1990 के दशक को भारतीय टेलीविजन का सुनहरा दौर माना जाता है. उस समय मनोरंजन के साधन सीमित थे और लगभग हर घर में एक ही चैनल सबसे ज्यादा देखा जाता था- दूरदर्शन. यही वजह थी कि उस दौर के कई धारावाहिक दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बना लेते थे. लोग अपने रोजमर्रा के काम जल्दी खत्म कर टीवी के सामने बैठ जाते थे ताकि उनका पसंदीदा शो मिस न हो जाए. उस दौर में कई ऐसे कार्यक्रम आए, जिन्होंने न सिर्फ मनोरंजन किया बल्कि यादगार भी बन गए. इन्हीं में से एक लोकप्रिय धारावाहिक था जूनून, जिसने अपनी दमदार कहानी और बड़ी स्टार कास्ट के कारण दर्शकों पर खास छाप छोड़ी.
साल 1993 में शुरू हुआ यह धारावाहिक उस समय के सबसे महत्वाकांक्षी टीवी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है. निर्देशक A. Salam के निर्देशन में बने इस शो ने 1994 से लेकर 1998 तक लगातार दर्शकों का मनोरंजन किया. करीब चार साल तक चले इस सीरियल के लगभग 500 एपिसोड प्रसारित हुए, जो उस दौर में किसी भी टीवी शो के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी. उस समय टीवी पर इतने लंबे समय तक चलने वाले धारावाहिक बहुत कम हुआ करते थे, इसलिए इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई.
इस धारावाहिक की कहानी दो ताकतवर परिवारों- राजवंश और धनराज के इर्द-गिर्द घूमती थी. दोनों परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी, सत्ता की होड़ और रिश्तों में उलझे भावनात्मक संघर्ष को कहानी का मुख्य आधार बनाया गया था. पारिवारिक रिश्तों के उतार-चढ़ाव, साजिशें और टकराव ने इस शो को एक दमदार ड्रामा बना दिया. इसके साथ ही शो का टाइटल ट्रैक भी काफी लोकप्रिय हुआ, जिसे मशहूर गायक विनोद राठोड़ ने अपनी आवाज दी थी.
इस धारावाहिक की सबसे खास बात इसकी बड़ी और दमदार स्टार कास्ट थी. इसमें फरीदा जलाल, परीक्षित साहनी, सैयद जाफरी, सोनी राजदान, रजत कपूर, तनूजा और नीना गुप्ता जैसे कई अनुभवी कलाकार नजर आए. इसके अलावा भी कई चर्चित कलाकारों ने अपने अभिनय से हर एपिसोड को दिलचस्प बना दिया.
‘जुनून' सिर्फ एक टीवी शो नहीं था, बल्कि उस दौर के दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया था. इसकी मजबूत कहानी, प्रभावशाली संवाद और शानदार अभिनय ने यह साबित कर दिया कि टीवी भी बड़े पर्दे की तरह ही दमदार कहानियां पेश कर सकता है. यही वजह है कि आज भी 90 के दशक के लोकप्रिय धारावाहिकों की चर्चा होती है तो ‘जुनून' का नाम जरूर लिया जाता है.