संजय कपूर की 30,000 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद मामले में आया नया मोड़, दिल्ली हाई कोर्ट ने वसीयत की फोरेंसिक जांच के दिए निर्देश

Sanjay Kapur Property Dispute Case : दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति की विरासत की लड़ाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी वसीयत की फोरेंसिक और हैंडराइटिंग जांच की इजाज़त दे दी है.

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Sanjay Kapur Property Dispute Case : संजय कपूर की 30,000 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद मामले में आया नया मोड़
नई दिल्ली:

Sanjay Kapur Property Dispute Case : दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति की विरासत की लड़ाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी वसीयत की फोरेंसिक और हैंडराइटिंग जांच की इजाज़त दे दी है. यह आदेश बॉलीवुड एक्टर करिश्मा कपूर के बच्चों - समायरा और कियान - और संजय की मां रानी कपूर की अपील के बाद आया है, जिन्होंने वसीयत के असली ना होने को चुनौती दी हैं. उन्होंने और आरोप लगाया है कि इसे उनकी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने जाली कागजात बनाया है.

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल ने फैसला सुनाया कि बच्चों और रानी कपूर की जांच की अर्जी के खिलाफ प्रिया कपूर की आपत्तियों में कोई दम नहीं था. अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा कि वादी - समायरा, कियान और रानी कपूर - को रजिस्ट्री के पास सीलबंद लिफाफे में रखी असली वसीयत की जांच करने का कानूनी अधिकार है. "ताकि इसकी असली होने का पता लगाया जा सके."

कोर्ट ने अब 10 मार्च को फोरेंसिक और हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की मदद से ऑथराइज्ड प्लीडर्स के वकीलों की मौजूदगी में ओरिजिनल विल के इंस्पेक्शन की इजाजत दी है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि ओरिजिनल विल की कोई भी फोटो या कॉपी की इजाजत नहीं होगी. इंस्पेक्शन 10 मार्च, 2026 को दोपहर 3:00 बजे, डिफेंडेंट्स के ऑथराइज्ड वकील की मौजूदगी में तय किया गया है. वसीयत पहले 25 सितंबर, 2025 को एक सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट में जमा की गई थी. प्रिया कपूर ने फोरेंसिक और हैंडराइटिंग की जांच की मांग वाली अर्जी का कड़ा विरोध किया था. हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया.

करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से पेश वकील शांतनु अग्रवाल ने तर्क दिया कि अगर वसीयत असली है, तो फोरेंसिक जांच का कोई विरोध नहीं होना चाहिए. उन्होंने संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) को उनकी एक्सपायरी से पहले सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी जोर दिया.  कोर्ट ने कहा कि CDR एक साल के अंदर एक्सपायर हो जाते हैं. हाई कोर्ट अब संजय कपूर के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की अर्जी पर 10 मार्च को अर्जेंट सुनवाई करेगा.

प्रिया कपूर के वकील ने तर्क दिया था कि CDRs के बारे में जिन मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा किया गया था, वे डिलीट की गई, नकली  थीं. 

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