रियो ओलिंपिक : दीपा कर्मकार ने कहा- फाइनल में जीत का मुझ पर कोई दबाव नहीं
- दीपा करमाकर से रियो डी जेनेरियो ने NDTV ने की खास बात
- बोलीं- फाइनल को लेकर कोई दबाव नहीं है पर वह बेस्ट देने की कोशिश करेंगी
- बोलीं- सबको पता चल गया है कि जिम्नास्ट लड़कियां भी करती है
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रियो डी जेनेरियो:
दीपा कर्मकार का आज 23वां जन्मदिन है. पहली बार भारत से महिला जिम्नास्ट ने ओलिंपिक के लिए क्वालिफ़ाई कर लिया हैरियोवॉल्ट इवेंट के फाइनल में पहुंची दीपा कर्मकार ने NDTV से बातचीत में कहा कि उन पर कोई दबाव नहीं है और वह बेस्ट देने की कोशिश करेंगी.
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह उनके ड्रीम से भी बड़ा है, तो उन्होंने जवाब में कहा कि जिस दिन फाइनल खेल लूंगी उस दिन लगेगा कि यह ड्रीम से बड़ा है. उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी ने कहा कि दीपा करमाकर का इस मुकाम पर पहुंचना इंडियन जिम्नास्टिक के लिए बड़ी बात है क्योंकि इंडिया में जिम्नास्ट के लिए कोई अधिक फसेलिटी नहीं हैं. सिर्फ 6 और 7 सेंटर हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने तीन महीने में बहुत ज्यादा फसलिटी उन्हें प्रदान कीं जिसकी वजह से वे यहां तक पहुंच सके. उन्होंने कहा कि जिम्नास्टिक अब यह पॉपुलर हो रहा है.
जब उनसे पूछा गया कि आप कहती थीं कि इंडिया में लोग जिम्नास्टिक को सर्कस समझते हैं और क्या आपको लगता है कि यह कॉन्सेप्ट टूट गया है? तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि हां लगता है...क्योंकि अब सबको पता चल गया कि जिम्नास्ट लड़कियां भी करती हैं और यह सर्कस नहीं है.
उनसे जब पूछा गया कि क्या आप पर मेडल जीतने का प्रेशर है तो उन्होंने कहा कि नहीं मुझ पर कोई प्रेशर नहीं है. इतने सालों बाद किसी का फाइनल तक पहुंचना भी एक बड़ी अचीवमेंट है. हालांकि कोशिश रहेगी कि मैं जीतूं... मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं उस दिन अच्छा करूं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह उनके ड्रीम से भी बड़ा है, तो उन्होंने जवाब में कहा कि जिस दिन फाइनल खेल लूंगी उस दिन लगेगा कि यह ड्रीम से बड़ा है. उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी ने कहा कि दीपा करमाकर का इस मुकाम पर पहुंचना इंडियन जिम्नास्टिक के लिए बड़ी बात है क्योंकि इंडिया में जिम्नास्ट के लिए कोई अधिक फसेलिटी नहीं हैं. सिर्फ 6 और 7 सेंटर हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने तीन महीने में बहुत ज्यादा फसलिटी उन्हें प्रदान कीं जिसकी वजह से वे यहां तक पहुंच सके. उन्होंने कहा कि जिम्नास्टिक अब यह पॉपुलर हो रहा है.
जब उनसे पूछा गया कि आप कहती थीं कि इंडिया में लोग जिम्नास्टिक को सर्कस समझते हैं और क्या आपको लगता है कि यह कॉन्सेप्ट टूट गया है? तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि हां लगता है...क्योंकि अब सबको पता चल गया कि जिम्नास्ट लड़कियां भी करती हैं और यह सर्कस नहीं है.
उनसे जब पूछा गया कि क्या आप पर मेडल जीतने का प्रेशर है तो उन्होंने कहा कि नहीं मुझ पर कोई प्रेशर नहीं है. इतने सालों बाद किसी का फाइनल तक पहुंचना भी एक बड़ी अचीवमेंट है. हालांकि कोशिश रहेगी कि मैं जीतूं... मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं उस दिन अच्छा करूं.
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