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This Article is From Aug 05, 2016

मिशन रियो : बैडमिंटन में छाएंगी भारतीय शटल क्वीन्स साइना नेहवाल और पीवी सिंधु!

मिशन रियो : बैडमिंटन में छाएंगी भारतीय शटल क्वीन्स साइना नेहवाल और पीवी सिंधु!
साइना, सिंधु, ज्वाला और श्रीकांत पर बैडमिंटन में मेडल की उम्मीदें टिकी हैं...
नई दिल्ली: ओलिंपिक में भारत की ओर से टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग जैसे कुछ ही खेल हैं, जिनमें हमें पदक की उम्मीद है. खासतौर से बैडमिंटन में इसलिए, क्योंकि इस टीम में वर्ल्ड नंबर वन रह चुकीं साइना नेहवाल और वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली पीवी सिंधु हैं. बैडमिंटन में पुरुष टीम से ज्यादा उम्मीद नहीं है. इसमें केवल किदाम्बी श्रीकांत ही हैं, जो कुछ कमाल कर सकते हैं. वैसे संख्या की दृष्टि भारतीय बैडमिंटन दल में सात खिलाड़ी शामिल हैं. यह ओलिंपिक इतिहास में पहली बार हो रहा है. डबल्स में हमारी नजरें ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी पर रहेंगी, वहीं पुरुष डबल्स में मनु अत्री और सुमित रेड्डी हैं, लेकिन उनसे अधिक उम्मीद रखना सही नहीं होगा, क्योंकि उनका रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है. आइए जानते हैं कि साइना, सिंधु और ज्वाला-अश्विनी से पदक की आस क्यों हैं...

साइना नेहवाल  : गोल्ड में बदलेगा कांस्य!
पिछले साल बैडमिंटन में नंबर वन रह चुकीं और लंदन ओलिंपिक, 2012 की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल को ओलिंपिक में 5वीं रैंकिंग मिली है और वह ग्रुप G में हैं. उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट में खेलने और खिताब जीतने का अनुभव है. इसी साल  साइना ने ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीता है. 26 साल की हो चुकीं साइना लंबे समय तक चोट से भी परेशान रही हैं. अगर सबकुछ ठीक रहा तो वह देश के लिए पदक जीत सकती हैं. ताज़ा वर्ल्ड रैंकिंग में हैदराबादी बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल छठे से पांचवें नंबर पर पहुंच गई हैं. रियो में साइना तीसरी बार ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लेंगी.
 

कॉमनवेल्थ गेम्स 2008 और 2010 में गोल्ड जीतने वाली साइना ने ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने के बाद अपने खेल को आक्रामक बनाने का भी संकेत दिया था. जब भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने उनको इस जीत पर बधाई दी थी, तो साइना ने विराट को धन्यवाद देने के साथ-साथ उनके आक्रामक अंदाज को अपने खेल में शामिल करने की इच्‍छा जताई थी, ताकि वे अधिक से अधिक मैच जीत सकें. ऐसे में साइना ओलिंपिक में अधिक आक्रामक नजर आ सकती हैं.  

पीवी सिंधु : साबित होंगी छुपा रुस्तम
साइना के बाद बैडमिंटन में भारत की उम्मीदें पीवी सिंधु से हैं. सिंधु अपनी लंबाई से विरोधी खिलाड़ियों को मात दे सकती हैं, क्योंकि इसका फायदा उन्हें शॉट लगाने और तेजी से मैदान कवर में मिलता है. सिंधु उस समय चर्चा में आईं थीं, जब उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता था. सिंधु 2013 में मलेशिया ओपन भी जीत चुकी हैं. उन्हें ओलिंपिक में 9वीं रैंकिंग मिली है और उन्हें ग्रुप  M में रखा गया है. ओलिंपिक वह भारत के लिए वह छुपा रुस्तम साबित हो सकती हैं. सिंधु अपने प्रदर्शन से कई बार विरोधियों को चौंका देती हैं. ऐसे ही एक कारनाम उन्होंने 2012 में किया था, जब उन्होंने चाइना मास्टर्स में ओलंपिक चैंपियन ली झुइरुई को हराकर सनसनी मचा दी थी. सिंद्धू का ये पहला ओलिंपिक है. उन्होंने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद से प्रशिक्षण लिया है और उन्हीं के मार्गदर्शन में ओलिंपिक की तैयारी की है.
 
