सौ से ज्यादा फिल्मों से पिता ने जमाई धाक, बेटे का डेब्यू रहा फ्लॉप, दो फिल्मों का बाद लगा फुल स्टॉप

भानु चंदर को आज ज़्यादातर लोग एक सीनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर जानते हैं, लेकिन एक समय था जब वे हीरो के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करते थे.

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सौ से ज्यादा फिल्मों से पिता ने जमाई धाक
नई दिल्ली:

फिल्मी दुनिया का मायाजाल बहुत को आसानी से जकड़ लेता है. कुछ को इस माया नगरी में कदम रखते है कामयाबी मिल जाती है. तो, कुछ ऐसे भी होते हैं जो सीढ़ियां चढ़ते चले जाते हैं लेकिन शोहरत की मंजिल कभी मिल ही नहीं पाती. ऐसे ही स्टार हुए भानु चंदर जिन्हें पॉपुलेरिटी तो बहुत मिली लेकिन जो कामयाबी वो चाहते थे वो उन्हें मिल नहीं सकी. ऐसा ही कुछ उनके बेटे के साथ भी हुआ जिसे लॉन्च करने के लिए भानु चंदर ने हर तरह की मेहनत की. पर बेटे को मनचाही पहचान नहीं मिल सकी.

भानु चंदर का सफर
भानु चंदर को आज ज़्यादातर लोग एक सीनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर जानते हैं, लेकिन एक समय था जब वे हीरो के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करते थे. 80 और 90 के दशक में उन्होंने अपनी एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस से अच्छी-खासी पहचान बनाई थी. भानु चंदर ने बापू के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मन ऊरी पांडवुलु' से फिल्मी दुनिया में कदम रखा था. इस फिल्म में उन्होंने कृष्णम राजू और चिरंजीवी जैसे बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की.
पहली ही फिल्म से उन्हें पहचान मिली, और फिर ‘बेब्बुली' जैसी फिल्मों से वह दर्शकों के बीच पॉपुलर हो गए. ‘गुडाचारी नं.1', ‘सत्यं शिवं', ‘आडवाळ्लु मीकु जोहार्लु' जैसी फिल्मों में उन्होंने लगातार लीड रोल किए. महिला प्रधान फिल्म ‘स्वाति' में सुहासिनी के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया, लेकिन ये सब उन्हें स्टारडम नहीं दिलवा सका.

स्टारडम मिला, लेकिन टिका नहीं
करीब दो साल बाद जब भानु चंदर ने बालू महेंद्र की फिल्म ‘निरिक्षण' में काम किया, तो उनकी किस्मत बदल गई. मुरली कृष्ण के रोल में उनकी एक्टिंग को लोगों ने खूब सराहा. ये फिल्म सुपरहिट रही और भानु चंदर रातोंरात स्टार बन गए. इसके बाद ‘कीचुराल्लु' जैसी फिल्मों से उन्हें और पॉपुलैरिटी मिली. मगर लगातार फ्लॉप फिल्मों के चलते हीरो के रूप में उनका करियर थम सा गया और वो फिर से कैरेक्टर रोल्स में व्यस्त हो गए.

बेटे की नहीं चली किस्मत
भानु चंदर के बेटे जयंत ने फिल्म ‘ना कोडुकु बंगारम' से डेब्यू किया. जिसे खुद भानु चंदर ने डायरेक्ट किया था. इसके बाद जयंत ने तमिल फिल्म ‘मार्गाजी 16' भी की. लेकिन दोनों फिल्में फ्लॉप रहीं और जयंत फिल्म इंडस्ट्री में खुद को हीरो के रूप में स्थापित नहीं कर सके. इन दो फिल्मों के बाद ही उनका करियर खत्म हो गया.
 

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