नरसिंह यादव (फाइल फोटो)
- नाडा में दो दिनों तक सुनवाई के बाद फैसला नरसिंह के पक्ष में आया
- NADA से क्लीनचिट मिलते ही नरसिंह यादव लड्डू के लिए मना नहीं कर पाए
- नरसिंह यादव के इस संघर्ष में भारतीय कुश्ती संघ का साथ सबसे बड़ा सहारा था
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अब इसे नदानी कहें या भोलापन या 'जीत' की खुमारी, देश की एंटी डोपिंग एजेंसी NADA से क्लीनचिट मिलते ही नरसिंह यादव लड्डू के लिए मना नहीं कर पाए. उनके साथी और सीनियर पहलवान योगेश्वर दत्त उन्हें बार-बार नसीहत दे रहे थे कि ओलिंपिक के पहले वे अपने खाने-पीने को लेकर सावधान रहें, लेकिन "न" वे वहां भी नहीं कह पाए और न यहां. इसी "न" नहीं कह पाने की वजह से उन्हें अदालत और फिर NADA के चक्कर लगाने पड़े. जबकि इस समय उनका समय अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगना चाहिए था. बहरहाल NADA का ये फ़ैसला भारतीय खेलों के लिए बेहद अहम साबित होगा.
अब अगर इसमें 'मिलावट' हुई तो... उनका संघर्ष करीब 3 महीने से चल रहा था. मई में ओलिंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार ने 74 किलोग्राम भार वर्ग में रियो ओलिंपिक के लिए ट्रायल की मांग शुरू कर दी, जबकि नरसिंह यादव ने पिछले साल सितंबर में लास वेगास में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए "कोटा" हासिल किया था. ओलिंपिक के नियमानुसार "कोटा" देश के लिए जीता जाता है. अगर देश का खेल संघ चाहे तो वह ओलिंपिक के लिए फिर से ट्रायल करा सकता है ताकि सर्वश्रेष्ठ फ़ॉर्म में चल रहा एथलीट ओलिंपिक में जाए, लेकिन अमूमन कोटा हासिल करने वाला एथलीट ही जाता है. सुशील कुमार ट्रायल में हिस्सा अनफ़िट होने के कारण नहीं ले पाए थे या शायद इसके पीछे भी कोई कहानी थी, ये शायद कभी सामने नहीं आ पाए. बहरहाल रियो जाने के लिए दंगल दिल्ली हाईकोर्ट तक गया. 6 जून को फ़ैसला नरसिंह यादव के पक्ष में आया.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होने वाली थी, क्योंकि ड्रामा, इमोशन और षडयंत्र अभी बाकी था. 25 जून और 5 जुलाई को NADA ने नरसिंह यादव पर दो डोप टेस्ट किए. 23 जुलाई को ये ख़बर सार्वजनिक हो गई कि दोनों टेस्ट में नरसिंह यादव पॉजिटिव पाए गए हैं. रियो में पदक के दावेदार माने जाने वाले पहलवान नरसिंह यादव के लिए मानों दुनिया खत्म हो गई. नरसिंह यादव संभले तो उन्हें अहसास हुआ कि वे एक बड़े षडयंत्र के शिकार हुए हैं। नरसिंह पर आरोप लगा उन्होने METHANDIENONE का सेवन किया है। लेकिन इस षडयंत्र में खामी थी। दरअसल METHANDIENONE एक एनाबॉलिक स्ट्रेरॉयड है जो मसल्स बनाने में काम आता है। जबकि रियो के पहले नरसिंह को करीब 8 किलो वजन कम करना था। नरसिंह के वकील यही दलील देते रहे कि नरसिंह वजन बढ़ाने वाला ड्रग्स क्यों लेगा। उनके खाने में किसी ने जानबूझ कर ये मिलाया था। नाडा में दो दिनों तक सुनवाई के बाद एक बार फिर फैसला नरसिंह के पक्ष में आया।
नरसिंह यादव के चाहने वालों की दुआ काम आयी वरना डोपिंग के आरोप लगने के बाद रियो जाने की संभावना न के बराबर थी। नरसिंह की निराशा के बीच WADA का एक नियम एक किरण जरूर था। नियम 10.5.1.1 के अनुसार अगर एथलीट इस बात को साबित कर दे कि प्रतिबंधित दवा उसके शरीर में उसकी जानकारी के बिना आई और उसमें उसका कोई हाथ नहीं था तो सज़ा 0-2 साल तक की है. नियम 10.5.1.2 के तहत अगर एथलीट के सेवन करने वाले किसी पदार्थ में मिलावट की गई है और ये साबित हो जाता है तो सज़ा 0-2 तक की है. नरसिंह यादव के इस संघर्ष में भारतीय कुश्ती संघ का साथ सबसे बड़ा सहारा था.
