- शाहरुख खान का हंसराज कॉलेज का कथित स्टूडेंट आईकार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है
- आईकार्ड में शाहरुख का नाम, पिता का नाम और कोर्स सही हैं लेकिन एक चूक है
- शाहरुख खान ने 2016 में अपनी डिग्री ली थी
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान का कथित हंसराज कॉलेज स्टूडेंट आईकार्ड इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस कार्ड को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ये उनके कॉलेज का आइडेंटिटी कार्ड है. अब इस तरह की कोई चीज आए और वो भी देश के सबसे अमीर एक्टर के बारे में तो एक बार उसकी पड़ताल करना तो बनता है. मैंने भी सोचा कि इसकी पड़ताल की जाए क्योंकि मैं खुद हंसराज कॉलेड का स्टूडेंट रहा हूं. ऐसे में जब मेरी नजर कॉलेज के प्रिंसिपल के नाम पर गई तो माथा ठनका. फिर मैंने सोचा चलो अब इसे चेक करते हैं.
शाहरुख खान के कथित हंसराज कॉलेज स्टूडेंट आईकार्ड में उतरकर जांच की तो सच्चाई चौंकाने वाली निकली. पिता का नाम बिल्कुल सही है, लेकिन प्रिंसिपल का नाम और सिग्नेचर गलत लगे. आईकार्ड में नाम है: शाहरुख खान, पिता का नाम: ताज मोहम्मद खान, कोर्स: बीए (ऑनर्स) इकोनॉमिक्स, रोल नंबर: 555, सेशन: 1985-88, जारी तारीख: 15 जुलाई 1986. रोल नंबर 555 को बाद में शाहरुख का लकी नंबर माना गया, यही बात फैंस को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है.
लेकिन असली पेंच प्रिंसिपल के नाम पर फंस गया. कार्ड पर सिग्नेचर दिख रहा है के.एल कपूर जैसा. अब सवाल ये है कि 1986 में हंसराज कॉलेज के प्रिंसिपल कौन थे? हंसराज कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 1985 से 1991 तक प्रिंसिपल डॉ. एन.के. उबेरॉय थे. जे.के. कपूर तो 1992 से 2003 तक प्रिंसिपल रहे.
यानी 1986 में जे.के. कपूर का प्रिंसिपल होना नामुमकिन है. हो सकता है वो वाइस प्रिंसिपल हों. लेकिन ऐसे में उनके सिग्नेचर यहां नहीं होने चाहिए. चलिए ये भी मान लेते हैं कि प्रिंसिपल की जगह वाइस प्रिंसिपल को सिग्नेचर के लिए अधिकृत किया गया है तो ऐसे में जे.के. कपूर होना चाहिए था. इससे साफ हो जाता है कि यह आईकार्ड या तो AI जनरेटेड है या फिर किसी फैन ने पुरानी तस्वीर में एडिटिंग कर बनाया है.
1985-88 के बीच शाहरुख ने हंसराज कॉलेज से बीए ऑनर्स इकोनॉमिक्स किया. दरअसल, शाहरुख खान की कॉलेज लाइफ को लेकर फैंस में हमेशा क्रेज रहा है. उनकी पुरानी मार्कशीट, एडमिशन फॉर्म और फोटो समय-समय पर वायरल होते रहते हैं. 2016 में जब शाहरुख डिग्री लेने कॉलेज गए तो प्रिंसिपल डॉ. रमा से मुलाकात की थी.