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This Article is From Aug 10, 2016

ओलिंपिक चैंपियन माइकल फ़ेल्प्स का जादू है बरक़रार, कड़ी मेहनत का नतीजा है सफलता

ओलिंपिक चैंपियन माइकल फ़ेल्प्स का जादू है बरक़रार, कड़ी मेहनत का नतीजा है सफलता
तैराक माइकल फेल्प्स (फाइल फोटो)
  • फ़ेल्प्स हफ़्तेभर की कड़ी ट्रेनिंग में 80 किलोमीटर तैरते हैं
  • हर रोज़ वो 5 से 6 घंटे स्विमिंग पूल में बिताते हैं
  • कठिन काम को करने के लिए वो 12000 कैलोरिज़ का सेवन करते हैं
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नई दिल्ली:

अमेरिका के स्विमर माइकल फ़ेल्प्स ने बुधवार को रियो में तीसरा गोल्ड मेडल हासिल किया. ओलिंपिक करियर में फ़ेल्प्स ने इसी के साथ अपने सिंगल्स गोल्ड मेडल की संख्या 21 कर ली. 31 साल के अमेरिका एथलीट ने 200 मीटर बटरफ़लाई रेस और 4X200 मीटर मेंस टीम इवेंट में गोल्ड जीता.

जीत के बाद अपने 21वें गोल्ड पर फ़ेल्प्स ने कहा, 'ये काफ़ी पदक हैं और मैं इसे सोचकर दीवाना महसूस कर रहा हूं. मैं यहां एक मकसद के साथ आया था और वो पूरा हुआ.'

रियो में फ़ेल्प्स के कुछ और इवेंट बचे हैं - इसमें 100 मीटर बटरफ़लाई रेस और 4X100 मीटर मिश्रित तैराकी रिले और 100 मीटर सिंग्लस तैराकी हैं. ज़ाहिर है इन इवेंट में फ़ेल्प्स के साथ-साथ फ़ैन्स भी उनसे गोल्ड की उम्मीद लगाए होंगे. फ़ेल्प्स कहते हैं, 'मैं आगे के इवेंट्स में उतरने के लिए तैयार हूं..अभी मैंने आधा रास्ता भी तय नहीं किया है.' ( ये भी पढ़ें : ओलिंपिक में एक मेडल जीतना ही है कठिन, फेल्‍प्‍स जैसे इन खिलाड़ि‍यों ने लगा दी मेडल्‍स की झड़ी..)

फ़ेल्प्स के करियर की शुरुआत साल 2005 में हुई लेकिन शुरुआती रेस में वो पांचवें स्थान पर रहे. एक बार लय पकड़ने के बाद उन्होंने पीछे मुड़के नहीं देखा. ऐथेन्स में 6 गोल्ड, बीजिंग में 8 गोल्ड, लंदन में 4 गोल्ड मेडल उन्होंने अपने नाम किया.

एक आंकड़े के मुताबिक अगर फ़ेल्प्स देश होते तो अमेरिका, चीन और 30 अन्य देश ही उनके आगे होते. फ़ेल्प्स के खाते में 25 गोल्ड हैं जिसके मुताबिक वो अब वो 34वें नंबर हैं यानि भारत (45वें नंबर पर भारत) के 9 गोल्ड से 11 पायदान आगे. उनकी महानता इसी बात से बयान होती है कि - सिर्फ़ 32 देशों के पास उनसे ज़्यादा गोल्ड मेडल हैं और धरती के 174 देंशों के पास उनसे कम गोल्ड मेडल हैं.

कड़ी ट्रेनिंग का नतीजा है सफलता
फ़ेल्प्स हफ़्तेभर की कड़ी ट्रेनिंग में 80 किलोमीटर तैरते हैं. हर रोज़ वो 5 से 6 घंटे स्विमिंग पूल में बिताते हैं और कठिन काम को करने के लिए वो 12000 कैलोरिज़ का सेवन करते हैं. इतना ही नहीं एक ख़ास हाई एल्टीट्‌यूड चैंबर में सोते हैं जो उनके फेफड़ों को मज़बूत बनाता है.

फ़ेल्प्स ने 2012 लंदन ओलिंपिक के बाद तैराकी से संन्यास ले लिया था लेकिन 2014 में उन्होंने एक बार फिर वापसी कर कड़ी मेहनत से सबको प्रभावित किया. ओलिंपिक इतिहास में फ़ेल्प्स के नाम सबसे ज़्यादा 25 मेडल हैं. इसमें 21 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रांन्ज़ मेडल शामिल हैं. दूसरे नंबर पर रूस की जिम्नास्ट लेरिसा लेटनिना के 18 मेडल हैं, जिसमें 9 गोल्ड, 5 सिल्वर और 4 कांस्य पदक है.

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