिन वे फिल्म से बाहर हो गईं, जिसके बाद संगीता बिजलानी को मौका मिला. ये बदलाव फिल्म की शूटिंग के दौरान हुए.
और भी बहुत कुछ...
'हथियार' की ड्युरेशन 170 मिनट है. 37 साल बाद भी फिल्म के डायलॉग और सीन दर्शकों को प्रभावित करते हैं. 'हथियार' बॉलीवुड के सुनहरे दौर की एक मिसाल है, जहां स्टोरी और एक्टिंग को प्राथमिकता दी जाती थी.