एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स की फिल्म 'बूंग' पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने बाफ्टा (BAFTA) जीता है. इस फिल्म ने प्रतिष्ठित ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (BAFTA) अवॉर्ड्स में 'बेस्ट चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म' का सम्मान अपने नाम किया है. मणिपुरी भाषा की इस फिल्म की ऐतिहासिक जीत न केवल फिल्म की टीम के लिए, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर (Northeast) से आने वाली क्षेत्रीय कहानियों के लिए भी एक बहुत बड़ा और यादगार पल है.
इस जीत पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए, एक्सेल एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी ने कहा, "'बूंग' भारत के पूर्वोत्तर की एक भाषा में बनाई गई थी, एक ऐसा क्षेत्र जो अपनी संस्कृति और कहानियों में बहुत समृद्ध है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे बहुत कम दिखाया जाता है. आज यहां इसकी गूंज और इसका जश्न हमारे इस यकीन को और पक्का करता है कि कहानियों को बड़े स्केल की नहीं, बल्कि रूह की जरूरत होती है. यह सिर्फ हमारी टीम की जीत नहीं है, बल्कि भारत की उन तमाम आवाजों की जीत है जिन्हें अक्सर सुना नहीं जाता."
एक्सेल एंटरटेनमेंट के एक्टर-प्रोड्यूसर फरहान अख्तर ने भी फिल्म को मिली इस पहचान पर अपनी खुशी और गर्व जाहिर किया. उन्होंने कहा, "@lp_devi और #Boong की पूरी कास्ट और क्रू के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात कुछ और नहीं हो सकती. इतनी खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली फिल्म बनाने और इस सम्मान के लिए उन्हें ढेर सारी बधाइयां. इस फिल्म का हिस्सा होने पर मुझे बहुत गर्व है और इसे बाफ्टा (BAFTA) के मंच पर सम्मानित होते देखना वाकई एक यादगार पल था. जूरी को बहुत-बहुत शुक्रिया. हमारे देश के तमाम सपने देखने वालों और कहानीकारों के लिए इसके बहुत बड़े मायने हैं."
मणिपुर की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म परिवार और उम्मीद की एक बेहद भावुक कहानी कहती है. इसमें गूगुन किपगेन द्वारा निभाया गया एक छोटा लड़का 'बूंग' अपने परिवार को फिर से मिलाने का सपना देखता है. अपनी सिंगल मदर मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजम) के साथ रहने वाला बूंग अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ अपने लापता पिता को खोजने के सफर पर निकल पड़ता है. यह फिल्म मासूमियत, जज्बात और मां-बच्चे के अटूट रिश्ते को बहुत ही खूबसूरती से दिखाती है.
इस ऐतिहासिक जीत के साथ, 'बूंग' ने न केवल बाफ्टा (BAFTA) के इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर भारत के रीजनल सिनेमा की आवाज को भी बुलंद किया है.