कॉमनवेल्थ चैंपियन पूजा ढांडा ने प्रो-रेसलिंग लीग में रियो ओलिंपिक की चैंपियन हेलेन मेरौलिस को हरा दिया.
- कहा- प्रो रेसलिंग लीग (PWL) से साफ़ हो गया है कि हमारी तैयारी अच्छी
- हेलेन जैसी चैंपियन को हराने के बाद कॉन्फ़िडेंस बढ़ गया
- कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में भी जीत हासिल करने का विश्वास
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नई दिल्ली:
साल 2013 और 2017 की कॉमनवेल्थ चैंपियन पूजा ढांडा ने एक बार फिर प्रो-रेसलिंग लीग में रियो ओलिंपिक की चैंपियन हेलेन मेरौलिस को हराकर अपना दबदबा साबित कर दिया. प्रो रेसलिंग लीग में पंजाब रॉयल्स के लिए खेलते हुए हरियाणा की 'दंगल गर्ल' पूजा ने ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियन हेलेन को हराकर अपनी टीम का PWL का ख़िताब बचाने में अहम रोल अदा किया.
पूजा ने NDTV संवाददाता विमल मोहन से खास बातचीत में बताया कि उनका फ़ोकस निजी संतोष पर है और वे इससे ही खुश हैं कि कुश्ती की दुनिया में उनकी अलग पहचान बन गई है.
सवाल: टूर्नामेंट से पहले आपने भारत की कॉमनवेल्थ चैंपियन और पहली ओलिंपियन खिलाड़ी गीता फोगाट को हराया फिर PWL टूर्नामेंट में दो बार की ओलिंपिक चैंपियन हेलेन को हराया. क्या आपको लगता है कि आप आज अपने वज़न वर्ग (57 किलोग्राम वर्ग) में दुनिया की किसी भी पहलवान को हरा सकती हैं?
पूजा ढांडा: प्रो रेसलिंग लीग (PWL) से साफ़ हो गया है कि हमारी तैयारी अच्छी है. हमारी तैयारी ऐसी है कि अब हम इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स (4-15 अप्रैल, गोल्ड कोस्ट) या एशियन गेम्स (18 अगस्त-2 सितंबर, जकार्ता और पलेमबांग) में गोल्ड जीत सकती हैं. हमने PWL में ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियन हेलेन मरौलिस (अमेरिका) के अलावा नाइजीरिया की वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट ओडुनायो एडेकुरोये, वर्ल्ड चैंपियनशिप की ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट मारवा आम्री (ट्यूनिशिया) को हराया. इससे ज़ाहिर तौर पर मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है. मुझे लगता है हमारे कई खिलाड़ी अब उसी लेवल के हो गए हैं. हार और जीत में लक फ़ैक्टर भी होता है. किसी दिन बड़ा से बड़ा पहलवान हार सकता है. लेकिन हम सबका स्तर ज़रूर बेहतर हुआ है. अब हम वर्ल्ड लेवल पर किसी टूर्नामेंट में प्रदर्शन के लिए तैयार हो गए हैं.
सवाल: आप में ये बदलाव कैसे आया? आपसे कॉमनवेल्थ या एशियाई खेलों में कैसी उम्मीद की जा सकती है?
पूजा ढांडा: हम सबमें ये बदलाव प्रो-रेसलिंग लीग से ही आया है. ये नहीं होता तो हम इन वर्ल्ड चैंपियनशिप में बहुत कम ही टक्कर ले पाते. ये पहलवान हमें वर्ल्ड चैंपियनशिप में ही मिल पाते हैं. वहां भी इनसे भिड़ंत होती या नहीं, ये कहना मुश्किल है. होम ग्राउंड में हेलेन जैसी चैंपियन को हराने के बाद मेरा कॉन्फ़िडेंस बढ़ गया. अब मैं बिना डरे हुए किसी भी पहलवान से टक्कर लेने को तैयार हो गई हूं. 
सवाल: आप चोट से वापसी कर रही थीं. आप में निजी तौर पर एक एथलीट होने के नाते ये बदलाव कैसे आए?
पूजा ढांडा: जहां तक इस टूर्नामेंट के लिए तैयार होने की बात है, मेरे बांये घुटने में एसीएल टीयर (ACL) था. मैंने इससे उबरने में पूरा ध्यान लगाया. भारतीय क्रिकेट टीम के डॉक्टर आशीष कौशिक ने मेरी पूरी मदद की. उन्होंने रेसलिंग की जरूरतों के लिए रिसर्च की. फिर मेरा फ़िटनेस टेस्ट लिया, फ़ुल बॉडी टेस्ट लिया. मेरा स्ट्रेंथ शेड्यूल, फ़िटनेस शेड्यूल, डाइट सबका रुटीन बनाया. उन्होंने इसके लिए मुझे जब भी मुंबई या बेंगलुरु बुलाया, मैं चली गई. इसका मेरी फ़िटनेस पर बहुत असर हुआ. इन सबके अलावा मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिस्ट) का बहुत असर हुआ. ख़ासकर मैच से पहले खुद को फ़ोकस रखने में इससे बहुत मदद मिली. मेरा मोटिवेशन लेवल, फ़िटनेस और मनोवैज्ञानिक तैयारी की वजह से अलग स्तर पर आ गया है.