26 साल के नरसिंह पंचम यादव वाराणसी के पास नीमा गांव के रहने वाले हैं. लेकिन वह अपने पिता के साथ मुंबई में रहते हैं. मुंबई के अखाड़ों में जमकर अभ्यास करते हुए रियो में गोल्ड का सपना पालते रहे हैं. अब उम्मीद है कि नरसिंह रियो ओलिंपिक में पदक जीत कर तमाम आलोचकों और षडयंत्रकारियों को करारा जवाब देंगे...
अब अगर इसमें 'मिलावट' हुई तो... उनका संघर्ष करीब 3 महीने से चल रहा था. मई में ओलिंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार ने 74 किलोग्राम भार वर्ग में रियो ओलिंपिक के लिए ट्रायल की मांग शुरू कर दी, जबकि नरसिंह यादव ने पिछले साल सितंबर में लास वेगास में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए "कोटा" हासिल किया था. ओलिंपिक के नियमानुसार "कोटा" देश के लिए जीता जाता है. अगर देश का खेल संघ चाहे तो वह ओलिंपिक के लिए फिर से ट्रायल करा सकता है ताकि सर्वश्रेष्ठ फ़ॉर्म में चल रहा एथलीट ओलिंपिक में जाए, लेकिन अमूमन कोटा हासिल करने वाला एथलीट ही जाता है. सुशील कुमार ट्रायल में हिस्सा अनफ़िट होने के कारण नहीं ले पाए थे या शायद इसके पीछे भी कोई कहानी थी, ये शायद कभी सामने नहीं आ पाए. बहरहाल रियो जाने के लिए दंगल दिल्ली हाईकोर्ट तक गया. 6 जून को फ़ैसला नरसिंह यादव के पक्ष में आया.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होने वाली थी, क्योंकि ड्रामा, इमोशन और षडयंत्र अभी बाकी था. 25 जून और 5 जुलाई को NADA ने नरसिंह यादव पर दो डोप टेस्ट किए. 23 जुलाई को ये ख़बर सार्वजनिक हो गई कि दोनों टेस्ट में नरसिंह यादव पॉजिटिव पाए गए हैं. रियो में पदक के दावेदार माने जाने वाले पहलवान नरसिंह यादव के लिए मानों दुनिया खत्म हो गई. नरसिंह यादव संभले तो उन्हें अहसास हुआ कि वे एक बड़े षडयंत्र के शिकार हुए हैं। नरसिंह पर आरोप लगा उन्होने METHANDIENONE का सेवन किया है। लेकिन इस षडयंत्र में खामी थी। दरअसल METHANDIENONE एक एनाबॉलिक स्ट्रेरॉयड है जो मसल्स बनाने में काम आता है। जबकि रियो के पहले नरसिंह को करीब 8 किलो वजन कम करना था। नरसिंह के वकील यही दलील देते रहे कि नरसिंह वजन बढ़ाने वाला ड्रग्स क्यों लेगा। उनके खाने में किसी ने जानबूझ कर ये मिलाया था। नाडा में दो दिनों तक सुनवाई के बाद एक बार फिर फैसला नरसिंह के पक्ष में आया।
नरसिंह यादव के चाहने वालों की दुआ काम आयी वरना डोपिंग के आरोप लगने के बाद रियो जाने की संभावना न के बराबर थी। नरसिंह की निराशा के बीच WADA का एक नियम एक किरण जरूर था। नियम 10.5.1.1 के अनुसार अगर एथलीट इस बात को साबित कर दे कि प्रतिबंधित दवा उसके शरीर में उसकी जानकारी के बिना आई और उसमें उसका कोई हाथ नहीं था तो सज़ा 0-2 साल तक की है. नियम 10.5.1.2 के तहत अगर एथलीट के सेवन करने वाले किसी पदार्थ में मिलावट की गई है और ये साबित हो जाता है तो सज़ा 0-2 तक की है. नरसिंह यादव के इस संघर्ष में भारतीय कुश्ती संघ का साथ सबसे बड़ा सहारा था.
26 साल के नरसिंह पंचम यादव वाराणसी के पास नीमा गांव के रहने वाले हैं. लेकिन वह अपने पिता के साथ मुंबई में रहते हैं. मुंबई के अखाड़ों में जमकर अभ्यास करते हुए रियो में गोल्ड का सपना पालते रहे हैं. अब उम्मीद है कि नरसिंह रियो ओलिंपिक में पदक जीत कर तमाम आलोचकों और षडयंत्रकारियों को करारा जवाब देंगे...
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