मनोज कुमार की एक जिद ने बदल डाली प्रेम की जिंदगी, जब 61 साल पहले भारत कुमार ने कहा था- तुम नहीं तो फिल्म नहीं

Manoj Kumar stubbornness changed: प्रेम धवन ने जब शहीद फिल्म में संगीत देने का ऑफर ठुकरा दिया था. हालांकि मनोज कुमार की एक जिद ने उनकी किस्मत बदल कर रख दी. 

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मनोज कुमार ने बदली इस संगीतकार की किस्मत
नई दिल्ली:

भारतीय सिनेमा के मशहूर गीतकार प्रेम धवन के गीत आज भी लोगों में जोश जगा देते हैं. 7 मई 2001 को उनका निधन हो गया, लेकिन 'ए वतन, ए वतन' और 'सरफरोशी की तमन्ना' जैसे गीत उन्हें लोगों के बीच अमर बनाए रखते हैं. बहुत ही कम लोग जानते हैं कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आया था, जब उन्होंने खुद ही एक बड़ा मौका ठुकरा दिया था. बाद में एक दोस्त की जिद ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी और उन्हें नई पहचान दिलाई. प्रेम धवन का जन्म 13 जून 1923 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था. उनके पिता ब्रिटिश शासन में जेल अधीक्षक थे. उन्होंने अपनी पढ़ाई लाहौर में की और वहीं से उनके जीवन की दिशा तय होने लगी.

हरियाणा के अंबाला में जन्मे प्रेम धवन

पढ़ाई के दौरान ही वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े, जिससे उनके अंदर देशभक्ति की भावना और मजबूत हुई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1946 में की, जब वह फिल्म 'आज और कल' में एक संगीतकार के सहायक के रूप में काम करने लगे. इसके बाद वह मुंबई आए और इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन से जुड़ गए. यहां उन्हें महान संगीतकार रविशंकर से संगीत सीखने का मौका मिला. इसी साल उन्होंने फिल्म 'धरती के लाल' से बतौर गीतकार अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, जिनमें 'आराम', 'तराना', 'आसमान', 'काबुलीवाला', 'एक फूल दो माली' और 'पूरब और पश्चिम' जैसी फिल्में शामिल हैं. उनके गीतों में सादगी और गहराई होती थी, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती थी.

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धरती के लाल से की करियर की शुरूआत 

उनके करियर का सबसे दिलचस्प मोड़ फिल्म 'शहीद' के दौरान आया. जब मनोज कुमार इस फिल्म के लिए उनके पास गए और उनसे संगीत देने की बात कही, तो प्रेम धवन ने साफ इनकार कर दिया. उनका मानना था कि वह एक अच्छे गीतकार हैं और उन्हें उसी काम पर ध्यान देना चाहिए. लेकिन, मनोज कुमार अपनी बात पर अड़े रहे. उन्होंने कहा कि अगर प्रेम धवन संगीत नहीं देंगे, तो वह फिल्म ही नहीं बनाएंगे. आखिरकार उनकी जिद के आगे प्रेम धवन को मानना पड़ा. इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया. फिल्म 'शहीद' के गीत और संगीत लोगों के दिलों में बस गए. 'ए वतन, ए वतन' और 'मेरा रंग दे बसंती चोला' जैसे गीत आज भी देशभक्ति के प्रतीक माने जाते हैं.

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एक्टिंग की दुनिया में भी आजमाया हाथ

इस फिल्म ने प्रेम धवन को नई पहचान दी और यह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन गई. प्रेम धवन सिर्फ गीतकार और संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने अभिनय और कोरियोग्राफी में भी हाथ आजमाया. उन्होंने 'लाजवाब' और 'गूंज उठी शहनाई' जैसी फिल्मों में अभिनय किया. वहीं, 'नया दौर', 'धूल का फूल' और 'वक्त' जैसी फिल्मों में कोरियोग्राफर के रूप में काम किया. हालांकि इस क्षेत्र में उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हर काम को पूरी मेहनत से किया. 

पद्म श्री से सम्मानित हुए प्रेम धवन

उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1970 में पद्म श्री से सम्मानित किया. इसके बाद 1971 में उन्हें फिल्म 'नानक दुखिया सब संसार' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. समय के साथ 1980 के दशक में उनके करियर की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई, लेकिन उनके गीतों की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई. 7 मई 2001 को 77 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. 

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