सवाल: प्रोफ़ेशनल रेसलिंग लीग से आपको निजी तौर पर क्या फ़ायदा हुआ?
पूजा ढांडा: जीत के बाद हमें कोई रकम अलग से नहीं मिलती. ऑक्शन के वक्त मेरी बोली 10 लाख रुपये की लगी थी, उसमें से टैक्स कटकर 9 लाख रुपये मिल गए. इसका इस्तेमाल मेरी फ़िटनेस, मेरे रिहैबिलिटेशन में होगा. हमारी टीम को प्राइज़ मनी के तौर पर क़रीब 2 करोड़ रुपये मिले. बड़ी बात ये है कि मैं चैंपियन बनी जिससे मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ गया.
सवाल: इस टूर्नामेंट से कुश्ती में भारतीय बेंच स्ट्रेंथ को लेकर क्या कहा जा सकता है?
पूजा ढांडा: इसका बड़ा फ़ायदा ये हुआ कि हमारे पहलवानों को लगा कि हम ओलिंपिक चैंपियन को हरा सकते हैं. इसमें संगीता फ़ोगाट (57 किलोग्राम वर्ग), सीमा, निर्मला, रितु फ़ोगाट, विनीश फ़ोगाट जैसी पहलवानों ने बड़े मैच जीतकर साबित कर दिया कि वो दुनिया में किसी भी स्तर पर टूर्नामेंट के लिए तैयार हैं. ये बड़ी बात है.
VIDEO : मिलिए 'दंगल गर्ल' से
सवाल: इस टूर्नामेंट में आपने कमाल का प्रदर्शन किया, लेकिन मीडिया में सुर्ख़ियां नहीं बना पाईं...ख़ासकर टेलीविज़न मीडिया में... आपको बुरा लगता है?
पूजा ढांडा: ऐसी बात नहीं है. मेरा काम रेसलिंग करना है. मुझे संतोष है कि मैंने अच्छा कमबैक किया. मेरे बारे में रेसलिंग वर्ल्ड में पता चल गया. मुझे लगता है कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में जीतूंगी तो अपने-आप मान-सम्मान मिल जाएगा. हमारा काम खेलते रहना है. वो मैं कर रही हूं. ये हमारी निजी ज़िम्मेदारी है कि हम अच्छा प्रदर्शन करें. मलाल की ज़रूरत नहीं है और मुझे मलाल नहीं है.
पूजा ने NDTV संवाददाता विमल मोहन से खास बातचीत में बताया कि उनका फ़ोकस निजी संतोष पर है और वे इससे ही खुश हैं कि कुश्ती की दुनिया में उनकी अलग पहचान बन गई है.
सवाल: टूर्नामेंट से पहले आपने भारत की कॉमनवेल्थ चैंपियन और पहली ओलिंपियन खिलाड़ी गीता फोगाट को हराया फिर PWL टूर्नामेंट में दो बार की ओलिंपिक चैंपियन हेलेन को हराया. क्या आपको लगता है कि आप आज अपने वज़न वर्ग (57 किलोग्राम वर्ग) में दुनिया की किसी भी पहलवान को हरा सकती हैं?
पूजा ढांडा: प्रो रेसलिंग लीग (PWL) से साफ़ हो गया है कि हमारी तैयारी अच्छी है. हमारी तैयारी ऐसी है कि अब हम इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स (4-15 अप्रैल, गोल्ड कोस्ट) या एशियन गेम्स (18 अगस्त-2 सितंबर, जकार्ता और पलेमबांग) में गोल्ड जीत सकती हैं. हमने PWL में ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियन हेलेन मरौलिस (अमेरिका) के अलावा नाइजीरिया की वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट ओडुनायो एडेकुरोये, वर्ल्ड चैंपियनशिप की ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट मारवा आम्री (ट्यूनिशिया) को हराया. इससे ज़ाहिर तौर पर मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है. मुझे लगता है हमारे कई खिलाड़ी अब उसी लेवल के हो गए हैं. हार और जीत में लक फ़ैक्टर भी होता है. किसी दिन बड़ा से बड़ा पहलवान हार सकता है. लेकिन हम सबका स्तर ज़रूर बेहतर हुआ है. अब हम वर्ल्ड लेवल पर किसी टूर्नामेंट में प्रदर्शन के लिए तैयार हो गए हैं.
