रियो ओलिंपिक का शुक्रवार रात को औपचारिक आगाज हो जाएगा. इसमें विश्वभर के एथलीट भाग ले रहे हैं. हम फेमस खिलाड़ियों से तो आमतौर परिचित होते हैं, लेकिन ओलिंपिक इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में चर्चा नहीं होती. जैसे ओलिंपिक की प्रतीक अलग-अलग रंगों की 5 रिंग, उसका मोटो और फ्लैग आदि जो इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी की ओर से इसके प्रचार-प्रसार के लिए अपनाए जाते हैं.
वैश्विक 5 रिंग
ओलिंपिक के बारे में जब भी कोई खबर आती है या उसे प्रदर्शित करना होता है तो इसके लिए सबसे अधिक पांच रंगों (नीले, पीले, काले, हरे, लाल) की पांच रिंगों का उपयोग किया जाता है. ये रिंग वैश्विक तौर पर ओलिंपिक खेलों का प्रतीक हैं. स्विट्जरलैंड में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शित इन रिंगों की संकल्पना बारोन पिएरे डी काउबर्टिन ने की थी, जिन्हें आधुनिक ओलिंपिक गेम्स का सह-संस्थापक माना जाता है. उन्होंने 1912 में इनकी डिजाइन तैयार की थी.
काउबर्टिन के अनुसार सफेद पृष्ठभूमि में रिंगों का रंग वास्तव में उस समय ओलिंपिक में भाग लेने वाले देशों के झंडे के रंग को आधार बनाकर तैयार किया गया था. 1914 में विश्व युद्ध के कारण ओलिंपिक कांग्रेस का आयोजन रद्द कर दिया गया था, लेकिन प्रतीक और फ्लैग को स्वीकार कर लिया गया था और इनका इस्तेमाल पहली बार 1920 में आयोजित बेल्जियम ओलिंपिक के दौरान हुआ था, जो 1936 में बर्लिन ओलिंपिक में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया.
रियो में ओलिंपिक का क्रेज चरम पर है. कुछ लोगों ने ओलिंपिक रिंग के साथ फोटो खिंचवाई (फाइल फोटो)
बाद में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी ने अपनी विचारधारा में बदलाव किया और यह कहते हुए इन रिंगों की नई व्याख्या दी कि ओलिंपिक के वैश्विक प्रतियोगिता है, जिसमें सभी महाद्वीपों के एथलीट भाग लेते हैं, इसलिए इसे 'महाद्वीपों के प्रतीक' के रूप में लिया जाना चाहिए. हालांकि किसी रंग विशेष का संबंध किसी महाद्वीप से नहीं बताया जाता, लेकिन 1951 से पहले ओलिंपिक की आधिकारिक बुकलेट में यह बताया गया था कि नीला यूरोप के, पीला रंग एशिया को, काला अफ्रीका को, हरा ऑस्ट्रेलिया-ओसियाना को और लाल रंग अमेरिका प्रतिबिंबित करता है.
ओलिंपिक का मोटो
ओलिंपिक खेलों का मोटो 'हेंडियाट्रिस' है, जिसका लैटिन में मतलब है- 'तेज, ऊंचा और मजबूत'. ओलिंपिक मोटो का प्रस्ताव भी पिएरे डी काउबर्टिन ने 1894 में दिया था, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर 1924 में पेरिस में हुए ओलिंपिक खेलों में अपनाया गया था. काउबर्टिन ने एक अनौपचारिक मोटो भी दिया था, जो 'सबसे महत्वपूर्ण चीज जीतना नहीं है, बल्कि हिस्सा लेना है'.
ओलिंपिक फ्लैग
फ्लैग के मामले में भी महान पिएरे डी काउबर्टिन की अहम भूमिका रही. उन्होंने 1914 में इसकी संकल्पना की थी, जिसमें सफेद पृष्ठभूमि में अलग-अलग रंगों की 5 रिंग रखी गईं. खास बात यह कि ये पांचों रिंग आपस में जुड़ी हुई हैं.
मशाल और टॉर्च रिले
ओलिंपिक की एक और पहचान मशाल है, जिसे रिले सिस्टम से जिस देश या महाद्वीप में ओलिंपिक होता है, अक्सर वहीं घुमाया जाता है. इसकी शुरुआत 1936 में हुए बर्लिन गेम्स से पहले हुई थी. ओलिंपिक मशाल रिले ओपनिंग सेरेमनी वाले स्थान पर पहुंचाई जाती है और वहां उस देश की कोई महान हस्ती मुख्य स्टेडियम में उसे प्रज्ज्वलित करता है.
