सैफ अली खान ने हाल ही में कोलकाता में हुए 'टाइगर पटौदी मेमोरियल लेक्चर 2026' में अपने पिता मंसूर अली खान पटौदी को याद किया, जिन्हें 'टाइगर पटौदी' के नाम से जाना जाता है. इस प्रोग्राम में सैफ ने अपने पिता की विरासत, क्रिकेट के प्रति उनके जुनून और उनके शांत स्वभाव का जिक्र किया. साथ ही ये भी बताया कि कैसे उनकी मां शर्मिला टैगोर उनके पिता के इस स्वभाव से परेशान हो जाती थीं. सैफ ने याद करते हुए बताया कि टाइगर पटौदी घर पर अपने क्रिकेट से जुड़ी उपलब्धियों के बारे में बहुत कम बात करते थे. वह कम बोलने वाले इंसान थे.
‘पिता के इस बात को नापसंद करती थीं मां'
सैफ ने कहा, "घर पर वह अपनी उपलब्धियों के बारे में शायद ही कभी बात करते थे. वह किसी भी चीज के बारे में बहुत कम बोलते थे. डिनर या किसी भी तरह की गैदरिंग में, जब उनसे कम जानकारी रखने वाले लोग अपनी राय दे रहे होते थे, तो मेरी मां यह देखकर झुंझला जाती थीं. इस पर वह कहते थे कि मुझसे किसी ने पूछा ही नहीं और इसलिए वह चुप रहते थे, क्योंकि सच में किसी ने उनसे कुछ पूछा ही नहीं होता था. यह आत्मविश्वास का एक बिल्कुल ही अलग अंदाज था."
क्रिकेट में टाइगर पटौदी का योगदान
हालांकि, सैफ ने बताया कि टाइगर पटौदी का मानना था कि दूसरे खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाना बेहद जरूरी है. सैफ ने कहा, "उनका विश्वास, 'विश्वास' जगाने में था, वह भारतीय खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरना चाहते थे, जिन्हें इससे पहले कभी यह नहीं बताया गया था कि वे दुनिया के क्रिकेट जगत पर अपना दबदबा बना सकते हैं. उस दौर में, जब भारतीय टीमों से सिर्फ मैच में हिस्सा लेने की उम्मीद की जाती थी, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीम को जीतने के लिए खेलना चाहिए और मुझे लगता है कि सोच में आया यह जबरदस्त बदलाव ही क्रिकेट जगत में उनका सबसे बड़ा योगदान था."
घर का कैसा था माहौल?
सैफ ने कहा, "मैं उन्हें बड़े ही आदर के साथ 'अब्बा' कहकर बुलाता था, वह बहुत कम बोलने वाले इंसान थे, लेकिन न जाने कैसे वह अपनी कम बातों में ही वह सब कुछ कह जाते थे, जो सच में मायने रखता था. मेरे बचपन के दिनों में हमारे घर का कोना-कोना क्रिकेट से ही भरा रहता था. घर में मौजूद हर कोई क्रिकेट खेलता था, चाहे वह ड्राइवर हों, घर का स्टाफ हो, परिवार के लोग हों, चचेरे-ममेरे भाई-बहन हों या फिर माली. क्रिकेट हमेशा से ही लोगों के बीच समानता लाने का एक बेहतरीन जरिया रहा है, और इसने हमें बचपन से ही सभी लोगों का आदर करना सिखाया."