प्रकाश झा द्वारा निर्देशित वेब सीरीज ‘संकल्प' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया, जो समाज और राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती कहानी है. इस सीरीज को लेकर एनडीटीवी ने नाना पाटेकर, निर्देशक प्रकाश झा और अभिनेता संजय कपूर से खास बातचीत की. बातचीत के दौरान नाना पाटेकर और प्रकाश झा ने फिल्म सितारों के एंटोरेज और निर्देशक व कलाकारों के बदलते समीकरण पर खुलकर बात की कैसे निर्देशक और कलाकार के बीच संवाद कम हो गया है और उनके बीच कई तरह की लेयर्स आ गई हैं, जिसका असर सीधे फिल्मों पर पड़ता है.
बातचीत के दौरान नाना पाटेकर से जब पूछा गया कि ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें यह पसंद नहीं है कि फिल्म को लेकर उनका सेक्रेटरी निर्देशक से बात करे, तो उन्होंने कहा, “अरे सेक्रेटरी! काम करने वाला मैं हूं. मुझे मालूम होना चाहिए कि इसके जहन में क्या है. मेरा सेक्रेटरी बताएगा? मेरी कंपनी बताएगी इसको (प्रकाश झा की तरफ इशारा करते हुए) कि नहीं, यह यह कर रहा है, नहीं कर रहा है? वह क्या मुझे समझाएंगे?”
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प्रकाश झा, “नहीं, आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की जो दुर्गति है, वह इसी वजह से है कि संवाद नहीं है एक्टर और डायरेक्टर के बीच. रचना करने वाले में और परफॉर्म करने वाले के बीच संवाद नहीं है. कभी हम विस्तार से इसके बारे में बात करेंगे. संवाद खत्म हो गया है. लेखक या निर्देशक ने क्या लिखा है, वह क्या कहना चाहता है और किससे कहना है. इन सबके बीच इतनी लेयर्स बन गई हैं और एक्टरों के बीच यह होड़ हो गई है कि अब कौन कितनी ज्यादा लेयर बना लें.”
नाना पाटेकर, “अरे यार, मैं सेट पर जाता हूं तो मेरे दस लोग मेरे साथ हैं. मेरा प्रोड्यूसर पैसे देता है, इसका मतलब यह तो नहीं है कि मैं उसके ऊपर सब कुछ थोप दूं. दस लोग हैं, दस-बारह लोग हैं, पंद्रह लोग हैं वह सभी का खर्चा उठाता है.”
प्रकाश झा, “यह अनऑफिशियल बातें हैं, इस प्लेटफॉर्म पर नहीं करते.”
नाना पाटेकर, “नहीं, नहीं, कॉन्ट्रोवर्शियल नहीं है. खर्चे के अलावा मैं समझता हूं कि मैं जिससे सौ रुपये ले रहा हूं, तो फिर मैं दस लोग ले के आऊं या पंद्रह लोग ले के आऊं उनके पैसे मैं खुद दूंगा. वह पहले ही मैं तुम्हें कोट कर दूंगा. मैं दस की जगह बारह रुपये लेता हूं तो बारह में से दो रुपये मेरे अपने हैं. तुम अपना देखो न, तुम पचास आदमी ले के आओ. तुम अपनी फिल्म में देखो तुम्हें क्या अच्छा लगता है. मुझे लगता है कि यह ज्यादती होती है. मेरा रात को दो बजे मुझे अगर कोई तकलीफ है, तो मैं उसको रात को फोन करके कहूं, ‘प्रकाश, यह मेरे समझ में नहीं आ रहा.' वह सहूलियत तो होनी चाहिए, उसको भी होनी चाहिए. नाना को वह कभी भी फोन करें. एक्टर और डायरेक्टर का वह संवाद अगर नहीं रहेगा, तो काम करने का मजा ही नहीं आएगा. सेट पर जाने के बाद, ‘हां बताओ क्या करना है?' अरे, थोड़े ही इतने आसमान से गिरे हो! इतनी औकात है तुम्हारी? अब बताओ क्या कर रहे हो. फिर देखते हैं न, चेहरे पर कुछ भाव आता नहीं, कुछ नहीं है और बिल्कुल जैसे आपको कुछ नहीं कौड़ी जैसी आंखें हैं और स्टार बने…”
सवाल, पैसों की बात तो अलग है लेकिन कई बार जो क्रू होता है, उसका इंटरफेरेंस सीन्स में और परफॉर्मेंस के दौरान भी होता है.
नाना पाटेकर, “अरे यार, उनको छोड़ो. उनको पास आने ही मत दो. क्रू-व्रू कुछ नहीं. मैं और मेरा डायरेक्टर खत्म हो गई बात और मेरे को-एक्टर्स. वैसे ही होना चाहिए.”
में बता दें कि ‘संकल्प' 11 मार्च को अमेजन एमएक्स प्लेयर पर रिलीज होगी. इसकी मुख्य प्रेरणा द्रोणाचार्य और एकलव्य की अंगूठे वाली कथा से ली गई है. इस सीरीज में क्रांति प्रकाश झा और जीशान अय्यूब भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे.
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