विकास कृष्ण यादव (फाइल फोटो)
- अमेरिका के चार्ल्स एल्बर्ट शोन कोनवेल से है मुकाबला
- विकास की निगाह 2012 की गलतियों में सुधार करने पर टिकीं
- मिडिलवेट वर्ग में सातवीं वरीयता के बॉक्सर हैं विकास
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
रियो डि जेनेरो:
लंदन ओलिंपिक 2012 में विवादास्पद हालात में अमेरिकी खिलाड़ी ने विकास कृष्ण का ओलंपिक का सपना तोड़ दिया था. यह भारतीय बॉक्सर मंगलवार को यहां जब एक अन्य अमेरिकी मुक्केबाज के खिलाफ रियो ओलंपिक में भारत के मुक्केबाजी अभियान की शुरुआत करने उतरेगा तो उनकी नजरें इसका बदला चुकता करने पर होंगी.
मिडिलवेट वर्ग में सातवें वरीय विकास एकमात्र भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्हें खेलों में वरीयता मिली है. वह पहले दौर में 18 साल के चार्ल्स एल्बर्ट शोन कोनवेल का सामना करेंगे जो ओलंपिक में पदार्पण कर रहे हैं. दूसरी तरफ 24 वर्षीय भारतीय अब काफी अनुभवी हैं. लंदन में एरोल स्पेंस के खिलाफ शिकस्त के बाद विकास वेल्टरवेट की जगह मिडिलवेट में हिस्सा लेने लगे हैं. स्पेंस को लंदन में विकास के खिलाफ हारा हुआ घोषित किया गया था लेकिन तकनीकी आधार पर उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की और सफल रहे.
विकास की नजरें अब 2012 की गलतियों में सुधार करने पर टिकी होंगी. चुनौती पेश कर रहे तीन भारतीय मुक्केबाजों में विकास का ड्रॉ सबसे अनुकूल है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्वार्टर फाइनल में दूसरे वरीय बेकतेमीर मेलिकुजीव के रूप में आ सकती है. भारत को मिडिलवेट में ही अपना पहला ओलंपिक पदक 2008 में विजेंदर सिंह के जरिये मिला था.
विकास के मुकाबले के एक दिन बाद भारतीय टीम के सबसे सीनियर सदस्य मनोज कुमार (64 किग्रा) लिथुआनिया के पूर्व लाइटवेट ओलंपिक कांस्य पदक विजेता इवालडास पेत्राउकास से पहले दौर में भिड़ेंगे. गुरुवार को टीम के सबसे युवा सदस्य और विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता शिव थापा (56 किग्रा) अपने अभियान की शुरुआत क्यूबा के छठे वरीय और 2012 ओलंपिक खेलों के फ्लाइवेट वर्ग के चैम्पियन क्यूबा के रोबीसी रमीरेज के खिलाफ करेंगे.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
मिडिलवेट वर्ग में सातवें वरीय विकास एकमात्र भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्हें खेलों में वरीयता मिली है. वह पहले दौर में 18 साल के चार्ल्स एल्बर्ट शोन कोनवेल का सामना करेंगे जो ओलंपिक में पदार्पण कर रहे हैं. दूसरी तरफ 24 वर्षीय भारतीय अब काफी अनुभवी हैं. लंदन में एरोल स्पेंस के खिलाफ शिकस्त के बाद विकास वेल्टरवेट की जगह मिडिलवेट में हिस्सा लेने लगे हैं. स्पेंस को लंदन में विकास के खिलाफ हारा हुआ घोषित किया गया था लेकिन तकनीकी आधार पर उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की और सफल रहे.
विकास की नजरें अब 2012 की गलतियों में सुधार करने पर टिकी होंगी. चुनौती पेश कर रहे तीन भारतीय मुक्केबाजों में विकास का ड्रॉ सबसे अनुकूल है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्वार्टर फाइनल में दूसरे वरीय बेकतेमीर मेलिकुजीव के रूप में आ सकती है. भारत को मिडिलवेट में ही अपना पहला ओलंपिक पदक 2008 में विजेंदर सिंह के जरिये मिला था.
विकास के मुकाबले के एक दिन बाद भारतीय टीम के सबसे सीनियर सदस्य मनोज कुमार (64 किग्रा) लिथुआनिया के पूर्व लाइटवेट ओलंपिक कांस्य पदक विजेता इवालडास पेत्राउकास से पहले दौर में भिड़ेंगे. गुरुवार को टीम के सबसे युवा सदस्य और विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता शिव थापा (56 किग्रा) अपने अभियान की शुरुआत क्यूबा के छठे वरीय और 2012 ओलंपिक खेलों के फ्लाइवेट वर्ग के चैम्पियन क्यूबा के रोबीसी रमीरेज के खिलाफ करेंगे.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
रियो ओलिंपिक, रियो ओलिंपिक 2016, विकास कृष्ण, बॉक्सिंग, Rio Olympics, Rio Olympics 2016, Vikas Krishan Yadav, भारत, India