कोच गोपीचंद के साथ सिंधु...(फाइल फोटो)

सिंधु ने कॉमनवेल्थ एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीते हैं. इसके अलावा वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में लगातार दो बार कांस्य जीत चुकी हैं. उन्होंने 2016 और 2014 में उबेर कप में कांस्य, 2016 सैफ गेम्स सिंगल्स मुकाबले में रजत और टीम स्पर्धा में गोल्ड जीता था. 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स के सिंगल्स मुकाबले में ब्रांज मेडल भी जीता था.

विवादों में रहने वाली ज्वाला भी डबल्स में कम नहीं
आमतौर ज्वाला गुट्टा विवादों की वजह से चर्चा में रहती हैं, लेकिन डबल्स बैडमिंटन वह भारत की उम्मीद हैं. उनके साथ अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी होगी. दोनों को लंबे समय तक साथ खेलने का अनुभव है. उनका रिकॉर्ड बेहतर रहा है. लंदन में इस भारतीय जोड़ी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. हालांकि वर्तमान में उनकी रैंकिंग कुछ खास नहीं है. वर्ल्ड रैंकिंग में भी यह जोड़ी टॉप 20 में नहीं हैं. रियो में भी उन्हें कोई रैंकिंग नहीं मिली है. अपना दूसरा ओलंपिक खेलने जा रहीं ज्वाला और अश्विनी के लिए राह आसान नहीं होगी.  लंदन ओलंपिक, 2012 में ग्रुप स्टेज में दो मैच जीते थे, लेकिन नॉकआउट में नहीं पहुंच सकी थीं. फिर भी दोनों उलटफेर करने में माहिर हैं.
 
ज्वाला ने ओलिंपिक के लेकर अपनी टैटू वाली फोटो भी ट्वीट की थी-
 
पुरुष उम्मीद- श्रीकांत

पिछली बार ओलिंपिक में पी कश्यप ने पुरुष वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, वहीं इस बार किदाम्बी श्रीकांत को मौका मिला है. 23 साल के किदाम्बी श्रीकांत WBF की पुरुष रैंकिंग में टॉप भारतीय हैं. हालांकि उनके नाम कोई खास बड़ी उपलब्धि नहीं है, लेकिन वह सिंधु की तरह छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं. वह दो बार के ओलंपिक चैंपियन चीन के लिन डेन को भी हरा चुके हैं. उन्होंने 2016 के एशिया चैंपियनशिप के टीम इवेंट में कांस्य जीता था, जबकि 2016 के सैफ गेम्स में सिंगल्स और पुरुष टीम में गोल्ड अपने नाम किया था. रियो ओलंपिक में किदाम्बी को 9वीं रैंकिंग मिली है.
 

श्रीकांत के हौसले बुलंद हैं और वह पूरी तरह तैयार हैं. वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने से पहले क्रिकेट के मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से मुलाकात के बाद श्रीकांत ने कहा था, 'मेरे लिए यह बड़ा अवसर था. मैं बचपन से ही उनको फॉलो करता रहा हूं.  हालांकि मैं उनसे ज्यादा देर तक बात नहीं कर पाया, लेकिन तेंदुलकर ने मेरी लिए एक बड़ी बात कही थी कि मैं एक दिन वर्ल्ड नंबर वन बनूंगा.' बाद में श्रीकांत की रैंकिंग में काफी सुधार आया था.

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