सवाल: आप में ये बदलाव कैसे आया? आपसे कॉमनवेल्थ या एशियाई खेलों में कैसी उम्मीद की जा सकती है?
पूजा ढांडा: हम सबमें ये बदलाव प्रो-रेसलिंग लीग से ही आया है. ये नहीं होता तो हम इन वर्ल्ड चैंपियनशिप में बहुत कम ही टक्कर ले पाते. ये पहलवान हमें वर्ल्ड चैंपियनशिप में ही मिल पाते हैं. वहां भी इनसे भिड़ंत होती या नहीं, ये कहना मुश्किल है. होम ग्राउंड में हेलेन जैसी चैंपियन को हराने के बाद मेरा कॉन्फ़िडेंस बढ़ गया. अब मैं बिना डरे हुए किसी भी पहलवान से टक्कर लेने को तैयार हो गई हूं.

सवाल: आप चोट से वापसी कर रही थीं. आप में निजी तौर पर एक एथलीट होने के नाते ये बदलाव कैसे आए?
पूजा ढांडा: जहां तक इस टूर्नामेंट के लिए तैयार होने की बात है, मेरे बांये घुटने में एसीएल टीयर (ACL) था. मैंने इससे उबरने में पूरा ध्यान लगाया. भारतीय क्रिकेट टीम के डॉक्टर आशीष कौशिक ने मेरी पूरी मदद की. उन्होंने रेसलिंग की जरूरतों के लिए रिसर्च की. फिर मेरा फ़िटनेस टेस्ट लिया, फ़ुल बॉडी टेस्ट लिया. मेरा स्ट्रेंथ शेड्यूल, फ़िटनेस शेड्यूल, डाइट सबका रुटीन बनाया. उन्होंने इसके लिए मुझे जब भी मुंबई या बेंगलुरु बुलाया, मैं चली गई. इसका मेरी फ़िटनेस पर बहुत असर हुआ. इन सबके अलावा मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिस्ट) का बहुत असर हुआ. ख़ासकर मैच से पहले खुद को फ़ोकस रखने में इससे बहुत मदद मिली. मेरा मोटिवेशन लेवल, फ़िटनेस और मनोवैज्ञानिक तैयारी की वजह से अलग स्तर पर आ गया है.
सवाल: प्रोफ़ेशनल रेसलिंग लीग से आपको निजी तौर पर क्या फ़ायदा हुआ?
पूजा ढांडा: जीत के बाद हमें कोई रकम अलग से नहीं मिलती. ऑक्शन के वक्त मेरी बोली 10 लाख रुपये की लगी थी, उसमें से टैक्स कटकर 9 लाख रुपये मिल गए. इसका इस्तेमाल मेरी फ़िटनेस, मेरे रिहैबिलिटेशन में होगा. हमारी टीम को प्राइज़ मनी के तौर पर क़रीब 2 करोड़ रुपये मिले. बड़ी बात ये है कि मैं चैंपियन बनी जिससे मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ गया.
सवाल: इस टूर्नामेंट से कुश्ती में भारतीय बेंच स्ट्रेंथ को लेकर क्या कहा जा सकता है?
पूजा ढांडा: इसका बड़ा फ़ायदा ये हुआ कि हमारे पहलवानों को लगा कि हम ओलिंपिक चैंपियन को हरा सकते हैं. इसमें संगीता फ़ोगाट (57 किलोग्राम वर्ग), सीमा, निर्मला, रितु फ़ोगाट, विनीश फ़ोगाट जैसी पहलवानों ने बड़े मैच जीतकर साबित कर दिया कि वो दुनिया में किसी भी स्तर पर टूर्नामेंट के लिए तैयार हैं. ये बड़ी बात है.
VIDEO : मिलिए 'दंगल गर्ल' से
सवाल: इस टूर्नामेंट में आपने कमाल का प्रदर्शन किया, लेकिन मीडिया में सुर्ख़ियां नहीं बना पाईं...ख़ासकर टेलीविज़न मीडिया में... आपको बुरा लगता है?
पूजा ढांडा: ऐसी बात नहीं है. मेरा काम रेसलिंग करना है. मुझे संतोष है कि मैंने अच्छा कमबैक किया. मेरे बारे में रेसलिंग वर्ल्ड में पता चल गया. मुझे लगता है कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में जीतूंगी तो अपने-आप मान-सम्मान मिल जाएगा. हमारा काम खेलते रहना है. वो मैं कर रही हूं. ये हमारी निजी ज़िम्मेदारी है कि हम अच्छा प्रदर्शन करें. मलाल की ज़रूरत नहीं है और मुझे मलाल नहीं है.
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