रियों में 4 घंटे चलेगी ओपनिंग सेरेमनी
रियो ओलिंपिक-2016 के आयोजकों ने सभी एथलीटों से शुक्रवार को आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है. आयोजकों ने यह दावा भी किया कि उनके द्वारा देखे गए अब तक के उद्घाटन समारोहों में सबसे बेहतरीन होगा. रियो ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह के लिए करीब 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए गए हैं, जो लंदन ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह में खर्च हुए धन का आधा है.
वैश्विक 5 रिंग
ओलिंपिक के बारे में जब भी कोई खबर आती है या उसे प्रदर्शित करना होता है तो इसके लिए सबसे अधिक पांच रंगों (नीले, पीले, काले, हरे, लाल) की पांच रिंगों का उपयोग किया जाता है. ये रिंग वैश्विक तौर पर ओलिंपिक खेलों का प्रतीक हैं. स्विट्जरलैंड में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शित इन रिंगों की संकल्पना बारोन पिएरे डी काउबर्टिन ने की थी, जिन्हें आधुनिक ओलिंपिक गेम्स का सह-संस्थापक माना जाता है. उन्होंने 1912 में इनकी डिजाइन तैयार की थी.
काउबर्टिन के अनुसार सफेद पृष्ठभूमि में रिंगों का रंग वास्तव में उस समय ओलिंपिक में भाग लेने वाले देशों के झंडे के रंग को आधार बनाकर तैयार किया गया था. 1914 में विश्व युद्ध के कारण ओलिंपिक कांग्रेस का आयोजन रद्द कर दिया गया था, लेकिन प्रतीक और फ्लैग को स्वीकार कर लिया गया था और इनका इस्तेमाल पहली बार 1920 में आयोजित बेल्जियम ओलिंपिक के दौरान हुआ था, जो 1936 में बर्लिन ओलिंपिक में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया.

बाद में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी ने अपनी विचारधारा में बदलाव किया और यह कहते हुए इन रिंगों की नई व्याख्या दी कि ओलिंपिक के वैश्विक प्रतियोगिता है, जिसमें सभी महाद्वीपों के एथलीट भाग लेते हैं, इसलिए इसे 'महाद्वीपों के प्रतीक' के रूप में लिया जाना चाहिए. हालांकि किसी रंग विशेष का संबंध किसी महाद्वीप से नहीं बताया जाता, लेकिन 1951 से पहले ओलिंपिक की आधिकारिक बुकलेट में यह बताया गया था कि नीला यूरोप के, पीला रंग एशिया को, काला अफ्रीका को, हरा ऑस्ट्रेलिया-ओसियाना को और लाल रंग अमेरिका प्रतिबिंबित करता है.
ओलिंपिक का मोटो
ओलिंपिक खेलों का मोटो 'हेंडियाट्रिस' है, जिसका लैटिन में मतलब है- 'तेज, ऊंचा और मजबूत'. ओलिंपिक मोटो का प्रस्ताव भी पिएरे डी काउबर्टिन ने 1894 में दिया था, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर 1924 में पेरिस में हुए ओलिंपिक खेलों में अपनाया गया था. काउबर्टिन ने एक अनौपचारिक मोटो भी दिया था, जो 'सबसे महत्वपूर्ण चीज जीतना नहीं है, बल्कि हिस्सा लेना है'.
ओलिंपिक फ्लैग
फ्लैग के मामले में भी महान पिएरे डी काउबर्टिन की अहम भूमिका रही. उन्होंने 1914 में इसकी संकल्पना की थी, जिसमें सफेद पृष्ठभूमि में अलग-अलग रंगों की 5 रिंग रखी गईं. खास बात यह कि ये पांचों रिंग आपस में जुड़ी हुई हैं.
मशाल और टॉर्च रिले
ओलिंपिक की एक और पहचान मशाल है, जिसे रिले सिस्टम से जिस देश या महाद्वीप में ओलिंपिक होता है, अक्सर वहीं घुमाया जाता है. इसकी शुरुआत 1936 में हुए बर्लिन गेम्स से पहले हुई थी. ओलिंपिक मशाल रिले ओपनिंग सेरेमनी वाले स्थान पर पहुंचाई जाती है और वहां उस देश की कोई महान हस्ती मुख्य स्टेडियम में उसे प्रज्ज्वलित करता है.
रियों में 4 घंटे चलेगी ओपनिंग सेरेमनी
रियो ओलिंपिक-2016 के आयोजकों ने सभी एथलीटों से शुक्रवार को आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है. आयोजकों ने यह दावा भी किया कि उनके द्वारा देखे गए अब तक के उद्घाटन समारोहों में सबसे बेहतरीन होगा. रियो ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह के लिए करीब 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए गए हैं, जो लंदन ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह में खर्च हुए धन का आधा है.
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