9 साल पहले आई ये फिल्म थी गोविंदा की सबसे बड़ी गलती, खत्म कर दिया उनका करियर, नहीं कर सके कमबैक

गोविंदा ने 90 के दशक में कई ऐसी शानदार फिल्मी दीं, जिसने उन्हें हीरो नंबर वन का टाइटल दे दिया. उनकी कॉमेडी, एक्टिंग और डांसिंग ने उस वक्त बॉलीवुड के खान्स के स्टारडम को भी फीका कर दिया था. लेकिन अगले दशक में गोविंदा का जादू फीका पड़ने लगा.

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9 साल पहले आई ये फिल्म थी गोविंदा की सबसे बड़ी गलती
नई दिल्ली:

गोविंदा ने 90 के दशक में कई ऐसी शानदार फिल्मी दीं, जिसने उन्हें हीरो नंबर वन का टाइटल दे दिया. उनकी कॉमेडी, एक्टिंग और डांसिंग ने उस वक्त बॉलीवुड के खान्स के स्टारडम को भी फीका कर दिया था. लेकिन अगले दशक में गोविंदा का जादू फीका पड़ने लगा. उन्होंने ‘किल दिल' और ‘हैप्पी एडिंग' जैसी फिल्में की लेकिन उन्हें एक सोलो हिट की तलाश थी. जिसके बाद गोविंदा ने खुद अपने लिए फिल्म प्रोड्यूस करने का फैसला लिया और ये शायद उनकी जिंदगी का सबसे गलत फैसला था.

2017 में आई आखिरी फिल्म

गोविंदा वापसी करने के लिए बेताब थे.  2017 में उन्होंने एक फिल्म प्रोड्यूस की, जिसका नाम था, 'आ गया हीरो'. फिल्म में गोविंदा अपने जाने पहचाने अंदाज में नजर आए लेकिन तब तक ऑडियंस और उनकी पसंद बदल चुकी थी. एक्टर के करियर को फिर से खड़ा करने के बजाय, 'आ गया हीरो' ने उन्हें 30 साल पीछे धकेल दिया. इस फिल्म ने दर्शकों को याद दिलाया कि गोविंदा की कॉमेडी का अनोखा अंदाज, जिसने कभी सिनेमाघरों को हंसी से भर दिया था, अब पुराना हो चुका है.

फिल्म की रिलीज से पहले गोविंदा ने कहा था कि फिल्म उन लोगों को पसंद आएगी जो गोविंदा को देखने आते हैं और मेरे स्टाइल को पसंद करते हैं. लेकिन यहीं पर गोविंदा से चूक हो गई. 'हीरो नंबर 1' एक्टर, जिन्होंने 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1', 'साजन चले ससुराल' और ऐसी ही कई कॉमेडी फिल्मों के दम पर अपना करियर बनाया था, उन्होंने 'आ गया हीरो' में खुद को कुछ ज़्यादा ही सीरियसली ले लिया. इस फिल्म में एक्टर ACP रविंद्र वर्मा का किरदार निभाते हैं, जो सिर्फ़ भारी-भरकम डायलॉग बोलते हैं और जब भी मौका मिलता है, कम कपड़े पहनी महिलाओं के साथ डांस करते हैं.

बेतूके डायलॉग्स

फिल्म के डायलॉग्स दर्शकों को बेतुके लगे और इसे पसंद नहीं किया हया. वह ऐसे डायलॉग बोलते हैं, "न मैं सबूत ढूंढता हूं, न गवाह ढूंढता हूं, मुजरिम नज़र आ जाए तो चने की तरह भूनता हूं," और, "नाम पूछने से पहले डाइपर तो पहन ले. साफ़ क्या तेरा बाप करेगा?"

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कमजोर कहानी

फिल्म में गोविंदा यानी एसीपी रविंद्र वर्मा को एक आतंकवादी को पकड़ने के लिए चुना जाता है, जिसकी पहचान सिर्फ़ उसकी डरावनी हंसी से की जा सकती है. वह एक प्लान बनाता है, जिसका नाम 'अभिनय चक्र'  है. इस प्लान के तहत वह अपने अंदर के एक्टर को बाहर निकालता है और ऐसी सिचुएशन बनाता है, जिसमें सभी गुंडे अपनी गलतियां मान लेते हैं.

फिल्म शुरू में थोड़ा हंसाती है लेकिन बाद में बोरिंग हो जाती है. फिल्म के भड़कीले डांस नंबर भी लोगों को पसंद नहीं आए. गोविंदा का सिग्नेचर स्टेप भी जादू नहीं दिखा पाया.

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गोविंदा की आखिरी बड़ी हिट 2007 में आई पार्टनर थी. गोविंदा के फैंस अब भी उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं. 

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