मुगल ए आजम के प्रीमियर का 64 साल पुराना वीडियो, एक करोड़ में बना था गाना, 105 बार लिखे गए बोल

Mughal-e-Azam Song: साल 1960 में रिलीज हुई मुगल-ए-आजम का मशहूर गीत ‘जब प्यार किया तो डरना क्या…’ को सिर्फ एक सुपरहिट गाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की सबसे भव्य संगीत रचनाओं में गिना जाता है. 66 साल बाद भी इसकी चमक फीकी नहीं पड़ी है.

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Mughal-e-Azam Movie: मुगल ए आजम के आइकॉनिक गाने के लिए बना था कांच का महल
नई दिल्ली:

आज करोड़ों रुपये में बनने वाले गाने आम बात लगते हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा में एक ऐसा दौर भी था जब टेक्नोलॉजी सीमित थी और रिसोर्सेस कम थे. लेकिन इसके बावजूद फिल्ममेकर्स ऐसी चीजें रच रहे थे, जिनकी मिसाल आज तक दी जाती है. साल 1960 में रिलीज हुई मुगल-ए-आजम का मशहूर गीत ‘जब प्यार किया तो डरना क्या' सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उस दौर की फिल्मी दीवानगी और परफेक्शन की सबसे बड़ी मिसाल था. कहा जाता है कि इस एक गाने को तैयार करने में उस समय करीब एक करोड़ रुपये तक खर्च कर दिए गए थे, जो उस दौर के हिसाब से काफी ज्यादा रकम मानी जाती है.

इको इफेक्ट के लिए बाथरूम

उस दौर में टेक्नोलॉजी आज की तरह एडवांस नहीं थी, लेकिन क्रिएटिव अप्रोच बड़ी जबरदस्त थी. फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद चाहते थे कि गाने में गूंज का एहसास हो, लेकिन आज की तरह एडवांस साउंड टेक्नोलॉजी और डिजिटल इफेक्ट्स मौजूद नहीं थे, जिसके जरिए इको इफेक्ट पैदा किया जा सके. ऐसे में एक बेहद अनोखा व क्रिएटिव तरीका अपनाया गया. लता मंगेशकर ने ये गाना बाथरूम में गाया ताकि नेचुरल ढंग से इको इफेक्ट मिल सके.

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शीशों से तैयार हुआ था भव्य सेट  

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इस फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके विशाल और महंगे सेट्स की होती है. इस गाने के लिए एक भव्य ‘शीश महल' तैयार किया गया था. सेट को हजारों शीशों और कांच से सजाया गया ताकि मधुबाला का हर मूवमेंट अलग-अलग प्रतिबिंबों में दिखाई दे. उस दौर में इस तरह की बारीकी और इतना बड़ा खर्च बहुत बड़ी बात थी. आज भी इस गाने को देखकर इन छोटी-छोटी बातों को नोटिस किया जा सकता है. यही वजह है कि इस गाने को आज भी एक मास्टरपीस माना जाता है.

शकील बदायूंनी ने 105 बार बदले गाने के बोल

इस फिल्म के मेकर्स परफेक्शन को लेकर किस कदर जुनूनी थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गीतकार शकील बदायूंनी ने इस गाने के बोल एक-दो बार नहीं बल्कि करीब 105 बार बदले थे. हर शब्द, हर लाइन और हर एहसास को बार-बार परखा गया, तब जाकर गाना फाइनल हुआ. के. आसिफ चाहते थे कि गाने में शाही ठाठ भी दिखे और अनारकली के प्यार की बगावत भी महसूस हो. यही वजह है कि आज भी ‘जब प्यार किया तो डरना क्या…' को सिर्फ एक सुपरहिट गाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की सबसे भव्य संगीत रचनाओं में गिना जाता है. 66 साल बाद भी इसकी चमक फीकी नहीं पड़ी है.

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