नेपाल की 13 साल की तैराक गौरिका सिंह (फाइल फोटो)
रियो डि जेनेरो:
रियो ओलिंपिक में भाग ले रहे 10 हजार से अधिक एथलीटों के बीच नेपाल में भूकंप की शिकार रही एक लड़की चर्चा का केंद्र रही. केवल आपदाग्रस्त होने को लेकर ही नहीं बल्कि अपनी उम्र को लेकर भी नेपाल की 13 साल की गौरिका सबकी नजरों में रहीं. वह ओलिंपिक की सबसे कम उम्र की एथलीट रहीं. ओलिंपिक से पहले भी उनकी खबरें मीडिया में आईं थीं. सबने उनके जब्जे को सलाम भी किया था.
नेपाल की इस संघर्षशील लड़की ने ओलिंपिक की 100 मीटर बैकस्ट्रोक तैराकी में भाग लिया था. हालांकि वह कोई मेडल नहीं जीत पाईं अपनी हीट में दो प्रतिभागियों से आगे रहीं. प्रतियोगिता में ओवरऑल उन्होंने 31वां स्थान हासिल किया.
नेपाल में जन्मी गौरिका केवल दो साल की उम्र में ही लंदन चली गई थीं. वह पिछले साल नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में बचने वाले लोगों में से एक हैं. गौरिका ने हाल ही में हर्थफोर्डशिरे में अपने स्कूल से जिला स्तर की स्थानीय चैंपियनशिप पूरी की थी. अप्रैल 2015 में गौरिका राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए अपनी मां गरिमा और छोटे भाई सौरीन के साथ नेपाल आई थीं और इसी दौरान देश में विनाशकारी भूकंप आ गया.
गौरिका ने कहा, "वह काफी डरावना था. हम काठमांडू में एक इमारत की पांचवी मंजिल पर थे और भूकंप के समय भाग भी नहीं सकते थे, इसलिए हम 10 मिनट के लिए कमरे के बीच रखे एक टेबल के नीचे बैठ गए."
एथलीट ने कहा कि वह नई इमारत थी, इसलिए अन्य इमारतों की तरह वह गिरी नहीं. गौरिका ने नेपाल 11 वर्ष से ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने सात राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़े हैं। उन्हें आशा थी कि एक दिन वह ओलिंपिक में जरूर कदम रखेंगी.
उन्होंने कहा, "मैं जाना चाहती थी, लेकिन इस बारे में आश्वस्त नहीं थी, क्योंकि मैं काफी कम उम्र की थी. जब मुझे एक माह पहले इस बारे में पता चला कि मैं ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लूंगी, तो काफी हैरान थी."
गौरिका के पिता पारस का मानना है कि उनकी बेटी सफलता की हकदार है, क्योंकि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. उन्होंने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करती हैं.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
नेपाल की इस संघर्षशील लड़की ने ओलिंपिक की 100 मीटर बैकस्ट्रोक तैराकी में भाग लिया था. हालांकि वह कोई मेडल नहीं जीत पाईं अपनी हीट में दो प्रतिभागियों से आगे रहीं. प्रतियोगिता में ओवरऑल उन्होंने 31वां स्थान हासिल किया.
नेपाल में जन्मी गौरिका केवल दो साल की उम्र में ही लंदन चली गई थीं. वह पिछले साल नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में बचने वाले लोगों में से एक हैं. गौरिका ने हाल ही में हर्थफोर्डशिरे में अपने स्कूल से जिला स्तर की स्थानीय चैंपियनशिप पूरी की थी. अप्रैल 2015 में गौरिका राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए अपनी मां गरिमा और छोटे भाई सौरीन के साथ नेपाल आई थीं और इसी दौरान देश में विनाशकारी भूकंप आ गया.
गौरिका ने कहा, "वह काफी डरावना था. हम काठमांडू में एक इमारत की पांचवी मंजिल पर थे और भूकंप के समय भाग भी नहीं सकते थे, इसलिए हम 10 मिनट के लिए कमरे के बीच रखे एक टेबल के नीचे बैठ गए."
एथलीट ने कहा कि वह नई इमारत थी, इसलिए अन्य इमारतों की तरह वह गिरी नहीं. गौरिका ने नेपाल 11 वर्ष से ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने सात राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़े हैं। उन्हें आशा थी कि एक दिन वह ओलिंपिक में जरूर कदम रखेंगी.
उन्होंने कहा, "मैं जाना चाहती थी, लेकिन इस बारे में आश्वस्त नहीं थी, क्योंकि मैं काफी कम उम्र की थी. जब मुझे एक माह पहले इस बारे में पता चला कि मैं ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लूंगी, तो काफी हैरान थी."
गौरिका के पिता पारस का मानना है कि उनकी बेटी सफलता की हकदार है, क्योंकि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. उन्होंने बताया कि वह सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करती हैं.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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