आज सुदेश लहरी टीवी की दुनिया का बड़ा नाम हैं. लोग उनकी कॉमेडी पर हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं, लेकिन उनकी असली जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. एक समय ऐसा था जब उनके पास दो वक्त की रोटी तक के पैसे नहीं थे. स्कूल जाना तो दूर, बचपन मजदूरी करते बीता. कभी ढाबे पर बर्तन धोए, कभी फैक्ट्री में जूते-चप्पल बनाए और कभी सब्जियां बेचकर घर चलाया. लेकिन इसी संघर्ष के बीच उनकी जिंदगी में एक ऐसी घटना हुई, जिसने उनकी किस्मत ही पलट दी.
जब श्मशान घाट में मिली एक घायल महिला
कृष्णा अभिषेक ने हाल ही में 'लाफ्टर शेफ्स 3' में सुदेश लहरी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया. उन्होंने बताया कि एक बार सुदेश किसी अंतिम संस्कार में शामिल होने श्मशान घाट पहुंचे थे. वहां एक कोने में उन्हें एक महिला दिखाई दी, जिसके शरीर पर कई घाव थे. वो दर्द में थी और बिल्कुल अकेली बैठी थी. आसपास मौजूद लोग उसे नजरअंदाज कर रहे थे, लेकिन सुदेश का दिल पसीज गया.
खुद गरीब थे, फिर भी महिला को घर ले आए
उस वक्त सुदेश खुद बहुत बुरे दौर से गुजर रहे थे. जेब में पैसे नहीं थे और जिंदगी संघर्ष से भरी थी. इसके बावजूद वो उस महिला को अपने घर ले आए. उन्होंने उसे मां का दर्जा दिया और दिन-रात उसकी सेवा की. खाने से लेकर दवा तक, हर जरूरत का ध्यान रखा. बताया जाता है कि महिला भी सुदेश के इस व्यवहार से बेहद भावुक हो गई थी.
मरते वक्त दिया ऐसा आशीर्वाद
कुछ समय बाद जब उस महिला की मौत हुई, तब उसने सुदेश लहरी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जिंदगी में उनका कभी बुरा नहीं होगा और वो बहुत बड़ा नाम कमाएंगे. कहते हैं कि उसी घटना के बाद उनकी जिंदगी बदलने लगी. जल्द ही उन्हें मुंबई से काम का पहला फोन आया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
आज करोड़ों में है कमाई
साल 2007 में 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' ने सुदेश लहरी को नई पहचान दिलाई. आज वो टीवी शो, लाइव इवेंट और फिल्मों से शानदार कमाई कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी नेट वर्थ करोड़ों में पहुंच चुकी है. लेकिन इतनी सफलता के बाद भी लोग उनकी सादगी और अच्छे दिल की मिसाल देते हैं.
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