गौरिका सिंह अभी महज 13 साल की हैं (फोटो: Facebook/Gundruk Post)
रियो डि जेनेरियो:
रियो डि जेनेरियो ओलिंपिक गेम्स शुरू होने में अब 3 दिन बाकी हैं. वैसे तो इसमें कई बिरले खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, लेकिन नेपाल में पिछले साल आए भूकंप में बचने वाली गौरिका सिंह खास आकर्षण हैं. वह 5 अगस्त से शुरू होने वाले ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाली सबसे युवा एथलीट हैं. गौरिका की उम्र केवल 13 साल है.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, नेपाल में जन्मी गौरिका केवल दो साल की उम्र में ही लंदन चली गई थीं। वह पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप में बचने वाले लोगों में से एक हैं। गौरिका रविवार को ओलिंपिक खेलों में पहली बार कदम रखेंगी। वह तैराकी में 100 मीटर की 'बैकस्ट्रोक प्रीलिमिनरी' स्पर्धा में हिस्सा लेंगी।
एथलीट ने हाल ही में हर्थफोर्डशिरे में अपने स्कूल से जिला स्तर की स्थानीय चैंपियनशिप पूरी की। अप्रैल 2015 में गौरिका राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए अपनी मां गरिमा और छोटे भाई सौरीन के साथ नेपाल आई थीं और इसी दौरान देश में विनाशकारी भूकंप आ गया।
गौरिका ने कहा, "वह काफी डरावना था। हम काठमांडू में एक इमारत की पांचवी मंजिल पर थे और भूकंप के समय भाग भी नहीं सकते थे। इसलिए हम 10 मिनट के लिए कमरे के बीच रखे एक टेबल के नीचे बैठ गए।"
एथलीट ने कहा कि वह नई इमारत थी, इसलिए अन्य इमारतों की तरह वह गिरी नहीं। गौरिका ने नेपाल चैम्पियनशिप प्रतियोगिताओं में 11 वर्ष की उम्र से ही हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने सात राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़े हैं। उन्हें आशा थी कि एक दिन वह ओलिंपिक में जरूर कदम रखेंगी।
उन्होंने कहा, "मैं जाना चाहती थी, लेकिन इस बारे में आश्वस्त नहीं थी, क्योंकि मैं काफी कम उम्र की थी। जब मुझे एक माह पहले इस बारे में पता चला कि मैं ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लूंगी, तो काफी हैरान थी।"
गौरिका के पिता पारस का मानना है कि उनकी बेटी सफलता की हकदार है, क्योंकि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करती हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, नेपाल में जन्मी गौरिका केवल दो साल की उम्र में ही लंदन चली गई थीं। वह पिछले साल आए विनाशकारी भूकंप में बचने वाले लोगों में से एक हैं। गौरिका रविवार को ओलिंपिक खेलों में पहली बार कदम रखेंगी। वह तैराकी में 100 मीटर की 'बैकस्ट्रोक प्रीलिमिनरी' स्पर्धा में हिस्सा लेंगी।
एथलीट ने हाल ही में हर्थफोर्डशिरे में अपने स्कूल से जिला स्तर की स्थानीय चैंपियनशिप पूरी की। अप्रैल 2015 में गौरिका राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए अपनी मां गरिमा और छोटे भाई सौरीन के साथ नेपाल आई थीं और इसी दौरान देश में विनाशकारी भूकंप आ गया।
गौरिका ने कहा, "वह काफी डरावना था। हम काठमांडू में एक इमारत की पांचवी मंजिल पर थे और भूकंप के समय भाग भी नहीं सकते थे। इसलिए हम 10 मिनट के लिए कमरे के बीच रखे एक टेबल के नीचे बैठ गए।"
एथलीट ने कहा कि वह नई इमारत थी, इसलिए अन्य इमारतों की तरह वह गिरी नहीं। गौरिका ने नेपाल चैम्पियनशिप प्रतियोगिताओं में 11 वर्ष की उम्र से ही हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने सात राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़े हैं। उन्हें आशा थी कि एक दिन वह ओलिंपिक में जरूर कदम रखेंगी।
उन्होंने कहा, "मैं जाना चाहती थी, लेकिन इस बारे में आश्वस्त नहीं थी, क्योंकि मैं काफी कम उम्र की थी। जब मुझे एक माह पहले इस बारे में पता चला कि मैं ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लूंगी, तो काफी हैरान थी।"
गौरिका के पिता पारस का मानना है कि उनकी बेटी सफलता की हकदार है, क्योंकि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करती हैं।
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