टीवी पर जब ‘रामायण' प्रसारित होती थी, तो सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था. दर्शकों को लगता था जैसे वे सचमुच त्रेता युग में पहुंच गए हों. अयोध्या का राजसी वैभव, रावण की सोने की लंका की चमक, समुद्र पर बना सेतु, गूंजते शंख और युद्ध के दमदार दृश्य. हर फ्रेम में भव्यता झलकती थी. उस दौर पर पर्दे पर हुए कमाल को देखकर रामायण के डायरेक्टर और मेकर्स की तारीफ हर तरफ हुई लेकिन क्या आप जानते हैं इस कल्पना को साकार करने वाला असल शख्स कौन था. लंबे समय तक ये भी माना जाता रहा कि इसकी शूटिंग मुंबई में हुई.लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. इस ऐतिहासिक धारावाहिक की दुनिया गुजरात के उमरगाम स्थित वृंदावन स्टूडियो में बसाई गई थी.
40 एकड़ में सजी अयोध्या
वृंदावन स्टूडियो समुद्र किनारे फैला 40 एकड़ का विशाल परिसर है. यहीं अयोध्या के दरबार से लेकर रावण की सोने सी चमकती लंका तक के सेट तैयार किए गए. महलों के भव्य दरवाजे, विशाल सिंहासन, युद्ध के रथ, शयनकक्ष, दरबार, हर डिटेल इतनी सटीक थी कि पर्दे पर सब कुछ असली लगता था.
इस कमाल के पीछे थे स्टूडियो के तत्कालीन मालिक और दिग्गज आर्ट डायरेक्टर स्वर्गीय हीराभाई पटेल. राष्ट्रपति अवॉर्ड और दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित हीराभाई ने 300 से ज्यादा धार्मिक और ऐतिहासिक फिल्मों और सीरियल्स में काम किया. ‘रामायण', ‘विक्रम बेताल' और ‘सिंहासन बत्तीसी' जैसे धारावाहिकों के सेट्स और विजुअल्स इंपेक्ट उन्हीं की देन थी. समुद्र के कई यादगार सीन भी इसी स्टूडियो में फिल्माए गए थे.
ट्रिक फोटोग्राफी का जादू
सागर वर्ल्ड नाम के इंस्टाग्राम हैंडल ने हीराभाई पटेल के बेटे विपिन भाई पटेल के हवाले से बताया कि उनके पिता ने 1942 में फिल्मी सफर शुरू किया था और 1948 में ‘हुआ सवेरा' फिल्म प्रोड्यूस की थी. मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़े हीराभाई हर भाषा की फिल्मों में आर्ट डायरेक्टर रहे. उस दौर में जब तकनीक सीमित थी. तब उनकी ट्रिक फोटोग्राफी ने ‘रामायण' में जान डाल दी. उड़ते पुष्पक विमान से लेकर दिव्य प्रभावों तक, सब कुछ उनके हुनर का नतीजा था. ‘रामायण' के बाद ‘श्री कृष्णा' भी यहीं शूट हुई, और आज भी ये स्टूडियो कई यादगार शोज बना रहा है. जिसमें ‘राधा-कृष्ण' जैसे धारावाहिकों की शूटिंग जारी है.